मिल ही गई पंख से चलने वाली दुर्लभ शार्क मछली, जमीन पर मजे से चलते देख वैज्ञानिक हैरान, देखिए वीडियो

वैज्ञानिकों ने एपॉलेट शार्क को जमीन पर चलते हुए वीडियो रिकॉर्ड किए हैं, जिसे हेमिस्सिलियम ओसेलैटम के रूप में भी जाना जाता है।

वॉशिंगटन, जुलाई 31: जॉम्बी स्पाइडर रोबोट बनाने का पता लगाने के कुछ ही दिनों बाद वैज्ञानिकों ने बेहद दुर्लभ प्रजाति की माने जाने वाली पांव से चलने वाली शार्क मछली को खोज ही लिया है। इस शार्क मछली को वैज्ञानिकों ने समुद्र के तट पर और समुद्र के अंदर जमीन पर अपने पांवों के सहारे चलते हुए रिकॉर्ड किया है। वैज्ञानिकों ने कुछ दिन पहले ही जॉम्बी स्पाइडर रोबोट बनाने का पता लगाने के कुछ ही दिनों बाद शार्क को जमीन पर चलते हुए रिकॉर्ड किया है।

जमीन पर चलने वाला शार्क

जमीन पर चलने वाला शार्क

वैज्ञानिकों ने एपॉलेट शार्क को जमीन पर चलते हुए वीडियो रिकॉर्ड किए हैं, जिसे हेमिस्सिलियम ओसेलैटम के रूप में भी जाना जाता है और ये शार्क मछली समुद्र के अंदर जमीन पर किसी शेर की तरह चलते हुए दिखाई दे रही थी। वैज्ञानिक विशेषज्ञ फॉरेस्ट गैलांटे के अनुसार, शार्क की वह विशिष्ट नस्ल जमीन पर चल सकती है, लेकिन ऐसा बहुत कम ही देखा जाता है। जमीन पर चलने वाली ये दुर्लभ शार्क मछली मई महीने मे पापाऊ न्यू गिनी में पाई गई है। वहीं, दुर्लभ जीवों के संरक्षण की दिशा में काम करने वाले जीव विज्ञानी गैलांटे ने कहा कि,"इतिहास में यह पहली बार है जब एपॉलेट्स की पापुआन प्रजातियों में से एक को चलते हुए रिकॉर्ड किया गया है'। उन्होंने इसे अविश्वसनीय बताया है।

पापुआ न्यू गिनी में मिला शार्क

पापुआ न्यू गिनी में मिला शार्क

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 मई 2022 को पापुआ न्यू गिनी के तट पर रात के समय एक दूरस्थ आउटक्रॉपिंग पर वैज्ञानिकों को एक आश्चर्यजनक जीव मिला और फिर ध्यान से देखने पर सभी वैज्ञानिक चौंक गये, क्योंकि ये पैरों से चलने वाला शार्क था। ये अपने पंखों का ही इस्तेमाल पैरों की तरह चलने के लिए करते हैं। चलते समय इस शार्क के शरीर पर काली धब्बेदार रंग और ऊभर आते हैं, जिससे ये पानी की लहरों पर झिलमिलाती हुई दिखाई देता है। ये शार्क अपने शरीर को किनारे की दिशा से खींचता है, लिहाजा ये समुद्र के अंदर चलते हुए शेर की तरह दिखाई देता है।

"आइलैंड ऑफ द वॉकिंग शार्क''

शार्क की इस प्रजाति की चलने की क्षमता को जीवविज्ञानियों ने काफी दुर्लभ बताया है और संरक्षणवादी जीवविज्ञानी फॉरेस्ट गैलांटे ने हाल ही में डिस्कवरी चैनल के शार्क वीक के लिए एक नए शो में इस असामान्य प्रजाति के दुर्लभ शार्क को लेकर फुटेज को साझा किया है, जिसे "आइलैंड ऑफ द वॉकिंग शार्क" कहा गया है। वैज्ञानिकों को मानना है कि, न्यू गिनी के दक्षिणी तट और ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट में पाई जाने वाली शार्क की प्रजाति, एपॉलेट शार्क ने चलने की क्षमता विकसित की है, क्योंकि इससे उन्हें ऐसे वातावरण में भोजन खोजने में मदद मिलती है और अगर वो चल नहीं पाते, तो उनका वहां पर बच पाना असंभव था। क्योंकि इस क्षेत्र में पाए जाने वाले दूसरे शार्क अब यहां से गायब हो चुके हैं।

प्राकृतिक तरीके से क्षमता हुई विकसित

प्राकृतिक तरीके से क्षमता हुई विकसित

फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल में शार्क रिसर्च के फ्लोरिडा प्रोग्राम के निदेशक गेविन नायलर ने कहा कि, 'उनके अंदर चलने की क्षमता तब विकसित हुई है, जब ऐसे वातावरण में उनका रहना असंभव हो जाता, जहां वो अपने लिए भोजन नहीं खोज पाते। लेकिन, चलने की क्षमता विकसित करने के बाद अब वो सुरक्षित हैं और अपने लिए काफी आसानी से भोजन की तलाश कर सकते हैं।'

कितनी होती है लंबाई

कितनी होती है लंबाई

एपॉलेट शार्क मछली की लंबाई में लगभग 3.3 फीट यानि 1 मीटर तक बढ़ती हैं और ये उथले प्रवाल भित्तियों में तैरकर केकड़ों और अन्य अकशेरुकी जीवों का शिकार करती हैं, जो उनका पसंदीदा भोजन है। जब ज्वार निकल जाता है, तो वे ज्वार के तलों में लटककर और इन प्राणियों को चबाते हुए पूरी तरह से खुश होते हैं। गेविन नायलर ने कहा कि, "लेकिन एक बार जब वो भोजन कर लेते हैं, तो ज्वार के साथ बहते हुए पत्थरों पर आ जाते हैं, जहां वो फंस जाते हैं और उनके लिए वापस पानी में जाना काफी मुश्किल हो जाता है'। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि, "एपॉलेट्स ने अभी तक जो करना सीखा है, वह है चट्टान में फंसना, निकलने की कोशिश करना, चढ़ना और अगले ज्वार पूल में खुद को गिराना।" नायलर ने कहा कि एपॉलेट शार्क खुद को 100 फीट (30 मीटर) या अधिक सूखी भूमि में खुद को खींच सकती हैं और यह प्रजाति ऑक्सीजन की कमी में भी जिंदा रह सकता है।

एक घंटे तक जमीन पर रहने की क्षमता

वैज्ञानिकों ने बताया कि, इस दुर्लभ सार्क के पास जमीन पर एक घंटे तक एक सांस पर रहने की क्षमता आ गई है। वहीं, लाइव साइंस की एक पूर्व रिपोर्ट के मुताबिक, शार्क में यह क्षमता ज्वार ताल के कम ऑक्सीजन वाले पानी में एपॉलेट्स को पनपने में भी मदद करती है। वैज्ञानिकों ने मरीन एंड फ्रेशवाटर रिसर्च में बताया है कि, इस दुर्लभ प्रजाति के एपॉलेट शार्क ने संभवतः पिछले 90 लाख सालों में चलने की क्षमता विकसित की है। लंदन में प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के अनुसार, इसे परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, सबसे कम उम्र के शार्क समूहों में से एक, हैमरहेड शार्क, लगभग 45 मिलियन वर्ष पहले विकसित हुई थी। और एपॉलेट शार्क संभावित रूप से नई प्रजातियों को उल्लेखनीय रूप से तेज दर से विकसित होना बना रहे हैं।

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