रूस के जासूस को जहर क्या एक बार फिर पुतिन के आदेश पर दिया गया, जानें इस मामले के बारे में सब-कुछ
इंग्लैंड के सेल्सिबरी में पूर्व रूसी एजेंट सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया को जहर देकर मारने की कोशिश के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस की आलोचना हो रही है। अमेरिका भी ब्रिटेन के सुर में सुर मिला रहा है और उसने इन हालातों को इमरजेंसी तक करार दे दिया है।
लंदन। इंग्लैंड के सेल्सिबरी में पूर्व रूसी एजेंट सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया को जहर देकर मारने की कोशिश के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस की आलोचना हो रही है। अमेरिका भी ब्रिटेन के सुर में सुर मिला रहा है और उसने इन हालातों को इमरजेंसी तक करार दे दिया है। बुधवार को यह मामला यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी कांउसिल (यूएनएससी ) तक पहुंच गया। यहां पर अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने इस मसले पर एक इमरजेंसी मीटिंग तक बुलाने की मांग की है। ब्रिटेन इस मामले के बाद रूस के 23 राजनयिकों को देश से निकाल दिया है। साल्सिबरी में सर्गेई और उनकी बेटी यूलिया को खतरनाक नर्व एजेंट देकर मारने की कोशिश की गई थी। ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे ने इस मामले में सीधे तौर पर रूस को सर्गेई और उनकी बेटी यूलिया के कत्ल करने की कोशिशों का दोषी करार दे दिया है। एक नजर डालिए कि आखिर यह पूरा मामला है क्या।

चार मार्च को बेहोशी की हालत में मिले थे सर्गेई
यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब सर्गेई की बेटी यूलिया तीन मार्च को रूस से लंदन आईं। चार मार्च को सर्गेई और यूलिया दोनों साल्सिबरी सिटी सेंटर में स्थित कार पार्किंग में आए। पुलिस का कहना है कि यहां ये दोनों बिशप मिल पब गए और इससे पहले वह जिजि रेस्टोरेंट गए थे। इसके बाद शाम को करीब सवा चार बजे इमरजेंसी सर्विसेज को घटना की पहली रिपोर्ट मिली। जब पुलिस पहुंची तो उसने जिजि रेस्टोरेंट के बाहर एक बेंच पर दोनों को गंभीर हालत में पाया। इन दोनों को जो जहर दिया गया था वह इतना खतरनाक था कि पुलिस ऑफिसर भी घटना के बाद बीमार पड़ गया और उसे भी अस्पताल ले जाना पड़ा। इस पुलिस ऑफिसर की हालत गंभीर है। 66 वर्ष के सर्गेई रूस के मिलिट्री इंटेलीजेंस ऑफिसर थे।

23 राजनयिकों को निकाला गया
इस घटना के बाद ब्रिटेन ने 23 रूसी राजनयिक को निष्कासित कर दिया। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे के इस फैसले के कुछ घंटों बाद यूएनएससी में इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई। ब्रिटेन ने रूस पर आरोप लगाए कि उसने रासायनिक हथियारों पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है। ब्रिटेन ने निष्कासित रूसी राजनयिकों को देश छोड़ने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। रूस ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे खारिज कर दिया है। ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे ने संसद को बताया कि निष्कासित रूसी राजनयिक असल में अघोषित जासूस थे।

250 से ज्यादा ऑफिसर्स जांच में जुटे
ब्रिटेन की ओर से इस घटना की जांच शुरू की गई और 250 से ज्यादा काउंटर-टेररिज्म ऑफिसर्स इस घटना की जांच कर रहे हैं। वही 180 मिलिट्री पर्सनल को उन गाड़ियों और सामानों को हटाने को कहा गया है जो इस केमिकल के संपर्क में आए हैं। ब्रिटेन के डिफेंस बॉयोलॉजिक रेडियोलॉजिकल एंड न्यूक्लियर सेंटर से आए ऑफिसर्स ने पता लगाया कि जो जहर दिया गया था वह असल में नर्व एजेंट था।

रूस और ब्रिटेन के संबंधों में तनाव
जिन 23 राजनयिकों को निकाला गया है उन्हें एक हफ्ते के अंदर ब्रिटेन छोड़ना होगा। इस घटना के बाद रूस में इस वर्ष होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में कोई भी ब्रिटिश मंत्री और शाही परिवार का सदस्य हिस्सा नहीं लेगा। अगर इस घटना में रूस का हाथ साबित हुआ तो फिर यूके में रूस की सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा। इसके अलावा रूस से आने वाली प्राइवेट फ्लाइट्स और कस्टम पर होने वाली जांच का दायरा बढ़ा दिया जाएा। सिर्फ इतना ही नहीं रूस और ब्रिटेन के बीच सभी तरह के हाई लेवल कॉन्टेक्ट्स को भी सस्पेंड कर दियास गया है।

साल 2016 में पुतिन पर लगा मर्डर का आरोप
इससे पहले साल 2016 में भी रूस के एक जासूस की लंदन में हत्या हो गई थी और उसमें तो ब्रिटेन की कोर्ट ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन को जिम्मेदार बताया था। लंदन की एक कोर्ट के जज ने कहा था कि राष्ट्रपति पुतिन ने उस प्लान को मंजूरी दी थी जिसके तहत रूस की एजेंसी एफएसबी के जासूस एलेक्जेंडर लिटिवेन्को का मर्डर किया गया। जज के मुताबिक एलेक्जेंडर को चाय में पोलोनियम-210 की मिलाकर दिया गया था जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई थी। एलेक्जेंडर की डेड बॉडी नवंबर 2006 में लंदन के एक होटल में मिली थी। जज के मुताबिक इस बात की संभावना काफी ज्यादा है कि एफएसबी को ऐसा करने के लिए आदेश दिए गए थे और ये निर्देश पुतिन की ओर से दिए गए। उन्होंने ही इस पूरे मिशन को मंजूरी दी थी।












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