ईरान में एक तस्वीर के कारण कैसे फंसे रूस और ब्रिटेन के राजदूत
ईरान में ब्रिटिश और रूसी राजदूत ने दूसरे विश्व युद्ध की याद ताज़ा कर वहाँ की सरकार को नाराज़ कर दिया है.
ईरान ने दोनों देशों के राजदूतों को समन किया है. रूसी दूतावस के ट्विटर हैंडल से एक फ़ोटो पोस्ट की गई थी. यह फ़ोटो दूसरे विश्व युद्ध में मित्र देशों की एक ऐतिहासिक बैठक की याद में थी.
ईरान में रूसी दूतावास के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से 11 अगस्त को रूसी राजदूत लेवान ज़ागरयान और ब्रिटिश राजदूत सिमोन शेरक्लिफ़ की तस्वीर पोस्ट की गई थी.
इस तस्वीर के साथ लिखा हुआ था, ''राजदूत लेवान और ब्रिटिश राजनयिक मिशन के प्रमुख सिमोन ऐतिहासिक सीढ़ी पर. यहीं पर 1943 में ऐतिहासिक तेहरान कॉन्फ़्रेंस हुई थी.''
1943 में यहीं दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों के नेता स्टालिन, चर्चिल और फ़्रैंकलीन डी रूज़वेल्ट की बैठक हुई थी. इन तीनों की मुलाक़ात की तस्वीर भी है. उस वक़्त ईरान पर रूस और ब्रिटेन का कब्ज़ा था. तेहरान कॉन्फ़्रेंस में ही मित्र देश दूसरे मोर्चे को लेकर नॉरमंडी पर आक्रमण के लिए सहमत हुए थे.
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ईरान का विरोध
तेहरान कॉन्फ़्रेंस की तर्ज़ पर ही फ़ोटो लेने के मामले में ईरान ने रूसी और ब्रिटिश राजदूत को समन भेजा है.
इस तस्वीर में दिख रहा है कि ब्रितानी राजदूत वहाँ बैठे हैं, जहाँ 1943 में तेहरान कॉन्फ़्रेंस के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश पीएम विंस्टन चर्चिल बैठे थे और सोवियत नेता जोसेफ़ स्टालिन की जगह रूसी राजदूत बैठे हैं. बीच की कुर्सी, जहाँ फ़्रैंकलीन रूज़वेल्ट बैठे थे, वो ख़ाली है.
https://twitter.com/RusEmbIran/status/1425387040447901698
रूसी और ब्रिटिश राजदूत की इस तस्वीर से ऐसा लगता है कि दोनों राजदूत रूस और ब्रिटेन के बीच मधुर संबंधों को याद कर रहे हैं, लेकिन ईरान के लिए ऐसा नहीं था.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस तस्वीर को 'बेहद अनुचित' बताया है. ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने ट्विटर पर लिखा है, ''मैंने आज एक बेहद अनुचित तस्वीर देखी. हम सबको याद रखने की ज़रूरत है कि अगस्त 2021 न तो अगस्त 1941 है और न ही दिसंबर 1943. ईरान के लोगों ने बता दिया है- यहाँ तक कि परमाणु समझौते में भी कि उनकी नियति का फ़ैसला न तो विदेशी दूतावास कर सकते हैं और न ही विदेशी शक्तियां.''
रूसी दूतावास के इस ट्वीट पर हज़ारों ग़ुस्से वाली प्रतिक्रियाएं आईं. तेहरान में अंग्रेज़ी साहित्य के प्रोफ़ेसर सईद मारांदी ने कहा, ''ये राजदूत ईरान के लोगों को अपमानित कर रहे हैं. तेहरान कॉन्फ़्रेंस ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन थी. ईरान के लोगों के ख़िलाफ़ अमेरिका, रूस और ब्रिटेन ने ऐतिहासिक अपराध किए थे.''
रूस की सफ़ाई
इस ग़ुस्से के बीच रूस दूतावास को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा. रूसी दूतावास ने ट्वीट कर कहा कि इस पोस्ट का संबंध ईरान विरोधी इरादे से नहीं है.
https://twitter.com/JZarif/status/1425529099561353228
रूसी दूतावास ने अपने स्पष्टीकरण में लिखा है, ''इस फ़ोटो का एकमात्र मतलब था- दूसरे विश्व युद्ध में नाज़ीवाद के ख़िलाफ़ मित्र देशों की साझी कोशिश को याद करना. हम ईरान के लोगों की भावना को आहत नहीं करना चाहते हैं. ईरान हमारा दोस्त और पड़ोसी है और हम पारस्परिक आदर के साथ संबंधों को मज़बूत बनाते रहेंगे.''
रूसी दूतावास के इस स्पष्टीकरण वाले ट्वीट को ईरान में ब्रिटिश राजदूत सिमोन ने भी रीट्वीट किया है. अभी ईरान और ब्रिटेन में काफ़ी तनाव चल रहा है. ब्रिटेन ने ओमान के तटीय इलाक़े में एक तेल टैंकर पर अवैध हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया था. इसमें एक ब्रिटिश और एक रोमानियाई नागरिक की मौत हुई थी.
1941 में रूस और ब्रिटेन ने तटस्थ ईरान पर हमला किया था ताकि तेल की आपूर्ति बाधित ना हो और रूसी आपूर्ति जारी रहे. ईरान की इब्राहिम रईसी सरकार में विदेश मंत्री बनने जा रहे हुसैन आमिर-अब्दोलाहिन ने इस तस्वीर को ग़ैर-राजनयिक और ईरान के राष्ट्रीय गर्व के ख़िलाफ़ बताया है.
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