वैज्ञानिकों ने पृथ्वी जैसे दुर्लभ ग्रह का लगाया पता, लेकिन जानिए सितारों की टक्कर में हो चुका है क्या हाल?
खगोलविदों ने पृथ्वी जैसे दुर्लभ ग्रह का पता लगाया है, लेकिन सितारों की टक्कर में उस ग्रह का जो हाल हुआ है, उसे देखना बहद दिलचस्प है।
नई दिल्ली, अक्टूबर 22: अंतरिक्ष और ग्रहों को लेकर लगातार अलग अलग अंतरिक्ष एजेंसियां रिसर्च कर रही हैं और दिलचस्प जानकारियां हमारे सामने आती रहती हैं। खगोलविदों ने अत्याधुनिक तकनीकों के आधार पर पृथ्वी जैसे ही दुर्लभ ग्रह का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है। ऐस्टराइड का पता लगाने वाले खगोलविदों ने पृथ्वी जैसे ही ग्रह को खोजने में पहली बार सफलता हासिल की है और इसको लेकर वैज्ञानिकों में काफी उत्साह की लहर है।

खगोलविदों को मिली कामयाबी
रिपोर्ट के मुताबिक, खगोलविद गहरे अंतरिक्ष से पृथ्वी की तरफ आने वाले क्षुद्रगहों को जब ट्रैक कर रहे थे, उस वक्त पृथ्वी जैसा ही एक ग्रह पहली बार वैज्ञानिकों को दिखा। इस ग्रह को देखने के बाद पहली बार वैज्ञानिक पूरी तरह से चौंक गये। वैज्ञानिकों ने देखा कि पृथ्वी जैसे इस ग्रह का वातावरण पूरी तरह से जल चुका था। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि किसी विशालकाय तारे से टकराने के बाद इस ग्रह का वातावरण पूरी तरह से खत्म हो गया होगा।

2 लाख साल पहले टक्कर
खगोलविदों की एक टीम ने पृथ्वी जैसे जिस ग्रह का पता लगाया है, उसके बारे में अनुमान लगाया गया है कि, लगभग 2 लाख साल पहले टक्कर के कारण इस ग्रह ने अपने वायुमंडल का हिस्सा खो दिया होगा। एमआईटी, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आयरलैंड गॉलवे, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने पृथ्वी से सिर्फ 95 प्रकाश-वर्ष दूर, पास के स्टार सिस्टम में विशाल प्रभाव के प्रमाण खोजे हैं। डब एचडी 172555, नाम का ये ग्रह लगभग 23 मिलियन वर्ष पुराना है, और वैज्ञानिकों ने इससे निकलने वाली धूल को परखने के बाद संदेह जताया है कि, इस ग्रह का हाल फिलहाल ही टक्कर हुआ होगा।
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धूल भरा मलबा मिला
नेचर जर्नल में प्रकाशित स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि, इन विशाल प्रभावों के माध्यम से युवा पृथ्वी जैसे ग्रह धीरे धीरे बुढ़ापे की तरफ बढ़ते रहते हैं और उनका द्रव्यमान लगातार बढ़ता रहता है और फिर ये अपनी कक्षा से निकल जाते हैं और फिर इनका टक्कर हो जाता है। एक प्रमुख भविष्यवाणी यह है कि, ये प्रभाव मलबे का उत्पादन करते हैं। खगोलविदों ने "लगभग छह और नौ खगोलीय इकाइयों के बीच HD172555 के आसपास धूल भरे मलबे के साथ सह-परिक्रमा करते हुए कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रिंग का पता लगाया है। जो हमारे सौर मंडल के बाहरी स्थलीय ग्रह क्षेत्र के मुताबिक ही एक क्षेत्र है।"

एक दिलचस्प सितारा
HD172555 ग्रह अपनी धूल और असामान्य संरचना के कारण खगोलविदों के बीच एक दिलचस्प स्टडी का केन्द्र रहा है और वैज्ञानिकों का मानना है कि, इस ग्रह पर असामान्य खनिज हो सकते हैं। एमआईटी के पृथ्वी, वायुमंडलीय और ग्रह विज्ञान विभाग में स्नातक छात्र तजाना श्नाइडरमैन ने इस स्टडी का नेतृत्व किया है और इसके लिए चिली में अटाकामा लार्ज मिलीमीटर एरे (एएलएमए) से डेटा के माध्यम से आसपास के सितारों के आसपास कार्बन मोनोऑक्साइड के संकेतों की तलाश की गई थी।

खगोलविदों के लिए बड़ी सफलता
ALMA वेधशाला में 66 रेडियो दूरबीनों का एक नेटवर्क है, जिसके जरिए तस्वीरों के रिज़ॉल्यूशन को बढ़ाया या घटाया जा सकता है और इसी रेडियो दूरबीन के जरिए इस ग्रह को देखा गया है। वैज्ञानिक श्नाइडरमैन ने कहा कि, ''जब लोग मलबे के डिस्क में गैस का अध्ययन करना चाहते हैं, तो कार्बन मोनोऑक्साइड आमतौर पर सबसे चमकीला होता है, और इस तरह इसे खोजना सबसे आसान होता है। इसलिए, हमने एचडी 172555 के लिए कार्बन मोनोऑक्साइड डेटा को फिर से देखा क्योंकि यह एक दिलचस्प प्रणाली थी। उन्होंने कहा कि, ''हमारी टीम डेटा के गहन विश्लेषण के बाद कार्बन मोनोऑक्साइड का पता लगाने में सक्षम हो गई और हमने पाया कि शुक्र के वायुमंडल में पाए जाने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड का 20 प्रतिशत गैस वहां मौजूद है।












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