बड़ी खोज: पहली बार आकाशगंगा में 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर मिला इंसानी दांत का एक तत्व
लंदन, 06 नवंबर। मशहूर खगोलशास्त्री कार्ल सागन ने एक बार कहा था कि हम इंसान ब्राह्मांड में पाए जाने वाले तत्वों से बने हैं। कई धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों में भी इस बात का जिक्र है, अब इतिहास में लिखी गई ये बातें सच साबित होती नजर आ रही हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब वैज्ञानिकों ने हमारे शरीर में पाए जाने वाले एक तत्व की खोज आकाशगंगा में की है। जहां ये तत्व मिला है वो पृथ्वी से 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

ब्रह्मांड में छिपे हैं कई रहस्य
अंतरिक्ष के बारे में हम इंसानों को जितना पता है, उससे कहीं अधिक जानना बाकी है। ब्रह्मांड में कई ऐसे रहस्य छिपे हुए हैं, जिसे जानने के लिए खगोलविद लगातार रिसर्च कर रहे हैं। कई बार तो ऐसी चीजें भी सामने आई हैं जिसने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। ऐसा ही कुछ आकाशगंगा में खोजे गए नए तत्व को लेकर हुआ। दरअसल, धरती से 12 अरब प्रकाश वर्ष से अधिक दूर एक ऐसा तत्व मिला है जो इंसानों के दांतों और हड्डियों में पाया जाता है।

वैज्ञानिकों ने की इस तत्व की खोज
खगोलविदों के मुताबिक हमारे दांतों और हड्डियों में फ्लोरीन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जिसकी खोज आकाशगंगा में की गई है। यूनाइटेड किंगडम में हर्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय में खगोल भौतिकी शोधार्थी मैक्सिमिलियन फ्रैंको ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, हम सभी फ्लोरीन से परिचित हैं क्योंकि इसे रोजाना टूथपेस्ट में फ्लोराइड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हम यह भी नहीं पता कि ब्रह्मांड में किस प्रकार के सितारों ने अधिकांश फ्लोरीन का उत्पादन किया है।

इस टेलीस्कोप से की गई खोज
उन्होंने आगे कहा, हमारे सौर मंडल, पृथ्वी और यहां तक कि हमारे शरीर में पाए जाने वाले तत्वों की उत्पत्ति तारों के कोर के अंदर हुई लेकिन इन सितारों के अंदर प्लोरीन कैसे बना, यह अभी तक रहस्य है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक आकाशगंगा में फ्लोरीन की खोज करने के लिए खगोलविदों चिली में कई टेलीस्कोप की मदद ली। ये आधुनिक टेलीस्कोप अटाकामा लार्ज मिलिमीटर और सबमिलीमीटर की कैटेगरी में आता है।

12 अरब प्रकाश वर्ष की यात्रा
वैज्ञानिकों का कहना है कि फ्लोरीन की खोज NGP-190387 आकाशगंगा के गैस बादलों में की गई, ये वहां हाइड्रोजन फ्लोराइड के रूप में मौजूद था। हम तक पहुंचने के लिए इस आकाशगंगा के प्रकाश ने 12 अरब वर्षों से अधिक की यात्रा की। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तब शुरू हुआ जब ब्रह्मांड केवल 1.4 अरब वर्ष पुराना था। हर्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय की टीम कि वुल्फ-रेएट सितारे फ्लोरीन के सबसे संभावित उत्पादन स्थल हैं। ये बड़े पैमाने पर तारे हैं जो केवल कुछ मिलियन वर्ष जीते हैं।

समझ से परे वुल्फ-रेयेट सितारे
वुल्फ-रेएट सितारों को पहले ब्रह्मांडीय फ्लोरीन के संभावित स्रोतों के रूप में सुझाया गया था, लेकिन खगोलविदों को अब तक यह नहीं पता था कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में इस तत्व के उत्पादन में वे कितने महत्वपूर्ण थे। फ्रेंको जोक्स ने कहा, हमने देखा है कि ज्ञात सबसे बड़े सितारों में से एक वुल्फ-रेयेट सितारे जब अपनी लाइफ के अंत तक पहुंचते हैं तो वह खतरनाक ढंग से विस्फोट हो सकते हैं। इन सितारों के अलावा फ्लोरीन के उत्पादन और इसके बाहर निकलने के अन्य परिदृश्यों को अतीत के बारे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
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