भारतीय प्रधानमंत्री के फिर से मुरीद हुए रूसी राष्ट्रपति, पुतिन ने कहा, PM नरेन्द्र मोदी से सीख लेनी चाहिए..
Vladimir Putin On Narendra Modi: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उनकी 'मेक इन इंडिया' नीति को प्रोत्साहित करने के लिए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। भारत की डोमेस्टिक इंडस्ट्री की तारीफ करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा, कि रूस भारत जैसे अपने भागीदारों से सीख सकता है।
रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में 8वें ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में रूस निर्मित कारों के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, पुतिन ने कहा, कि "मुझे लगता है कि इस संबंध में, हमें अपने कई भागीदारों, अर्थात् भारत में हमारे भागीदारों से सीखना चाहिए।"

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, कि "पीएम मोदी लोगों को भारत में निर्मित उत्पादों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करके "सही काम" कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कि "वे ज्यादातर भारत में बनने वाले कारों और जहाजों के उत्पादन और उनके इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"
पुतिन ने की पीएम मोदी की तारीफ
आपको बता दें, कि 'मेक इन इंडिया' अभियान, जो भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा दे रहा है, वो 2014 से पीएम मोदी के राजनीतिक अभियान की आधारशिला रहा है।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, कि "हमारे पास (रूस निर्मित) ऑटोमोबाइल हैं, और हमें उनका उपयोग करना चाहिए। यह बिल्कुल ठीक है।" पुतिन ने आगे कहा, कि रूस निर्मित कारों के उपयोग से किसी भी विदेशी व्यापार का उल्लंघन नहीं होगा।
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरीडोर की तारीफ
इसके अलावा, रूसी राष्ट्रपति ने नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर स्थापित 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा' (आईएमईसी) के बारे में भी बात की। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने कहा, कि आर्थिक गलियारा किसी भी तरह से रूस को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि इससे देश को फायदा होगा।
पुतिन से पूछा गया था, कि क्या इस आर्थिक गलियारे से रूस को कोई नुकसान भी है? इसपर उन्होंने कहा, कि "मुझे लगता है कि यह हमारी भलाई के लिए है। इससे हमें लॉजिस्टिक्स विकसित करने में मदद मिलेगी।"
उन्होंने कहा, कि अमेरिकी अंतिम समय में इसमें शामिल हुए। "लेकिन मैं वास्तव में नहीं समझता, कि वे इसका हिस्सा क्यों बनना चाहेंगे, सिवाय शायद कुछ व्यावसायिक हित के। हमें यहां ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है, जो हमें किसी भी तरह से नुकसान पहुंचा सके''
आपको बता दें, कि भारत के इस नए आर्थिक गलियारे को चीन के विवादास्पद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।












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