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कौन हैं सऊदी अरब की ये महिला, जिनके आईफोन ने किया पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर का भांडाफोड़

सऊदी अरब की रहने वाली महिला अधिकार कार्यकर्ता लौजैन अल-हथलौल, जो जेल भी जा चुकी हैं, उनके मोबाइल फोन की जासूसी पेगासस सॉफ्टवेयर से की जा रही थी।

रियाद, फरवरी 18: भारत समेत पूरी दुनिया में जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर को बनाने वाले एनएसओ ग्रुप पर अभी भी हंगामा मचा हुआ है और एनएसओ ग्रुप के खिलाफ अब अमेरिका में भी मुकदमा चलने की संभावना है। एनएसओ ग्रुप ने ही पेगासस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया था, जिसके जरिए काफी आसानी से लोगों को निशाया बनाया जाने लगा, लेकिन क्या आप जानते हैं, आखिर एनएसओ ग्रुप की पोल कैसे खुली और आखिर सऊदी अरब की ये महिला कौन है, जिसकी जासूसी करवाई जा रही थी?

जासूसी करने वाला है सॉफ्टवेयर

जासूसी करने वाला है सॉफ्टवेयर

एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाए गये पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर दुनिया के सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता, जर्नलिस्ट्स समेत सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया गया। इस सॉफ्टवेयर को लेकर भारत में भी जमकर बवाल होते रहते हैं और पिछले दिनों ये भी आरोप लगे थे, कि भारत सरकार ने इजरायल से एक समझौते के तहत इस सॉफ्टवेयर को खरीदा था। लेकिन, क्या आप जानते हैं, इस सॉफ्टवेयर को लेकर खुलासा कैसे हुआ? आखिर सऊदी अरब की 'लौजैन अल-हथलोल' कौन हैं और आखिर सऊदी सरकार 'लौजैन अल-हथलोल' की जासूसी क्यों करवा रही थी और फिर एक फोटो फाइल के जरिए इंजीनियर इस जासूसी सॉफ्टवेयर तक कैसे पहुंचे? इसके पीछे एक अनोखी कहानी छिपी है।

मोबाइल किया गया था हैक

मोबाइल किया गया था हैक

सऊदी अरब की रहने वाली महिला अधिकार कार्यकर्ता लौजैन अल-हथलौल, जो जेल भी जा चुकी हैं, उनके मोबाइल फोन की जासूसी पेगासस सॉफ्टवेयर से की जा रही थी और लौजैन अल-हथलौल को नहीं पता था, कि वो जो भी कर रही है, उसकी खबर 'कहीं और' हो रही है। लेकिन, पेगासस सॉफ्टवेयर की एक गलती की वजह से ये जासूस सॉफ्टवेयर पकड़ में आ गया। सऊदी अरब की महिला कार्यकर्ता लौजैन अल-हथलौल और प्राइवेसी रिसर्चर को इस बात के पुख्ता सबूत मिले, कि इजरायली सॉफ्टवेयर के जरिए उनका मोबाइल फोन हैक किया गया था।

एक गलती से हुआ खुलासा

एक गलती से हुआ खुलासा

दरअसल, इस जासूसी सॉफ्टवेयर की पोल, सॉफ्टवेयर की ही एक गलती की वजह से खुली और महिला कार्यकर्ता लोजैन अल-हथलौल के फोन में स्पाईवेयर के द्वारा डाली गई एक तस्वीर गलती से फोन में ही रह गया। लेकिन जब पिछले साल लौजैन अल-हथलौल के फोन की जांच की गई, तो फिर ये सॉफ्टवेयर पकड़ में आ गया। आपको बता दें कि, पिछले साल फरवरी महीने में महिला कार्यकर्ता लौजैन अल-हथलौल को जेल से रिहा किया गया था और उन्हें अपने फोन के हैक होने का शक हुआ था। किसी आईफोन का हैक होना एक बड़ी बात माना जाता है, क्योंकि कंपनी की तरफ से इसके दुनिया के सबसे सुरक्षित सॉफ्टवेयर होने का दावा किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला कार्यकर्ता लौजैन अल-हथलौल ने कनाडा की एक संस्था सिटिजन लैब को अपना फोन देकर जांच करने के लिए कहा था।

कौन हैं एक्टिविस्ट लौजैन अल-हथलौल?

कौन हैं एक्टिविस्ट लौजैन अल-हथलौल?

आपको बता दें कि, लौजैन अल-हथलौल, सऊदी अरब की प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और उन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं को अधिकार दिलाने को लेकर सऊदी शाही परिवार से पंगा लेने से भी पीछे नहीं हटीं। उन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार देने की मांग को लेकर काफी बड़ा कैंपेन चलाया, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन, बाद में सऊदी सरकार ने देश में महिलाओं को गाड़ी चलाने की आजादी दे दी थी और उन्हें पछले साल फरवरी 2021 में से जेल से रिहा कर दिया गया था। जेल से रिहा होने के बाद गुगल की तरफ से उन्हें एक चेतावनी भरा ई-मेल भेजा गया था और उनके फोन के हैक होने की संभावना जताई गई थी और फिर उन्होंने कनाडा की संस्था को अपने फोन की जांच करने के लिए कहा था।

कनाडा की लैब में जासूसी का खुलासा

कनाडा की लैब में जासूसी का खुलासा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा की सिटीजन लैब ने करीब 6 महीने तक लौजैन अल-हथलौल के मोबाइल फोन का चेक किया और फिर उस सर्विलांस सॉफ्टवेयर का पता चला, जिसके जरिए उनके फोन को हैक किया गया था। ये सॉफ्टवेयर फोन में आए तमाम मैसेज की चोरी कर लेता है और उसे अपने सर्वर तक पहुंचा देता है। कनाडाई संस्था ने कहा कि, एनएसओ ग्रुप ने इस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है और इस खुलासे के बाद पहली बार दुनिया को जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के बारे में पता चला था। वहीं, यूएस अधिकारियों ने दावा किया कि, इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अमेरिकी डिप्लोमेट्स पर नजर रखने के लिए भी किया गया।

2021 में एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा

2021 में एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा

पिछले साल जब जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के बारे में पता चला, तो एपल कंपनी ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। वहीं, काफी ज्यादा बवाल बढ़ने के बाद एनएसओ ग्रुप की तरफ से सफाई देते हुए कहा गया था कि, वो सिर्फ सरकारी एजेंसियों और सरकारों को ही अपना सॉफ्टवेयर बेचती है। वहीं, कंपनी की तरफ से जासूसी के आरोपों से भी इनकार किया गया है, लेकिन काफी बवाल के बाद इजरायली सरकार ने भी इस सॉफ्टवेयर को लेकर अपना पल्ला झाड़ लिया था।

कैसे खतरनाक होता है ये सॉफ्टवेयर

कैसे खतरनाक होता है ये सॉफ्टवेयर

आपको बता दें कि, पेगासस को एक काफी तेज जासूसी सॉफ्टवेयर माना जाता है और फोन में इंस्टॉल होने के लिए इसे आपसे किसी भी तरह की परमिशन की जरूरत नहीं पड़ती है। ये काफी शातिर तरीके से फोन में इंस्टॉल हो जाता है और फोन से जुड़ी तमाम जानकारियां अपने मालिक तक भेजा जाता है और यूजर्स को फोन हैक होने की जानकारी भी नहीं मिल पाती है। फोन पर क्या मैसेज आया है, किसका मैसेज आया है, क्या बातें हो रही हैं, कहां बातें हो रही हैं, हर एक जानकारी पेगासस सॉफ्टवेयर अपने मालिक तक पहुंचाता रहता है। अगर फोन जेब में है और आप किसी दूसरे शख्स से बात कर रहे हैं, तब भी ये सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड कर उसे अपने मालिक तक भेज देता है।

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