PM मोदी से मिलने शेख हसीना का एक महीने में दोबारा दिल्ली दौरा, भारत और बांग्लादेश के बीच क्या पक रहा है?
Sheikh Hasina India Visit: बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 21 जून को भारत की यात्रा पर दिल्ली आ रही हैं और सिर्फ 15 दिनों में उनकी दिल्ली का ये दूसरा दौरा हो रहा है। इससे पहले, शेख हसीना, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए भारत आई थीं।
शेख हसीना की दिल्ली यात्रा, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत की तरफ से आयोजित होने वाली पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि शेख हसीना अगले महीने 9 जुलाई को चीन की यात्रा पर जाने वाली हैं, लेकिन उससे पहले दिल्ली आकर वो भारत और बांग्लादेश के बीच के रिश्ते को संतुलित करने की कोशिश करेंगी, ताकि दोनों देशों के बीच कोई गलतफहमी ना हो।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शेख हसीना के बीच द्विपक्षीय बैठक होने वाली है, लेकिन उससे भी बड़ी बात ये है, कि इस साल जनवरी में हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद शेख हसीना की ये पहली विदेश यात्रा है। ऐसा देखा गया है, कि बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मॉरीशस और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में चुनाव के बाद जो सरकार बनती है, उसके प्रमुख का पहला विदेशी दौरा दिल्ली का होता है।
हालांकि, पिछले साल मालदीव के राष्ट्रपति बनने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने इस परंपरा को तोड़ दिया और उन्होंने भारत की जगह अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए तुर्की को चुना था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में चुनाव खत्म होने और नई सरकार बनने का इंतजार कर रही थीं और दिल्ली का पहला दौरा खत्म करने के बाद ही उन्होंने चीन की यात्रा शुरू करने का फैसला किया था, ताकि भारत और बांग्लादेश के बीच के रिश्ते में किसी तरह की कोई गलतफहमी ना आए।
शेख हसीना-नरेन्द्र मोदी में द्विपक्षीय बैठक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में शेख हसीना और नरेन्द्र मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच के रक्षा साझेदारी को बढ़ाने, सीमा पार संपर्क को मजबूत करने, व्यापारिक रिश्ते को और आगे ले जाने जैसे मुद्दों पर केन्द्रित होगा।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच की बातचीत में साथ में संयुक्त सैन्य अभ्यास करने पर भी चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, भारत ने बांग्लादेश को 500 मिलियन डॉलर का ऋण देने की भी पेशकश की है, जिसका इस्तेमाल अभी तक बांग्लादेश ने नहीं किया है, और माना जा रहा है, कि इस मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत होगी।
इसके अलावा दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और सड़क मार्ग, रेल मार्ग और कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ साथ विभिन्य योजनाओं का आकलन भी करेंगे।
वहीं, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने ये भी कहा है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस साल किसी भी समय बांग्लादेश की आधिकारिक यात्रा कर सकते हैं और उस दौरान बांग्लादेश में उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
बांग्लादेश के एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार द डेली स्टार ने बांग्लादेश उच्चायोग और भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है, कि "शेख हसीना के दिल्ली दौरे का फैसला अचानक लिया गया है, लेकिन दोनों देशों का नेतृत्व, दोनों देशों में चुनाव खत्म होने के बाद रिश्ते को आगे ले जाना चाहता था।"
अखबार ने आगे लिखा है, कि "दोनों देशों के नेता कनेक्टिविटी और व्यापार को लेकर काफी गंभीर हैं और उसमें तेजी से विकास लाने के लिए बड़े फैसले ले सकते हैं।"
चीन दौरे पर जाने वाली हैं शेख हसीना
दिल्ली की यात्रा के बाद शेख हसीना बीजिंग जाने वाली हैं और उनकी 9 से 12 जुलाई तक होने वाली यात्रा को लेकर बांग्लादेश में चीनी राजदूत याओ वेन ने संवाददाताओं से कहा, चीन की कोशिश बांग्लादेश में अपने निवेश को बढ़ाने की है और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चीन का जोर है। इसके अलावा, चीनी राजदूत ने ये भी कहा है, कि बांग्लादेश ने जो विजन-2041 तैयार किया है, चीन की कोशिश उस लक्ष्य को पूरा करने में बांग्लादेश की मदद करना है।
चीनी राजदूत ने शेख हसीना की होने वाली चीन की यात्रा को 'गेमचेंजर' करार दिया है।

मोदी सरकार में गहरे हुए हैं भारत-बांग्लादेश संबंध
बांग्लादेश और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंध बहुत गहरे हैं, एक समय दोनों देश एक ही थे और भारत ने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, मोदी और हसीना के नेतृत्व में ये संबंध काफी मजबूत हुए हैं।
वहीं, भारत के साथ मौजूदा संबंधों को लेकर शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कहा है, कि "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के दौरान, शेख हसीना के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और बांग्लादेश के बीच के संबंध और आपसी सम्मान अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गये हैं।"
अवामी लीग ने आगे कहा है, कि "PM मोदी और पीएम शेख हसीना के नेतृत्व में दोनों देशों ने आपसी कारोबार, कम्युनिकेशन, डिफेंस और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है।" इसके अलावा, भारत ने बांग्लादेश में भारी निवेश करना भी शुरू कर दिया है।
2014 में दिल्ली में सत्ता संभालने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने भारत की विदेश नीति में 'पड़ोसी पहले' की नीति को मजबूती से आगे बढ़ाया है और बांग्लादेश के साथ संबंध काफी मजबूत भी हुए हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति में ना सिर्फ चीन और भारत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है, बल्कि शेख हसीना सरकार ने मोदी सरकार का भरोसा भी जीतने की कोशिश की है।
क्या अवैध घुसपैठ पर लग पाएगा लगाम?
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की भारत यात्रा कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है। खासकर, जब पिछले महीने उनकी पार्टी के एक सांसद की कोलकाता में हत्या कर दी गई थी। ये हत्या बांग्लादेश के ही कुछ बदमाशों ने की थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को उजाकर कर दिया, कि कैसे बांग्लादेश से अवैध घुसपैठिए, आतंकवादी, भगोड़े और जिहादी आसानी से भारत में आ जाते हैं और भारत की सुरक्षा के लिए चिंता पैदा करते हैं।
भारत ने आरोप लगाए हैं, कि बांग्लादेश की सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में घुसपैठ करने देती है और रोहिंग्या धीरे धीरे पश्चिमी पंगाल के अलग अलग हिस्सों में होते हुए पूरे देश में फैलने लगे हैं।
इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण मुद्दा, जिसपर दोनों देशों के बीच बात होने की संभावना है, वो ये, कि कुछ दिन पहले शेख हसीना ने अमेरिका औऱ ब्रिटेन का नाम लिए बगैर आरोप लगाया था, कि म्यांमार, बांग्लादेश और भारत की सीमा पर अमेरिका एक ईसाई देश बनाना चाहता है।
शेख हसीना के अलावा उनकी पार्टी अवामी लीग के 14 पार्टी गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने भी आरोप लगाया है, कि बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को लेकर "पूर्वी तिमोर जैसा एक ईसाई राज्य बनाने" की साजिश चल रही है।
हालांकि, शेख हसीना ने भारत का नाम नहीं लिया था, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि बांग्लादेश, भारत और म्यांमार के भीतर एक ईसाई राज्य बनाने के लिए पश्चिमी देशों की एक गंभीर साजिश चल रही है।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के बयान पर टिप्पणी करते हुए, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार इकबाल सोभन चौधरी ने कहा रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक से कहा था, कि "प्रधानमंत्री उचित सबूत के बिना नहीं बोलती हैं। मुझे यकीन है कि उन्होंने ये बयान देने से पहले अच्छी तरह से सोचा होगा।"
बांग्लादेशी नेताओं का आरोप है, कि अमेरिका का मकसद एक सैन्य अड्डा बनाना है, जिससे वो भारत पर नजर रखने की कोशिश करेगा। और इस साजिश के लिए अमेरिका, सरकार विरोधी तत्वों को समर्थन दे रहा है, जिसमें नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) और पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (पीडीएफ) शामिल हैं।"
ऐसी रिपोर्ट है, कि म्यांमार में कुकी-चिन विद्रोही, जिन्होंने मणिपुर में आग लगाकर रख दी है, उसे अमेरिका का समर्थन मिला हुआ है। लिहाजा, इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच अहम बातचीत हो सकती है।












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