Iran ships Kochi port: 'समुद्र में फंसे थे ईरानी कैडेट्स, फिर जो भारत ने किया', जयशंकर ने पहली बार खोला ये राज
S Jaishankar Iran ships Kochi port: रायसीना डायलॉग 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हिंद महासागर की सुरक्षा और भारत की बढ़ती भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने ईरानी जहाजों को कोच्चि बंदरगाह पर शरण देने के मानवीय फैसले का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों (UNCLOS) का सम्मान करता है।
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि हिंद महासागर की पहचान केवल नाम से नहीं, बल्कि ठोस संसाधनों और प्रतिबद्धता से बनेगी। उन्होंने भारत के बढ़ते प्रभाव को क्षेत्र के अन्य देशों के लिए भी फायदेमंद बताया और कहा कि भारत का उत्थान अपनी ताकत पर निर्भर है।

S Jaishankar Raisina Dialogue 2026: ईरानी जहाजों को मानवीय मदद
डॉ. जयशंकर ने बताया कि मार्च 2026 की शुरुआत में ईरानी जहाजों ने तकनीकी समस्याओं के कारण कोच्चि बंदरगाह पर आने की अनुमति मांगी थी। हालांकि उस समय स्थितियां बदल चुकी थीं और कई युवा कैडेट जहाजों पर सवार थे, भारत ने कानूनी पेचीदगियों के बजाय 'मानवता' को प्राथमिकता दी। उन्होंने श्रीलंका की स्थिति से इसकी तुलना करते हुए कहा कि भारत ने सही समय पर सही निर्णय लिया। यह कदम दिखाता है कि भारत संकट के समय एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में खड़ा है।
ये भी पढे़ं: US Iran Tension: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण के अलावा कोई समझौता नहीं', ट्रंप का ईरान को कड़ा अल्टीमेटम
हिंद महासागर में विदेशी उपस्थिति
विदेश मंत्री ने हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया, जिबूती और हंबनटोटा जैसे विदेशी सैन्य ठिकानों पर हो रही सोशल मीडिया चर्चाओं पर वास्तविकता स्पष्ट की। उन्होंने याद दिलाया कि ये आधार दशकों पुराने हैं और इस क्षेत्र की भू-राजनीतिक वास्तविकता का हिस्सा हैं। जयशंकर का तर्क था कि भारत इन चुनौतियों से वाकिफ है और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने क्षेत्र की जटिलताओं को समझते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
ये भी पढे़ं: Iran Vs USA: ईरान के पलटवार से तबाह हुआ अमेरिका! खाली हुए मिसाइल गोदाम, रातों-रात 4 गुना हथियार बनाने का आदेश
संसाधन और क्षेत्रीय पहचान
जयशंकर के अनुसार, हिंद महासागर की पहचान केवल बातों से नहीं बल्कि निवेश और प्रोजेक्ट्स से बनेगी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत क्षेत्रीय पहचान बनाने के लिए संसाधनों, प्रतिबद्धता और धरातल पर काम करने की जरूरत है। भारत केवल एक मूक दर्शक नहीं है, बल्कि वह इस क्षेत्र के विकास के लिए 'प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स' पर काम कर रहा है। यह दृष्टिकोण हिंद महासागर के देशों के बीच एक साझा भविष्य और सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए आवश्यक है।
ये भी पढे़ं: Iran Vs USA: ईरान के पलटवार से तबाह हुआ अमेरिका! खाली हुए मिसाइल गोदाम, रातों-रात 4 गुना हथियार बनाने का आदेश
भारत का उत्थान और आत्मनिर्भरता
भारत का नाम इस महासागर से जुड़ा होने पर गर्व व्यक्त करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत की प्रगति से पड़ोसी देशों को भी लाभ होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का भविष्य दूसरों की गलतियों पर नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति और मेहनत पर निर्भर करेगा। जो देश भारत के साथ मिलकर काम करेंगे, वे इस विकास यात्रा में ज्यादा लाभ उठाएंगे। यह बयान एक 'आत्मनिर्भर' और 'विश्वबंधु' भारत की छवि को विश्व मंच पर मजबूती से रखता है।












Click it and Unblock the Notifications