यूक्रेन युद्ध के बीच भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री, जानिए कैसे डिप्लोमेटिक पॉवर सेंटर बन रहा न्यू इंडिया?
चीन के विदेश मंत्री के बाद रूस के विदेश मंत्री भारत दौरे पर आ रहे हैं, जबकि अप्रैल में ब्रिटेन, मैक्सिको के विदेश मंत्री और इजरायल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री भी भारत आ रहे हैं...
नई दिल्ली, मार्च 28: फरवरी महीने में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था और मार्च महीने में दुनिया के ताकतवर मुल्कों के ताकतवर नेता भारत दौरे पर आ रहे हैं और कई नेता अप्रैल महीने में भारत दौरे पर आने वाले हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव अगले महीने भारत दौरे पर आने वाले हैं और भारत के सामने यूक्रेन पर रूसी 'सैन्य अभियान' की पूरी जानकारी देंगे।

भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव आधिकारिक बैठकों के लिए इस सप्ताह दिल्ली का दौरा करेंगे, क्योंकि यूक्रेन में युद्ध को एक महीना पूरा हो गया है, और भारत पर भी लगातार रूसी हमले की निंदा करने के लिए दवाब बढ़ रहा है। यूक्नेन पर रूसी हमले के बीच पुतिन के बेहद विश्वासी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के भारत दौरे के काफी मायने निकाले जा रहे हैं औऱ माना जा रहा है कि, रूसी विदेश मंत्री का भारत दौरा काफी हड़बड़ी में हो रहा है, ताकि रूस अपने सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से एक भारत के सामने अपना पक्ष रख सके और युद्ध को लेकर सारी जानकारियां दे सकें।

यूक्रेन युद्ध पर देंगे जानकारियां
रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्री लावरोव की यात्रा में युद्ध के परिणामस्वरूप रणनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और युद्ध को लेकर रूस का पक्ष भारत के सामने रखने की उम्मीद है। इसके साथ ही रूसी विदेश मंत्री के भारत दौरे के दौरान, भारत और रूस के बीच हुए तेल समझौते, रुपया-रूबल व्यापार तंत्र स्थापित करने, रूसी बैंकों के खिलाफ प्रतिबंधों और स्विफ्ट से बहिष्कार, और सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति में संभावित व्यवधानों पर विशेष चर्चाओं पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। मोदी सरकार ने पिछले हफ्ते संसद में संकेत दिया था, कि वह रियायती दर पर रूस से तेल खरीदने की पेशकश पर विचार कर रही है और वित्त मंत्रालय की अध्यक्षता में एक विशेष अंतर-मंत्रालयी समूह, यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों से उत्पन्न होने वाले भारतीय आयातकों और निर्यातकों के लिए भुगतान के मुद्दों को देख रहा है।

भारत का दौरा करेगी बैंक टीम
द हिंदू अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि, इस सप्ताह रूसी सेंट्रल बैंक या बैंक ऑफ रूस और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच तकनीकी मुद्दों पर बातचीत होगी, और एक टीम रूसी विदेश मंत्री लावरोव की यात्रा से पहले भारत की यात्रा करेगी, ताकि भुगतान संरचनाओं की स्थापना पर चर्चा की जा सके। दरअसल, स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम से रूस के बाहर होने के बाद भारत चाहता है, कि भारत रूस से जो रक्षा सामग्री, जैसे एस-400 मिसाइस सिस्टम, एक-203 असॉल्ट राइफल्स समेत तमाम डिफेंस सामग्रियों के लिए जो पेमेंट मोड है, उसमें पूरी तरह से स्पष्टता हो और भारत यह भी चाहता है, कि रुपया-रूबल भुगतान प्रणाली को सुव्यवस्थित और स्पष्टता के साथ स्थापित किया जाए, लिहाजा रूस के केन्द्रीय बैंक के अधिकारी, रूसी विदेश मंत्री से पहले भारत का दौरा कर रहे हैं।
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भारत-रूस में नियमित संपर्क
रूसी विदेश मंत्री लावरोव की यात्रा से पहले, नव नियुक्त रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने पिछले सप्ताह भारतीय विदेश मंत्रालय के तीन वरिष्ठतम अधिकारियों से मुलाकात की थी, जिसमें भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा, सचिव (पूर्व) सौरभ कुमार, और सचिव (आर्थिक संबंध) ) दम्मू रवि शामिल थे। ट्वीट्स में भारत के नये रूसी राजदूत अलीपोव ने कहा कि, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, जी -20 और अन्य बहुपक्षीय प्लेटफार्मों में रूस-भारत सहयोग पर आदान-प्रदान किया। रूसी विदेश मंत्री लावरोव की यात्रा को भारत के लिए एक आउटरीच के रूप में देखा जाएगा, क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय सहयोगी रूस को "अलग-थलग" करने के लिए भारत पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत ने साफ तौर पर कहा है, कि भारत सबसे पहले अपने हित को देखेगा।

डिप्लोमेसी का पॉवर सेंटर बनता भारत
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले सप्ताह कहा था, कि वह रूस को जी-20 समूह से बाहर करने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका अगला शिखर सम्मेलन इस साल नवंबर में इंडोनेशिया के बाली में होगा। अधिकारियों ने कहा कि भारत, जो 2023 में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, उसके इस तरह के कदम का समर्थन करने की संभावना नहीं है। वहीं, ब्रिटेन के विदेश सचिव लिज़ ट्रस और मैक्सिकन विदेश मंत्री एब्रार्ड भी सप्ताह के मध्य में दिल्ली में होंगे, जो भारत के साथ यूक्रेन युद्ध पर बेहद महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे। वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ अगले रविवार को इजरायल के प्रधान मंत्री नफ्ताली बेनेट की यात्रा से पहले भारत पहुंचेंगे। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस महीने के अंत में अपने समकक्ष एंटनी ब्लिंकन और जनरल लॉयड ऑस्टिन से मिलने के लिए यू.एस. की यात्रा करने की उम्मीद है, जहां संभव है कि एस400 खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध को लेकर बातचीत किए जाने की संभावना है।

चीन के विदेश मंत्री आये थे भारत
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी के दिल्ली की यात्रा के कुछ दिनों बाद हो रही है। चीन के विदेश मंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ यूक्रेन के मुद्दे पर चर्चा की थी। जिसमें भारत और चीन, दोनों देश यूक्रेन संकट के तत्काल युद्धविराम और वार्ता और कूटनीति पर लौटने की आवश्यकता जताई थी। वहीं, रूसी विदेश मंत्री की भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन के लिए भी बीजिंग की यात्रा करने की संभावना है।

यूक्रेन युद्ध पर भारत न्यूट्रल
भारत ने अब तक संयुक्त राष्ट्र में रूस की आलोचना करने वाले सभी प्रस्तावों से लगातार परहेज किया है और डिप्लोमेटिक बातचीत का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी से 7 मार्च के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से कई बार टेलीफोन पर बात की है, जब भारतीय छात्रों को यूक्रेन से वापस ले जाया जा रहा था। वहीं, भारत ने उस ग्रुप में शामिल होने पर भी सहमति जता दी है, जो यूक्रेन युद्ध में संघर्ष विराम के लिए मध्यस्थता की कोशिश करेगा, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देश भारत पर लगातार रूस की निंदा करने के लिए प्रेशर बना रहे हैं, लेकिन भारत ने साफ किया है, कि वो अपने हितों को देखेगा।












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