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SCO: अफगानिस्तान की शांति का 3-सूत्री फॉर्मूला क्या है, जो भारत ने चीन-रूस समेत 7 देशों को सुझाया

दुशाम्बे, 14 जुलाई: भारत ने अफगानिस्तान के बिगड़ते हालातों के मद्देनजर वहां पैदा हुई राजनीतिक समस्या के शांतिपूर्वक समाधान के लिए दुनिया के सामने 3-सूत्री रोड मैप पेश किया है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान से दो दशक बाद अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जिस तरह से तालिबान का हौसला बढ़ा है और वह पूरे अफगानिस्तान पर कब्जे के लिए आगे बढ़ रहा है, उसे पड़ोसी होने के नाते भारत चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। ऐसे में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन में अपने समकक्षों के सामने अपनी बात रखी है, जिसमें चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे देश भी शामिल हैं, जो अफगानिस्तान के मामले में सीधे या परोक्ष रूप से दखलंदाजी करते आए हैं।

'विश्व हिंसा और ताकत से सत्ता हथियाने के खिलाफ'

'विश्व हिंसा और ताकत से सत्ता हथियाने के खिलाफ'

अफगानिस्तान की हालात पर भारत ने बुधवार को तीन-सूत्री रोडमैप पेश किया है। जिसमें हिंसा और हमलों की समाप्ति और राजनीतिक संवाद के जरिए समाधान तलाशना शामिल है, ताकि क्षेत्र के दूसरे देशों का आंतकवाद और अतिवाद का खतरा ना उठाना पड़े। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का यह नजरिया ताजिकिस्तान की राजधानी दुशाम्बे में हुई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अफगानिस्तान पर बने संपर्क समूह की बैठक में रखा है। तालिबान की ओर से अफगानिस्तान पर हो रहे कब्जे की कोशिशों के बीच उन्होंने कहा है कि वैश्विक समुदाय 'हिंसा और ताकत से सत्ता हथियाने' के खिलाफ है और इस तरह की कार्रवाई को वैध नहीं मानेगा।

अफगानिस्तान के लिए भारत का 3-सूत्री रोड मैप

अफगानिस्तान के लिए भारत का 3-सूत्री रोड मैप

इससे पहले विदेश मंत्री ने एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था और उसमें भी अफगानिस्तान में सुरक्षा के बिगड़ते हालात का मुद्दा ही छाया रहा। इसमें विदेश मंत्री ने सदस्यों से आतंकवाद और आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने के खिलाफ कदम उठाने का आह्वान किया। अफगानिस्तान पर एससीओ संपर्क समूह की बैठक के बाद उन्होंने ट्वीट के जरिए बताया कि उन्होंने अफगानिस्तान की समस्या के समाधान के लिए तीन-सूत्री रोड मैप बताया है- 'विश्व, क्षेत्र और अफगानिस्तान की जनता सभी एक ही अंत चाहते हैं: 1- एक स्वतंत्र, तटस्थ, एकीकृत, शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध राष्ट्र.... '

'पड़ोसियों को आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद का खतरा न हो'

'पड़ोसियों को आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद का खतरा न हो'

भारतीय विदेश मंत्री ने जो दूसरा प्वाइंट रखा है वो है- '2- नागरिकों और राष्ट्र के प्रतिनिधियों के खिलाफ हिंसा और आतंकवादी हमलों को रोकना, राजनीतिक बातचीत के माध्यम से टकराव को सुलझाना और सभी जातीय समूहों के हितों का सम्मान करना; और 3- सुनिश्चित हो कि पड़ोसियों को आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद का खतरा नहीं हो।' जयशंकर ने सदस्य देशों से कहा कि चुनौती 'इन विश्वासों पर गंभीरता और ईमानदारी से कार्य करने' की होगी, क्योंकि 'एक बहुत ही अलग एजेंडे के साथ काम करने वाली ताकतें भी लगी हैं।' वो बोले कि 'दुनिया हिंसा या ताकत के बल पर सत्ता हथियाने के खिलाफ है। ऐसी कार्रवाई को यह वैध नहीं मानेगा।'

अतीत अफगानिस्तान का भविष्य नहीं हो सकता- भारत

अतीत अफगानिस्तान का भविष्य नहीं हो सकता- भारत

विदेश मंत्री ने भारत का यह नजरिया दोहराया है कि पिछले दो दशकों में काबुल ने जो पाया है, उसे यूं ही नहीं गंवाया जा सकता। उन्होंने कहा, 'अफगानिस्तान का भविष्य उसका अतीत नहीं हो सकता। एक पूरी नई पीढ़ी की अलग-अलग उम्मीदें होती हैं। हमें उन्हें निराश नहीं करना चाहिए।' बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन 8 सदस्यों वाला एक आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसमें, भारत, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं। इनके अलावा चार देशों- अफगानिस्तान, ईरान, मंगोलिया और बेलारुस को ऑब्जर्वर का दर्जा प्राप्त है।

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