सुअर के दिल का हार्ट ट्रांसप्लांट फिर हुआ फेल, इंसान के शरीर में 40 दिनों बाद थम गईं धड़कनें
पिछले महीने अमेरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉक्टरों ने एक शख्स के शरीर में आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर का दिल प्रत्यारोपित किया था। यह दूसरी घटना थी जिसमें किसी इंसान के अंदर सुअर का अंग लगाया गया है।
अब यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन ने ऐलान किया है कि, जिस शख्स को सुअर का हार्ट लगाया गया था, उसके 40 दिनों के बाद सोमवार को मौत हो गई है। इससे पहले 2022 में भी एक शख्स को इसी अस्पताल में सुअर का हार्ट प्रत्यारोपित किया था। उसकी भी 2 महीने बाद मौत हो गई थी।

सोमवार को जिस शख्स की मौत हुई है, उसे लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन ने खुलासा किया कि प्रत्यारोपित हृदय पहले महीने तक स्वस्थ तरीके से काम कर रहा था, लेकिन हाल के दिनों में उसमें अस्वीकृति के लक्षण दिखाई देने लगे थे।
वैस्कुलर बीमारी से पीड़ित मृतक लॉरेंस फॉकेट (58) 20 सितंबर को आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर के हृदय का प्रत्यारोपण करने वाले दुनिया के दूसरे मरीज बने थे। डॉक्टरों ने बयान में कहा कि फॉसेट ने सर्जरी के बाद शुरू में शानदार रिकवरी की थी। उनके प्रत्यारोपित हृदय ने अच्छा प्रदर्शन किया। पहले महीने के दौरान अस्वीकृति का कोई संकेत नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने फिर से चलने के लिए फिजिकल थैरिपी भी शुरू की थी।
डॉक्टरों ने बताया कि, हाल के दिनों में उनके दिल ने अस्वीकृति के शुरुआती लक्षण दिखाना शुरू कर दिए थे। मेडिकल टीम के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद लॉरेंस फॉकेट की 30 अक्टूबर को मौत हो गई। रिपोर्ट में फॉकेट की पत्नी ऐन के हवाले से कहा गया है कि, मुझे पता था कि हमारे साथ उनका समय कम था और दूसरों के लिए कुछ करने का यह उसका आखिरी मौका था। उसने कभी नहीं सोचा था कि वह इतने लंबे समय तक जीवित रहेगा।
मृतक लॉरेंस फॉकेट की सर्जरी करने वाले बार्टले पी. ग्रिफ़िथ ने कहा कि, फॉकेट की अंतिम इच्छा थी कि हमने अपने अनुभव से जो सीखा है उसका अधिकतम लाभ उठाएं, ताकि मानव अंग अनुपलब्ध होने पर दूसरों को नए दिल के लिए मौका की गारंटी दी जा सके।












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