INSTC ट्रेड रूट से पहली बार ईरान के रास्ते कोयला पहुंचा भारत, जियो-पॉलिटिक्स में USA को बहुत बड़ा झटका!
INSTC Trade Route: जियो-पॉलिटिक्स में भारत जिस तरह अपने हितों को साधने के लिए अमेरिका की धमकियों को नजरअंदाज कर रहा है, वो बताता है, कि भारत कैसे दुनिया में अपनी हनक कायम कर रहा है और ये भारत-रूस संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक घटना है।
ये पहली बार हुआ है, कि रूसी कोयले की एक खेप एक नये गलियारे के जरिए ईरान के रास्ते भारत पहुंची है, जो अमेरिका के लिए बहुत बड़ा झटका है। रूस की नेशनल रेलवे कंपनी ने घोषणा की है, कि रूस ने ईरान से होकर गुजरने वाले इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए भारत को कोयले से लदी दो ट्रेनें भेजी हैं।

INSTC ट्रेड रूट से कोयला पहुंचा भारत
रूसी रेलवे ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा है, कि "पहली बार, कुजबास कोयले से लदी दो ट्रेनें इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए भारत की ओर रवाना हुईं। ट्रेनें केमेरोवो क्षेत्र से रवाना हुईं थी और वे कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होते हुए INSTC की पूर्वी शाखा के साथ ईरानी बंदरगाह बंदर अब्बास तक पहुंचीं।"
आपको बता दें, कि INSTC एक मल्टीमॉडल रूट है, जो सेंट पीटर्सबर्ग को भारत के मुंबई बंदरगाह से 7,200 किलोमीटर के रास्ते को जोड़ता है और इसमें रेलवे, सड़क नेटवर्क और बंदरगाह शामिल हैं। यह कॉरिडोर पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में नए परिवहन मार्ग स्थापित करने के रूस की कोशिशों का हिस्सा है, जिसने मॉस्को को यूरोप से मध्य पूर्व और एशिया में माल भेजने के लिए ट्रेड रूट बदलने के लिए मजबूर किया है।
शुरुआत में इसे NSTC परियोजना के नाम से जाना जाता था और इस समझौते पर रूस, ईरान और भारत ने 2002 में हस्ताक्षर किए थे, जिससे वे इसके संस्थापक सदस्य बन गए। रूस पर लगाई गई पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से ये कॉरिडोर अचानकर प्रसिद्ध हो गया और इसपर तेजी से काम शुरू हो गया। इसके अलावा, नई दिल्ली ने कॉरिडोर को चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया है।
बयान के मुताबिक, कोयले को ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से भारत के मुंबई बंदरगाह तक समुद्र के रास्ते ले जाया जाएगा।
कितना महत्वपूर्ण है INSTC?
भारत उन कुछ देशों में से एक है, जिसने रूस पर प्रतिबंध लगाने के सभी आह्वानों को खारिज कर दिया है और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के मद्देनजर मास्को से अपने कच्चा तेल के निर्यात में वृद्धि की है। पश्चिमी देशों की तरफ से प्रतिबंध लगने के बाद रूस, अब एशियाई देशों में व्यापार के अवसर तलाश रहा है और रूस ने कच्चे तेल के साथ साथ कोयले के लिए भारी डिस्काउंट दिया है, जिसके बाद से भारत, लगातार रूस से ज्यादा थर्मल कोयला और कोकिंग खरीद रहा है।
रूसी रेलवे के मुताबिक, रूस से भारत तक INSTC ट्रेड रूट के जरिए माल पहुंचने में 23 दिनों का वक्त लगता है, जबकि स्वेज नहर के जरिए शिपिंग में करीब 45 दिन लगते हैं, इसलिए INSTC का महत्व काफी बढ़ जाता है।
इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था, कि मॉस्को नियमित माल ढुलाई शिपिंग लाइनें स्थापित करने और INSTC में इंटरकनेक्टिविटी की गारंटी देने का लक्ष्य बना रहा है। अगले सात वर्षों में, INSTC के माध्यम से भेजे जाने वाले प्रोडक्ट्स की मात्रा लगभग तीन गुना होने का अनुमान है। रूसी नेता ने अफ्रीकी तट के साथ गलियारे के लिए एक लॉजिस्टिक हब बनाने का भी प्रस्ताव दिया है।
हालांकि, हाल ही में कोयले की डिलीवरी भारत की तरफ से यह संकेत दिए जाने के कुछ दिनों बाद हुई है, कि वह ईरान के चाहबार बंदरगाह के माध्यम से रूस और अन्य मध्य एशियाई देशों से कोकिंग कोल आयात करने की योजना बना रहा है। वर्तमान में, रूस से कोयला, लाल सागर मार्ग से भारत आता है।
भारत की रूसी कोयले पर घटनी निर्भरता
कोयला कंसलटेंट बिगमिंट के आंकड़ों के मुताबिक, मई में समाप्त होने वाले तीन महीनों के दौरान, रूसी कोयले के भारतीय आयात में कमी आई है, जबकि अमेरिकी शिपमेंट में वृद्धि देखी गई है। व्यापारियों ने इसका कारण रूसी आपूर्ति में कमी को बताया।
बिगमिंट के आंकड़ों से संकेत मिलता है, कि उस समय के दौरान भारत को रूस का कुल कोयला निर्यात पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 22.4% कम होकर 6.76 मिलियन मीट्रिक टन पर पहुंच गया है।
इसी अवधि में, अमेरिकी निर्यात 14.4% बढ़कर 6.68 मिलियन टन हो गया। थर्मल कोयले के शिपमेंट में पिछले साल के मुकाबले 67% की गिरावट है, जिसका उपयोग ज्यादातर बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। बिगमिंट के आंकड़ों से संकेत मिलता है, कि इस अवधि में एन्थ्रेसाइट, कोकिंग कोल और पल्वराइज़्ड कोल इंजेक्शन (पीसीआई) कोयले सहित स्टीलमेकिंग ग्रेड की खरीद में वृद्धि हुई है।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर नए पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद, भारत अब चीन के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा कोयला खरीददार बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि दुनिया भर में कीमतों में गिरावट के बीच, खरीदारों ने कहा है, कि रूस से थर्मल कोयला कम छूट के बिना कम आकर्षक होता जा रहा है।
भारत को निर्यात में कमी के कारण चीन को रूसी कोयले की आपूर्ति में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई। हालांकि, 31 मई को समाप्त हुए तीन महीनों में, भारत को अमेरिकी थर्मल कोयले की शिपमेंट पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 21.6% बढ़कर 4.57 मिलियन टन हो गई, जो भारतीय आयात का 9.2% है। हालांकि, भारत के कोकिंग कोल के आयात में इसका प्रतिशत 16% से घटकर 13.5% हो गया है।
बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार, स्टीलमेकिंग फीड के लिए भारत के समुद्री बाजार में रूस की हिस्सेदारी साल दर साल 44% बढ़कर 13.9% कोकिंग कोल आयात हो गई, लेकिन भारत के थर्मल कोल आयात में इसकी हिस्सेदारी 8.8% से घटकर 3.2% हो गई। फिर भी, रूस पीसीआई और एन्थ्रेसाइट सहित भारत के अन्य स्टीलमेकिंग ग्रेड के लगभग सभी आयातों का प्राथमिक आपूर्तिकर्ता बना रहा।












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