यूएन के वैज्ञानिकों की चेतावनी, बढ़ रहा वैश्विक तापमान, तय लक्ष्य से दोगुना हुआ पारा

नई दिल्ली, 05 अप्रैल। पर्यावरण को बचाने की तमाम कोशिशों के बाद भी लगातार धरती का तापमान बढ़ रहा है। यूएन ने लक्ष्य रखा था कि ग्लोबल हीटिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने की कोशिश की जाएगी, लेकिन फिलहाल यह ल्य हासिल होता नहीं दिख रहा है। युनाइटेड नेसंश द्वारा समर्थित क्लाइमेट पैनल के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दुनिया में तापमान तकरीबन तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है जोकि पेरिस अग्रिमेंट के लक्ष्य से दो गुना है। ऐसे में धरती का लगातार बढ़ता पारा आने वाले समय में जीवन यापन को मुश्किल कर सकता है।

कार्बन का उत्सर्जन कम होना जरूरी

कार्बन का उत्सर्जन कम होना जरूरी

पैनल ने अपनी हालिया रिलीज रिपोर्ट में कहा है कि ग्रीनहाउस गैसों के प्रदूषण को कम करने की जरूरत है लिहाजा 2025 तक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समय बहुत कम बचा है। लेकिन बावजूद इसके हमे अपनी कोशिशों को बरकरार रखने की जरूरत है। ग्लासगो में क्लाइन समिट के दौरान तमाम देशों ने शपथ ली थी कि कार्बन उत्सर्जन को कम करेंगे, अन्यथा 2030 धरती का पारा 1.5 डिग्री सेल्सिस से कहीं अधिक बढ़ सकता है।

ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम करना चुनौती

ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम करना चुनौती

गौर करने वाली बात है कि इस अंतरराष्ट्रीय पैनल को कई देशों की सरकार, शहरों, उद्योगपतियों, निवेशकों द्वारा ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए ली गई तमाम शपथ के बाद आई है, लेकिन बावजूद इसके जिस तरह से रिपोर्ट में चिंता जाहिर की गई है उससे साफ है कि ग्रीन हाउस गैसों को उत्सर्जन को कम करने में अभी तक हम विफल रहे हैं, लिहाजा पर्यावरण को बचाने की मुहिम फिलहाल कारगर साबित होती नहीं दिख रही है। यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंटोरियो गुटारेस ने कहा कि रिपोर्ट में किए गया दावा काल्पनिक नहीं है और ना ही इसे बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है।

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    रिपोर्ट में कई उपाय सुझाए गए

    रिपोर्ट में कई उपाय सुझाए गए

    अपनी रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने तमाम सुझाव भी दिए हैं कि कैसे पर्यावरण को बेहतर करने के लिए ग्लोबल तापमान को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि तकरीबन हर क्षेत्र में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं जिससे कि इस लक्ष्य की प्राप्ति की जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक जीडीपी में कुछ कमी जरूर आएगी लेकिन पर्यावरण में होने वाले सुधार उससे कहीं अधिक लाभकारी हैं।

    सोलर और विंड एनर्जी ने प्रदूषण को किया कम

    सोलर और विंड एनर्जी ने प्रदूषण को किया कम

    कमेटी की ओर से कहा गया है कि तकरीबन 18 देशों ने साबित किया है कि वह ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकते हैं, कुछ देशों ने 4 फीसदी प्रति वर्ष कार्बन के उत्सर्जन में कमी की है। 2010-19 के बीच सोलर और विंड एनर्जी की कीमत 85-55 फीसदी गिरी है, जिसकी वजह से पेट्रोल और फॉसिल ईंधन की तुलना में सौर ऊर्जा और विंड एनर्जी सस्ती हुई है। दुनियाभर में 2019 में हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा का विस्तार हुआ है, तकनीक के चलते इस तरह के ऊर्जा विकल्पों को लोग अपना रहे हैं। इन संसाधनों की मदद से 37 फीसदी ऊर्जा की सप्लाई 2019 में की गई है।

    आधुनिक तकनीक से कम हो सकता है प्रदूषण

    आधुनिक तकनीक से कम हो सकता है प्रदूषण

    ट्रांसपोर्ट से तकरीबन 23 फीसदी कार्बन डाई आक्साइड का उत्सर्जन 2019 में हुआ जिसमे सड़क पर चलने वाले वाहन से 16 फीसदी उत्सर्जन हुआ है। लेकिन बैटरी चालित गाड़ियों के इस्तेमाल से कार्बन के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है। अहम बात यह है कि पिछले एक दशक में बैटरी के दाम तकरीबन 85फीसदी कम हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट के जरिए ऊर्जा के इस्तेमाल को बेहतर तरह से किया जा सकता है। 2019 में ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन सर्वाधिक 59 बिलियन मिट्रिक टन तक पहुंच गया था।

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