'मौत के मुंह में फेंक देंगें', NATO में शामिल होने पर स्वीडन को सबसे बड़ी धमकी, फिनलैंड को भी रूस ने धमकाया
नाटो 30 देशों का सैन्य गठबंधन है और रूस नहीं चाहता है, कि अमेरिकी सैनिक उसकी सीमा तक पहुंच जाएं, इसीलिए रूस की तरफ से यूक्रेन को भी धमकियां दी गई थीं। बाद में रूस ने यूक्रेन पर हमला भी कर दिया।

Russia Warns Sweden over NATO: नाटो में शामिल होने को लेकर रूसी तरफ से स्वीडन को अभी तक की सबसे बड़ी धमकी दी गई है और रूस ने कहा है, कि अगर स्वीडन नाटो में शामिल होने का फैसला करता है, तो उसे "मौत के मुंह में भेज दिया जाएगा।" नाटो में शामिल होने की कोशिश करने वाले नार्डिक राष्ट्रों को रूस की तरफ से भेजी गई ये सबसे बड़ी धमकी है। हालांकि, स्वीडन की नाटो में शामिल होने की कोशिश पर तुर्की टांग अड़ा चुका है, लेकिन फिनलैंड अगले कुछ महीनों में नाटो का सदस्य बन सकता है, लिहाजा रूस ने फिनलैंड को भी गंभीर चेतावनी जारी की है।

स्वीडन को रूस ने धमकाया
स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में रूस के राजदूत ने नाटो में शामिल होने पर स्वीडन के लोगों को 'मौत के मुंह में भेजा जाएगा' की कड़ी चेतावनी दी है। स्टॉकहोम में रूसी राजदूत विक्टर तातारिन्त्सेव ने अपने दूतावास की वेबसाइट पर एक बयान में दावा किया है, कि अगर स्वीडन और पड़ोसी देश फिनलैंड, अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन नाटो में शामिल होते हैं, तो उन्हें 'जवाबी कार्रवाई' का सामना करना पड़ेगा, जिसमें 'सैन्य कार्रवाई' भी शामिल हैं। वहीं, रूसी राजदूत के बयान के बाद स्वीडन ने उन्हें समन भेजा है और उनके इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें उन्होंने ये भी कहा है, कि नाटो में शामिल होने के बाद स्वीडन और फिनलैंड दोनों 'वैध लक्ष्य' बनया जाएगा। आपको बता दें, कि दोनों नॉर्डिक देशों ने पिछले साल यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के फौरन बाद, नाटो की सदस्यता मांगी थी। दोनों देशों की सरकारें इस साल इस प्रक्रिया को पूरा करने की उम्मीद कर रही हैं।

क्या स्वीडन पर हमला कर सकता है रूस?
रूस ने पिछले साल भी स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल होने को लेकर धमकी दी थी। लेकिन, इस बार रूस की धमकी में 'मौत के मुंह में भेज देंगे' वाक्य शामिल है, जो स्पष्ट तौर पर युद्ध की धमकी मानी जा रही है। माना जा रहा है, कि रूस ने स्वीडन और फिनलैंड को जो धमकी दी है, वो पश्चिमी देशों पर प्रेशर बनाने की एक और कोशिश है और क्रेमलिन प्रमुख परमाणु मिसाइल अभ्यास भी कर रहा है। लिहाजा, इस बात से दो राय नहीं है, कि दुनिया तेजी से विनाशक युद्ध की तरफ बढ़ रही है। अगर रूस ने अब स्वीडन और फिनलैंड पर हमला किया, तो इसमें शक नहीं है, कि ये युद्ध पूरी दुनिया में फैल सकता है। स्टॉकहोम में रूसी राजदूत ने कहा है, कि स्वीडन का नाटो में शामिल होने का निर्णय 'जल्दबाजी' में था और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह के बिना आगे बढ़ने के लिए रूस ने स्वीडन की आलोचना भी की है। रूसी राजदूत ने कहा, कि स्वीडन नाटो की सदस्यता हासिल करके 'अस्थिरता की तरफ एक कदम' बढ़ा रहा है और उन्होंने ये भी कहा, "निश्चित तौर पर दूसरे के हितों को पूरा करने के चक्कर में स्वीडन को मौत के मुंह में भेज दिया जाएगा।"

स्वीडन क्या प्रतिक्रिया कर सकता है?
रूसी राजदूत के बयान पर स्वीडन के विदेश मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम ने कहा है, कि 'विदेश मंत्रालय रूसी राजदूत को तलब करेगा।' उन्होंने कहा, कि "स्वीडन की सुरक्षा नीति स्वीडन द्वारा निर्धारित की जाती है और इसका फैसला कोई और नहीं करेगा।" आपको बता दें, कि स्वीडन और फ़िनलैंड, दोनों दशकों से नाटो के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों देशों में जनता की राय औपचारिक रूप से यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से पहले नाटो गठबंधन में शामिल होने के खिलाफ थी, लेकिन अब दोनों देशों की जनता की राय काफी बदल गई है और अब लोगों का कहना है, कि नाटो में शामिल होने का वक्त आ गया है, जो रूस के लिए एक बड़ा झटका है। हालांकि, रूस अभी भी जनमत संग्रह कराने की बात पर जोर दे रहा है। कुछ सर्वे में दिखाया गया है, कि फिनलैंड में 80 प्रतिशत और स्वीडन में दो-तिहाई से ज्यादा लोग अब यूक्रेन में युद्ध के बाद से नाटो में शामिल होने के पक्ष में आ गये हैं।

रूस के साथ सीमा साझा करते हैं स्वीडन-फिनलैंड
स्वीडन और फिनलैंड, रूस के साथ 830 मील (1,340 किमी) की सीमा साझा करते हैं और अगर ये दोनों देश नाटो में शामिल हो जाते हैं, तो नाटो रूस की नाक के नीचे आ जाएगा। इनके नाटो में शामिल होने के बाद अमेरिका की सेना और अमेरिका के हथियार रूस की सीमा पर तैनात हो जाएंगे, जिसे रूस एक बड़े खतरे के तौर पर देखता है और रूस धमकी दे रहा है, कि इसे वो बर्दाश्त नहीं करेगा। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की भी सबसे बड़ी वजह उसके नाटो में शामिल होने की जिद ही थी। स्वीडन और फिनलैंड ने नाटो में शामिल होने के लिए आवेदन कर दिया है और 30 देशों के समूह नाटो की तरफ से उनके आवेदन पर काम जारी है। हालांकि, नाटो में शामिल होने के लिए स्वीडन और फिनलैंड को सभी 30 देशों के समर्थन की जरूरत है, लेकिन तुर्की ने स्वीडन के आवेदन पर टांग अड़ा दिया है। वहीं, फिनलैंड भी तुर्की की सहमति का इंतजार कर रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस महीने की शुरुआत में फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली निनिस्तो से फिनलैंड की सदस्यता का समर्थन का समर्थन करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक तुर्की ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

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स्वीडन के सामने कई दिक्कतें
स्वीडन के कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने पिछले दिनों कुरान का अपमान किया है, लिहाजा तुर्की ने स्वीडन की सदस्यता का समर्थन नहीं करने का ऐलान किया है। तुर्की में फिलहाल चुनाव का मौसम है, लिहाजा अर्दोआन, जो मुस्लिम राजनीति करने में माहिर हैं, वो कम से कम चुनाव खत्म होने कर स्वीडन की सदस्यता का समर्थन नहीं करेंगे। स्वीडन का समर्थन करने पर उनके घरेलू राजनीति में नुकसान हो सकता है। इसके अलावा स्वीडन के सामने एक और बड़ी दिक्कत हंगरी है। स्वीडन ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की कड़ी आलोचना की है, जिसके बाद कल ही रिपोर्ट आई है, कि हंगरी ने फिलहाल स्वीडन के आवेदन को होल्ड पर रख दिया है। हंगरी सरकार के एक प्रवक्ता ने बुधवार को इस मुद्दे को विस्तार से बताया और कहा, कि अंतर को पाटने के लिए दोनों पक्षों को प्रयास करने की आवश्यकता होगी। हंगरी की संसद ने सोमवार को फ़िनलैंड को नाटो में शामिल होने की अनुमति देने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी, लेकिन स्वीडिश विधेयक अभी भी अटका हुआ है। वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा है, कि तुर्की की संसद में फिनलैंड की सदस्यता के लिए जल्द ही बिल पेश किया जाएगा। माना जा रहा है, कि फिनलैंड के नाटो में शामिल होने रास्ते साफ हैं, लेकिन स्वीडन के लिए ये काफी मुश्किल होने वाला है।












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