शी जिनपिंग ने कहा था- हर हद पार कर निभाएंगे पुतिन से दोस्ती... और रूस ने यूक्रेन पर कर दिया हमला

इसी महीने चार फरवरी को जब बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों का उद्घाटन समारोह में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई थी।

मॉस्को/बीजिंग/वॉशिंगटन, फरवरी 24: रूस ने पूरी ताकत के साथ यूक्रेन पर भीषण हमला शुरू कर दिया है और अभी तक यूक्रेन पर कम से कम 30 से ज्यादा खतरनाक हमले किए जा चुके हैं और रूस ने सबसे पहले यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम को ही तबाह किया है और अब तक 100 से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं। लेकिन, सवाल उठ रहे हैं, कि क्या पुतिन अकेले ही अमेरिका, नाटो और यूरोपीय देशों से टकरा रहे हैं, या फिर चीन से उन्हें 'राहत' पैकेज मिलने का वादा किया गया है। आखिर शी जिनपिंग कैसे पुतिन के लिए बैकअप प्लान हैं, आईये जानते हैं।

पुतिन के पीछे शी जिनपिंग

पुतिन के पीछे शी जिनपिंग

इसी महीने चार फरवरी को जब बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों का उद्घाटन समारोह मनाया जा रहा था, जिसका अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों ने बहिष्कार कर दिया था, उस वक्त शी जिनपिंग के साथ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मौजूद थे और अब विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है, कि चीन अब ज्यादा से ज्यादा रूसी तेल और गैस खरीद सकता है और व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों के खिलाफ रूस के लिए एक ढ़ाल बन सकता है। यानि, आर्थिक प्रतिबंध लगाकर जो अमेरिका रूस को घुटनों पर लाना चाहता है, उसके खिलाफ रूस और चीन पहले ही प्लान बना चुके हैं और यूक्रेन हमले को ‘हमला' मानने से इनकार करने के बाद चीन ने इस बात के सबूत भी दे दिए हैं। अमेरिका और नाटो ने साफ कर दिया है, कि रूस के खिलाफ अब अत्यंत सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

चीन कर रहा पर्दे के पीछे से मदद

चीन कर रहा पर्दे के पीछे से मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का रूस को 'पर्दे के पीछे' मदद करने की संभावना है और एक्सपर्ट्स का मानना है कि, बीजिंग के समर्थन की वजह से रूस को अपने आर्थिक संकट से उबरने में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा और इसीलिए रूस बेखौफ होकर यूक्रेन पर हमला कर रहा है और बीजिंग, मॉस्को के लिए सुरक्षा कवच बन रहा है। हालाँकि, चीन को 'एक अच्छी लाइन पर चलने' की आवश्यकता होगी, क्योंकि वह पश्चिम के साथ अपने संबंधों को नुकसान पहुंचाने से भी बचने की कोशिश करेगा और चीन के लिए भी पश्चिमी देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बचाने की बड़ी प्राथमिकता होगी, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि, फिलहाल चीन मौन रहकर रूस को समर्थन देता रहेगा।

काफी करीब आ चुके चीन-रूस

काफी करीब आ चुके चीन-रूस

चीन और रूस हाल के वर्षों में करीब आ गए हैं, क्योंकि दोनों ने पश्चिम के साथ बढ़ते तनाव का सामना किया है। ताइवान को लेकर जहां चीन का अमेरिका के साथ लगातार तनाव बना हुआ है, वहीं यूक्रेन को लेकर पुतिन के आगे अमेरिका समेत पूरा पश्चिम खड़ा है। पुतिन ने शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत के लिए फरवरी की शुरुआत में बीजिंग का दौरा किया था और दोनों नेताओं ने उस समय एक बयान जारी किया था, जिसमें घोषित किया गया था कि 'दोनों राज्यों के बीच दोस्ती की कोई सीमा नहीं है'। यानि, दोनों देश हर हद से बाहर जाकर दोस्ती निभाएंगे। और चीन से मिले इंश्योरेंस के बाद ही पुतिन ने हमले का फैसला लिया है, क्योंकि पुतिन ये बाद भलीभांति जानते थे... कि हमला करने की स्थिति में उन्हें कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

यूक्रेन संकट पर रूस के साथ चीन

यूक्रेन संकट पर रूस के साथ चीन

हालांकि, यूक्रेन संकट पर चीन ने खुले तौर पर रूस के पक्ष में बयान नहीं दिया है, लेकिन चीन ने जो बयान दिया है, वो रूस के पक्ष में होने का ही है। चीन ने कहा, यूक्रेन में जो कुछ हो रहा है, वो उसे ‘हमला' नहीं मान रहा है। इसके साथ ही चीन ने कहा, कि अगर यूक्रेन में हमला हुआ है, तो अफगानिस्तान में क्या हुआ था, अगर यूक्रेन में हमला हुआ है, तो फिर सीरिया और इराक में क्या हुआ था? चीन ने हालांकि, सभी पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील जरूर की है, लेकिन बीजिंग की तरफ से यह भी कहा गया, कि यूक्रेन की जो आज स्थिति हुई है वो 'कई जटिल कारकों का परिणाम है' और 'चीन हमेशा मामले की खूबियों के अनुसार अपनी स्थिति खुद बनाता है'। यूक्रेन पर आक्रमण के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि, चीन द्वारा रूस की आलोचना नहीं की जाएगी।

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    रूस की पूरी मदद करेगा चीन

    रूस की पूरी मदद करेगा चीन

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन रूस की मदद करेगा, क्योंकि चीन और रूस आने वाले वक्त में एक साथ मिलकर पश्चिमी देशों की ‘बादशाहत' के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश करेंगे। इसका मतलब यह हो सकता है, कि चीनी बैंक मास्को और बीजिंग को अधिक रूसी तेल और गैस खरीदने के लिए पैसा उधार दे। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के बीजिंग स्थित विश्लेषक टॉम रैफर्टी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, कि 'रूसी कार्यों के लिए चीनी समर्थन का स्तर एक उभरते संकट को आकार देने में एक प्रभावशाली कारक हो सकता है।' वारसॉ में पूर्वी अध्ययन केंद्र में चीन कार्यक्रम के एक वरिष्ठ साथी जैकब जैकबोव्स्की ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, कि 'जब तक पश्चिम चीन पर वास्तव में ठोस प्रेशर नहीं डालता, तब भी चीन पर्दे के पीछे रूस की मदद करेगा।'

    आर्थिक नुकसान से कैसे बचेगा चीन?

    आर्थिक नुकसान से कैसे बचेगा चीन?

    हालांकि, कई लोगों का मानना है कि चीन अपने आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहेगा जो उसके पश्चिम से जुड़े हुए हैं और इससे मॉस्को के लिए उसके समर्थन को कुछ कम किया जा सकता है, लेकिन ज्यादा नहीं। यूएस रिसर्च फर्म रोडियम ग्रुप में यूरोप-चीन संबंधों के विशेषज्ञ नोआ बार्किन ने ब्लूमबर्ग से कहा, कि बीजिंग को 'इस संकट में एक अच्छी लाइन पर चलना होगा'। उन्होंने कहा कि, 'यह क्षेत्रीय अखंडता और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों के लिए अपने समर्थन की पुष्टि करते हुए, यूक्रेन में रूस के कार्यों की खुले तौर पर आलोचना करने से बचना चाहेगा। यूक्रेन में संघर्ष जितना गर्म होगा, बीजिंग के लिए इस लाइन पर चलना उतना ही मुश्किल होगा।'

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