रूस का मून मिशन फेल, तो इसलिए चांद पर नहीं पहुंच सका लूना-25, स्पेस एजेंसी के चीफ ने किस पर फोड़ा ठीकरा?
चांद की सतह पर उतरने के लिए निकला रूस का लूना-25 स्पेसक्रॉफ्ट क्रैश कर गया। रूस की योजना लूना-25 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिग कराने की थी लेकिन लैंडिंग से पहले कक्ष में खुद को स्थापित करने में आई तकनीकी समस्या के बाद ये क्रैश हो गया।
रूस ने करीब 50 साल बाद चांद पर जाने का मिशन लांच किया था। ऐसे में इसके फेल होने से रूस के मिशन मून को एक बड़ा झटका लगा। अब रोस्कोसमोस ने इस मिशन की असफलता को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है।

रोस्कोसमोस अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख यूरी बोरिसोव ने लूना-25 चंद्रमा मिशन की विफलता के पीछे मुख्य कारण बताया है। उन्होंने कहा कि लूना-25 अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, क्योंकि उसके इंजन सही ढंग से बंद नहीं हो सके। इसके साथ ही उन्होंने देश में चांद से जुड़ी खोजों को लेकर दशकों से लगे विराम को जिम्मेदार ठहराया।
रोस्कोस्मोस के महानिदेशक यूरी बोरिसोव ने कहा कि लूना-25 को 'लैंडिंग से पहले की कक्षा' में स्थापित करने के लिए अंतरिक्ष यान के इंजन चालू किए गए थे, लेकिन दुर्भाग्य से ये समय पर बंद नहीं हुए, जिससे यह अपनी कक्षा से भटक गया और लैंडर चंद्रमा पर गिर गया।
बोरिसोव के मुताबिक लूना-25 के इंजन को पूर्व निर्धारित योजना के हिसाब से 84 सेकेंड के बाद बंद हो जाना चाहिए था मगर यह 127 सेकेंड तक चलता रहा जिससे यह सही तरीके से नियोजित कक्षा में प्रवेश नहीं कर सका।
बोरिसोव ने कहा कि मिशन की विफलता के पीछे यह कारक महत्वपूर्ण कारण था, उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए एक विशेष आयोग पहले ही स्थापित किया जा चुका है।
रूस का यह मिशन मून 1976 के बाद पहला मिशन था। अब तक केवल तीन देश सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सफल चंद्रमा लैंडिंग में कामयाब रहे हैं।
बोरिसोव ने कहा, "लगभग 50 वर्षों तक मिशन मून कार्यक्रम को रोक रखा गया जिसका परिणाम ये है कि हमें विफलता मिली है। इतने लंबे वक्त तक का नकारात्मक अनुभव विफलता का मुख्य कारण है। अब रूस के लिए अब मिशन मून कार्यक्रम को समाप्त करना अब तक का सबसे खराब निर्णय होगा।"
आपको बता दें कि लूना-25 दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचने के लिए 14 जुलाई को लॉन्च किए गए भारतीय अंतरिक्ष यान के साथ दौड़ में था। लूना 25 के 21 अगस्त और चंद्रयान-3 के 23 अगस्त के बीच चंद्रमा पर पहुंचने की उम्मीद थी।
2019 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का पिछला भारतीय प्रयास तब समाप्त हो गया जब अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अब रूस के इस असफल मिशन के बाद एक बार फिर से सबकी नजरें चंद्रयान-3 पर टिक गई हैं।
बोरिसोव ने कहा कि मिशन की विफलता के बावजूद, रूसी अंतरिक्ष इंजीनियरों को लूना-25 के निर्माण के दौरान बहुमूल्य अनुभव प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, "बेशक, टीम इस मिशन के दौरान हुई सभी गलतियों को ध्यान में रखेगी, मुझे उम्मीद है कि लूना-26, 27 और 28 के भविष्य के मिशन सफल होंगे।"
रूस ने अपने चंद्र मिशन का बजट आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब 1,600 करोड़ रुपए का था।












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