इस्लाम के दुश्मन नहीं हैं यहूदी, रामायण जानना जरूरी.. चुपके से बच्चों की किताबें क्यों बदल रहा सऊदी अरब?
Saudi Arab changing textbooks: इस्लामिक देश सऊदी अरब बेहद खामोशी के साथ स्कूलों के टेक्स्टबुक को बदल रहा है और टेक्स्टबुक को इतनी सावधानी और खामोशी के साथ बदला जा रहा है, जिसका पता बहुत कम लोगों को चल पाया है। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन ने दावा किया है, कि सऊदी अरब ने अपने स्कूलों में टेक्स्टबुक में ऐसे बदलाव कर रहा है, जिसका मकसद बच्चों को कट्टर विचाधारा से बाहर निकालकर उदारवादी विचारधारा में लाना है।
सऊदी अरब का टेक्स्टबुक परिवर्तन देश में सहिष्णुता को बढ़ाने के मकसद से किया जा रहा है, लेकिन इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है, कि टेक्स्टबुक बदलाव को लेकर कोई विरोध ना शुरू हो जाए।

हाल ही में पता चला है, कि सऊदी अरब के टेक्स्टबुक बदलाव में इजरायल को लेकर कई तरह की बातें हटा दी गईं हैं और नई बातों को जोड़ा गया है, जिसके बाद माना जा रहा है, कि सऊदी अरब धीरे धीरे इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और वो चाहता है, कि देश में आने वाले जेनरेशन के मन में इजरायल को लेकर विकृत भाव ना रहे।
किस तरह का हो रहा टेक्स्टबुक बदलाव
इज़राइल और लंदन स्थित इंस्टीट्यूट फ़ॉर मॉनिटरिंग पीस एंड कल्चरल टॉलरेंस इन स्कूल एजुकेशन (IMPACT-se) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि सऊदी अरब में उन किताबों को बदले जा रहे हैं, जिसमें इजरायल और यहूदियों को लेकर नफरत भरी भाषाओं का इस्तेमाल किए गये हैं।
सऊदी अरब की लगभग हर क्लासरूम की किताबों में यहूदी और ईसाई धर्म को लेकर कट्टरपंथी बातें लिखी हुई हैं, जिसे अब नये पाठ्यपुस्तक से हटा दिया गया है।
हाल ही में सऊदी अरब के एक स्कूली किताब से कुछ लाइनें हटाई गईं हैं, जिसमें एक लाइन है, कि "यहूदी और ईसाई, इस्लाम के दुश्मन हैं।" वहीं, इजरायल और फिलीस्तीन को लेकर चल रहे विवाद को लेकर भी इजरायल के खिलाफ अभी तक पढ़ाई जा रहीं कई चैप्टर्स को हटा दिया गया है, जिनमें से 'इजरायली दुश्मन', 'इजरायल के कब्जे वाली सेना', 'दुश्मन यहूदी', 'इजरायली कब्जे वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र' को हटा दिया गया है। इसके अलावा भी फिलीस्तीन पर कई इजरायली हमलों के बारे में लिखी बातों को किताब से हटा लिया गया है।
इससे पहले साल 2022-23 के पाठ्यक्रम में सऊदी अरब में देशभक्ति पर आधारित एक कविता, जिसका शीर्षक था, 'फिलीस्तीनी का यहूदी बस्ती का विरोध' उसे हटा लिया गया थआ
2022-23 के पाठ्यक्रम में, देशभक्ति कविता पर एक पाठ ने "फिलिस्तीन की यहूदी बस्ती का विरोध करने" का एक उदाहरण हटा दिया। एक हाई स्कूल सामाजिक अध्ययन पाठ्यपुस्तक में अब पहले इंतिफादा के सकारात्मक परिणामों का वर्णन करने वाला खंड नहीं है, 1980 के दशक के अंत में इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी विद्रोह। और एक पाठ्यपुस्तक ने "फ़िलिस्तीनी मुद्दों को संबोधित करते हुए एक पूरे अध्याय को हटा दिया।"
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब शिक्षा मंत्रालय स्कूली किताबों में परिवर्तन करने के लिए IMPACT-se थिंक टैंक की मदद लेता है और उसके सुझाव के आधार पर बदलाव किए जा रहे हैं।
आतंकी संगठनों की आलोचना
IMPACT-se के मुताबिक, सऊदी अरब के नये पाठ्यक्रम में कई आतंकी संगठनों की गंभीर आलोचना की गई है, जिनमें हिजबुल्ला, आईएसआईएस, अल कायदा, हौथी मिलिशिया और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे संगठनों की संख्त आलोचना की गई है।
दरअसल, अमेरिका में 9/11 के हमले के बाद पश्चिमी देशों में सऊदी अरब के स्कूली पाठ्यक्रम की गहन जांच की गई थी। जिसके बाद सऊदी के स्कूली किताबों में पश्चिमी देशों और कई धर्मों को लेकर नफरती बातों का पता चला था। अमेरिका में हुए हमले में 19 अपहरणकर्ताओं में 15 सऊदी अरब के रहने वाले थे। खुद ओसामा बिन लादेन भी सऊदी अरब का रहने वाला था और उसके बाद से ही सऊदी सरकार ने धीरे धीरे किताबों में बदलाव करना शुरू कर दिया। लेकिन अब ये प्रक्रिया खामोशी के साथ काफी तेजी से की जा रही है।
इससे पहले साल 2021 में सऊदी अरब सरकार ने नया पाठ्यक्रम जारी किया था, जिसमें रामायण और महाभारत के साथ हिंदू धर्म और हिन्दू सभ्यता को स्कूली किताबों में शामिल किया गया था।
सऊदी अरब सरकार के 2021 के पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति के साथ साथ योग और आयुर्वेद को भी अलग अलग क्लास की किताबों में शामिल किया था। सऊदी अरब सरकार ने उस वक्त कहा था, कि उनका मकसद देश की आने वाली पीढ़ी अलग अलग संस्कृतियों से पहचान करानी है और सरकार की कोशिश है, सऊदी का नया जेनरेशन रामायण-महाभारत, भारतीय संस्कृति, योग और आयुर्वेद के बारे में पढ़ें और उन्हें समझें।
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