'पाकिस्तान में आतंकवाद है एक इंडस्ट्री, नहीं सुधरेंगे हालात', जयशंकर ने PAK की कंगाली के कारण गिनाए
पाकिस्तान गंभीर आर्थिक हालातों से गुजर रहा है और उसके पास विदेशी मुद्रा बचे नहीं हैं। वहीं, आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की कर्ज की हासिल करने के लिए पाकिस्तान सरकार लगातार हाथ पैर मार रही है।

Jaishankar on Pakistan: कंगाली और फटेहाल की स्थिति के बीच दुनियाभर में भीख मांगने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर से भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीख देने की कोशिश की है और कहा है, कि जिस देश का प्रमुख इंडस्ट्री ही आतंकवाद है, तो फिर उस देश की स्थिति में कभी सुधार नहीं हो सकता है। पिछले कुछ दिनों में जयशंकर का पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक हालातों पर दूसरी टिप्पणी है और इससे पहले उन्होंने कहा था, कि भारत, श्रीलंका की तरह पाकिस्तान की मदद नहीं करेगा।

पाकिस्तान को जयशंकर की नसीहत
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा है, कि कोई भी देश मुश्किल स्थिति से बाहर नहीं आ सकता है "यदि उसका मूल उद्योग ही आतंकवाद है।" जयशंकर ने गुरुवार को पुणे में विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित वार्षिक एशिया आर्थिक संवाद में कहा, कि "इस विशेष संबंध (भारत-पाकिस्तान) की वास्तविकता यह है, कि इसमें एक मूलभूत मुद्दा है, जिसे हम नहीं टाल सकते और हमें इसपर बात करने से बचना नहीं चाहिए और यह मुद्दा आतंकवाद का है, क्योंकि जिस क्षण आप किसी बात करने की बात करते हैं, को फिर वो आतंकवाद उस बातचीत के इर्द-गिर्द घूमते हैं..." जयशंकर ने आगे कहा, कि "और हमें इस बात से इनकार नहीं करना चाहिए, कि उस रिश्ते में कौन सी मूलभूत समस्याएं हैं। और जिस तरह एक देश को अपने आर्थिक मुद्दों को ठीक करना होता है, उसी तरह एक देश को अपने राजनीतिक मुद्दों को भी ठीक करना होता है। एक देश को अपने सामाजिक मुद्दों को ठीक करना होता है।" उन्होंने कहा, कि "कोई भी देश कभी भी कठिन परिस्थितियों से बाहर नहीं निकलेगा और समृद्ध शक्ति नहीं बनेगा, यदि उसका मूल उद्योग आतंकवाद है"।

'पड़ोसी आर्थिक कठिनाई में हो, ये ठीक नहीं'
भारतीय विदेशमंत्री ने कार्यक्रम में आगे बोलते हुए कहा, कि "यह किसी के हित में नहीं है, कि कोई भी देश, या कम से कम पड़ोसी देश गंभीर आर्थिक कठिनाइयों में पड़ जाएं। लेकिन, अगर कोई देश गंभीर आर्थिक समस्याओं में फंस जाता है, तो उस देश को खुद को इससे बाहर निकालने के लिए नीतिगत विकल्प और शासन को अपने फैसले लेने पड़ते हैं"। जयशंकर ने आगे कहा, कि "इसमें कोई संदेह नहीं है, कि एशिया की भूमिका या प्रमुखता बढ़ेगी। एशिया बढ़ रहा है, क्योंकि एशिया वैश्विक हो रहा है, हमें 'एशिया फॉर एशियाइयों' के लिए ही बात नहीं करनी चाहिए, यह बयानबाजी भ्रामक है"। इस बीच, जयशंकर ने कार्यक्रम में 'पड़ोसी पहले' नीति, दुनिया की स्थिति और भारत की जी20 अध्यक्षता पर भी प्रकाश डाला और कहा, कि "अगर मैं अपने विचारों में तीन बड़े मुद्दों को चुनूं, तो एक मैं वास्तव में अपने पड़ोस पर फोकस करूंगा।"
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पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति
आपको बता दें, कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक हालातों से गुजर रहा है और उसके पास विदेशी मुद्रा बचे नहीं हैं। वहीं, आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की कर्ज की हासिल करने के लिए पाकिस्तान सरकार लगातार हाथ पैर मार रही है, लेकिन आईएमएफ प्रोग्राम को लेकर अभी तक सस्पेंस बरकरार है और आईएमएफ ने साफ कर दिया है, कि जब तक उसकी सभी शर्तों को नहीं माना जाता है, तब तक पाकिस्तान को लोन की किश्त नहीं दी जाएगी। वहीं, पाकिस्तान के दोस्त देश चीन और सऊदी अरब भी आईएमएफ प्रोग्राम के फाइनल होने का ही इंतजार कर रहे हैं। डिप्लोमेटिक सूत्रों के मुताबिक, आईएमएफ प्रोग्राम पर बात बनने के बाद ही पाकिस्तान को ये दोनों देश मदद करने की सोच सकते हैं। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल के साथ 31 जनवरी से 9 फरवरी तक 10 दिनों की गहन बैठक की, लेकिन ये वार्ता अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सका।












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