सऊदी अरब ने मस्जिदों के अंदर इफ्तार पर लगाया बैन, चंदा जुटाने पर भी क्राउन प्रिंस सलमान ने लगाई रोक
सऊदी अरब में रमजान के दौरान मस्जिदों के अंदर इफ्तार परोसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध इस्लामिक मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू की गई रमज़ान से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है। ये मंत्रालय ही सऊदी अरब में मस्जिदों का प्रभारी होता है। इस फैसले के पीछे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सहमति मानी जा रही है।
अब नए आदेश के अनुसार, रमजान के दौरान सूर्यास्त के बाद पूरे देश की मस्जिदों के अंदर इफ्तार पार्टी नहीं हो सकेगी। आदेश में कहा गया है कि मस्जिदों के इमामों को आगामी पवित्र महीने यानी कि रमजान के दौरान उपासकों को इफ्तार कराने के लिए दान इकट्ठा करने से भी रोक दी गई है।

मंत्रालय ने बताया कि ये आदेश मस्जिदों को साफ रखने की नीयत से लिया गया है। नए निर्देश के मुताबिक इफ्तार भोज कंपाउंड में एक पहले से तय किए गए स्थान पर आयोजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नमाज के दौरान इमाम की फिल्म बनाने के लिए मस्जिदों के अंदर कैमरों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि किसी का ध्यान न भटके।
विभिन्न मीडिया के माध्यम से प्रार्थना प्रेषित करने और उन्हें प्रसारित करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंत्रालय ने मुअज्जिनों से सऊदी कैलेंडर के आधार पर प्रार्थना के समय का बारीकी से पालन करने का आग्रह किया है।
सऊदी अरब अपने देश की छवि एक कट्टरपंथी मुल्क से बदलना चाहता है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 25 अप्रैल 2016 को अपना महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'विजन 2030' लॉन्च किया था।
विजन 2030 के तीन मुख्य उद्देश्य हैं- सऊदी अरब की तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाना, अपने रीति-रिवाजों को मानते हुए समाज का आधुनिकीकरण करना और सऊदी की वैश्विक छवि में सुधार लाना।
क्राउन प्रिंस एमबीएस ने सऊदी की रूढ़िवादी इस्लामिक छवि में सुधार के लिए भी कई बड़े कदम उठाए हैं जिसमें महिलाओं को काम करने और कार चलाने की इजाजत जैसी चीजें शामिल हैं।












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