फ्री में महिलाओं को सेनेटरी पैड देगी यहां की सरकार, ऐसा करने वाला ये विश्व का पहला देश
नई दिल्ली। माहवारी में जहां महिलाओं को असहनीय दर्द सहना पड़ता है वहीं, उस दौरान अगर स्वच्छता का ठीक से ध्यान न दिया जाए तो गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। भारत जैसे देशों में आज भी कई महिलाएं माहवारी में कपड़े का इस्तेमाल करती हैं जिस वजह से उन्हें कई बार इंफेक्शन की भी शिकायत हो जाती है। सही समय पर अगर उन्हें चिकित्सा सुविधा न मिले तो इसके गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। इस बीच स्कॉटलैंड जैसे देश ने महिलाओं को मुफ्त में सेनेटरी नैपकिन देने का ऐलान किया है।

मुफ्त में सेनेटरी उत्पाद देगा स्कॉटलैंड
जी हां, हाल ही में स्कॉटलैंड की संसद में सेनेटरी नैपकिन को लेकर एक विधेयक पेश किया गया जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई है। पीरियड्स या माहवारी के दौरान महिलाओं को होने वाली दिक्कतों और असुविधा को देखते हुए स्कॉटलैंड की संसद ने यह कदम उठाया है। इसी के साथ महिलाओं को मुफ्त में सेनेटरी नैपकिन देने वाला स्कॉटलैंड दुनिया का पहला देश बन गया है। कानून बनने के बाद स्कॉटलैंड के सभी दवा दुकान और सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त में सेनेटरी उत्पाद दिया जाएगाा।

दुनिया का पहला ऐसा देश बना स्कॉटलैंड
स्कॉटलैंड की संसद का यह फैसला सराहनीय है और सोशल मीडिया सहित अन्य स्थानों पर इस फैसले की खूब तारीफ की जा रही है। लेकिन मुफ्त में सेनेटरी उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए स्कॉटलैंड की सरकार को काफी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। जानकारों के मुताबिक मुफ्त में सेनेटरी नैपकिन और टैंपोन बांटने के लिए स्कॉटलैंड सरकार को सालाना 24 मिलियन पाउंड (2,23,14,72,240 भारतीय रुपया) खर्च करना पड़ सकता है।
Scotland will be the first country to provide free tampons and pads at public places 👏👏👏https://t.co/uxId7vX4SQ
— Lauren Holter (@laurenholter) February 26, 2020
बिल के खिलाफ किसी ने नहीं किया वोट
संसद में देश की सभी महिलाओं के लिए सेनेटरी उत्पाद मुफ्त में उपलब्ध कराने के लिए विधेयक पेश किया गया जिसके पक्ष में 112 वोट पड़े जबकि इस बिल के खिलाफ किसी ने भी वोट नहीं किया। अब यह बिल दूसरे चरण के लिए आगे भेजा जाएगा जिसमें सांसद बिल में जरूरी संशोधन का प्रस्ताव कर सकते हैं। उसके बाद जल्द ही इसे कानून के रूप में पूरे स्कॉटलैंड में लागू कर दिया जाएगा। स्कॉटलैंड की महिलाएं सरकार के इस कदम से काफी खुश हैं।

संसद ने बताया ऐतिहासिक कदम
संसद में बहस के दौरान बिल की प्रस्तावक मोनिका लेनॉन ने कहा, माहवारी को स्कॉटलैंड में सामान्य बनाने की कोशिश की गई है, यह एक ऐतिहासिक कदम है। संसद ने देश की जनता को यह संदेश दिया है कि वह लैंगिक समानता को गंभीरता से लेती है। बहस के दौनान एक सांसद ने सवाल किया कि क्यों 20वीं सदी में भी टॉयलेट पेपर को जरूरत के तौर पर देखा जाता है लेकिन पिरियड के दौरान इस्तेमाल होने वाले उत्पादों को नजर अंदाज किया जाता है? प्राकृतिक शारीरिक कार्य के लिए आर्थिक रूप से दंडित होना न्यायसंगत नहीं है।

2018 में इस मामले में बना था पहला देश
बता दें के स्कॉटलैड आज से ही नहीं बल्कि साल 2018 से स्कूलों और कॉलेजों में युवतियों को मुफ्त में सेनेटरी उत्पाद बांटने वाला विश्व का पहला देश बन गया था, अब इसे पूरे देश की महिलाओं के लिए लागू किया जाने वाला है। ब्रिटेन में फिलहाल सेनेटरी उत्पाद पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है, पूर्व पीएम डेविड कैमरन की सरकार ने कहा था कि वह टैंपोन टैक्स को पूरी तरह खत्म करना चहाती है लेकिन उनके हाथ यूरोपीय संघ के कानून से बंधे हुए हैं। सरकार ने कहा था कि वर्ष 2016 में इस टैक्स को खत्म कर दिया जाएगा लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो सका।

भारत में क्या हैं हालात?
भारत की बात करें तो यहां कुछ ऐसी सरकारी संस्थाएं हैं जो स्कूल और कॉलेजों में महिलाओं को मुफ्त में सेनेटरी नैपकिन बांटती हैं। भारत में अक्सर महिलाएं इस बारे में खुलकर बात करने से झिझकती है और अपनी स्वच्छता जैसे मामले को उठाने में संकोच करती हैं। यही कारण है कि भारत में आज भी महिलाएं माहवारी के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं और बीमारी की जद में आ जाती है। इसे सिर्फ स्वच्छता के जरिए ही रोका जा सकता है। इस मामले में आपकी क्या राय है, क्या भारत में भी सेनेटरी उत्पाद मुफ्त कराया जाना चाहिए? हमें कमेंट में अपना जवाब जरूर दें।
यह भी पढ़ें: यूरीन की जगह महिला के शरीर में बन रही है शराब, टेस्ट रिपोर्ट देखकर उड़ गए डॉक्टर्स के होश












Click it and Unblock the Notifications