Su-75: चीन-PAK के पास फिफ्थ जेनरेशन विमान, भारत में डिजाइन पर ही काम.. दोस्त रूस का नया ऑफर आएगा पसंद?

Su-75 Russia-India News: पाकिस्तान ने चीन से फिफ्थ जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने का ऐलान कर दिया है, लेकिन भारत में अभी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट के लिए डिजाइन पर काम चल रहा है। भारत स्वदेशी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का स्वदेशी निर्माण कब तक कर पाएगा, फिलहाल नहीं कहा जा सकता है।

लिहाजा, भारत के सामने कई विकल्प हैं, कि जब तक भारत स्वदेशी फाइटर जेट का निर्माण नहीं कर लेता, वो किसी और देश से फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट खरीद ले। जिसके लिए अमेरिका और रूस से लगातार ऑफर सामने आ रहे हैं।

Su-75 Russia-India News

रूस ने अपने सिंगल-इंजन लाइट टैक्टिकल फाइटर जेट Su-75, जिसे उसने 'चेकमेट' नाम दिया गया है, उसको लेकर भारत के सामने नया ऑफर रखा है। चेकमेट को लेकर भारत की झिझक को देखते हुए रूस ने इसकी कीमत कम करने का इरादा जताया है, ताकि भारत की नजर अमेरिकी हथियार कंपनी लॉकहीड मार्टिन एफ-35 लाइटनिंग II की तरफ से नजर हटाए और इंडियन एयरफोर्स चायनीज FC-31 का मुकाबला करने के लिए तैयार हो, जो उसने पाकिस्तान को देने का फैसला किया है।

रूस का ऑफर कैसा है?

सिंगल-इंजन लाइट टैक्टिकल फाइटर जेट Su-75 के डेवलपमेंट को लेकर रूसी ऑफर, भारत के कई रक्षा विशेषज्ञों को पसंद आ रहा है, लेकिन कई रक्षा विशेषज्ञ जियो-पॉलिटिक्स की तरफ ध्यान रखने की तरफ इशारा करते हैं और आकलन करते हैं, कि क्या भारत इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहता है, जिसने अभी तक एक भी प्रोटोटाइप फ्लाइट टेस्ट नहीं की है?

क्या भारत को Su-75 के डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा होना चाहिए? यूरो टाइम्स की की एक रिपोर्ट में भारत के रिटायर्ट एयर मार्शल अनिल खोसला ने कहा है, कि इसके लिए कई मोर्चों से संपर्क करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, कि "किसी भी अंजाम तक पहुंचने से पहले लागत-लाभ विश्लेषण करने की आवश्यकता है। रूस को परियोजना के लिए धन और विकास भागीदारों की आवश्यकता है, तो क्या भारत इस समझौते से ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकता है? इसके अलावा, जिस प्रश्न का उत्तर देने की आवश्यकता है, वह यह है, कि क्या यह परियोजना 'आत्मनिर्भरता' को प्रभावित करेगी।"

एयर मार्शल खोसला भारतीय वायु सेना (IAF) के उप प्रमुख रह चुके हैं।

एयर मार्शल खोसला के उत्तराधिकारी IAF के प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने साल 2019 में कहा था, कि "अभी या निकट भविष्य में विदेशी FGFA (पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान) बनाने की कोई योजना नहीं है। भारतीय वायुसेना के लिए फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट कार्यक्रम स्वदेशी AMCA होगा, जिसके लिए काम पहले ही शुरू हो चुका है।"

यानि, इंडियन एयरफोर्स इस बात को लेकर स्पष्ट है, कि भारत जिस भी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर प्रोग्राम में जाएगा, वो स्वदेशी होगा। भारत किसी भी दूसरे देश के साथ मिलकर, उस देश में विमान के निर्माण के लिए किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा।

यानि, रूस का ये ऑफर भारत के एक प्लान पर तो खरा नहीं उतरता है।

इसके साथ ही, दूसरी बात ये है, कि Su-75 को, रूस के ही Su-57 जिसे नाटो 'फ़ेलोन कहता है, उसका ही एडवांस वर्जन माना जाता है। और भारत ने नेक्स्ट जेनरेशन लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए रूस के साथ पहले भी सहयोग किया था, लेकिन फिर विमान की टेक्नोलॉजी और डिजाइन के ट्रांसफर को लेकर दोनों देश आम सहमति पर नहीं पहुंच पाए। जिसके बाद भारत उस प्रोग्राम से बाहर हो गया, जो मॉस्को के लिए बहुत बड़ा झटका था।

रूस के ऑफर के बारे में कैसे पता चला?

रूस ने भारत के सामने एसयू-75 के लिए दाम घटाने का फैसला किया है, यानि लागत को भारत के अनुकूल बनाने का फैसला किया है, इसके संकेत रूस की सरकारी मीडिया TASS की एक रिपोर्ट में मिलती है। और लागत को कम करने के लिए विमान में कुछ टेक्नोलॉजिकल बदलाव करने की बात कही गई है।

पिछले साल SU-75 का एक एडवांस वेरिएंट का निर्माण किया गया थआ, जिसमें फ्लैपरॉन बड़े साइज के साथ और विंग लीडिंग-एज रूट एक्सटेंशन थोड़े लंबे थे। वहीं, विंग पैनल में भी संशोधन किए गए थे।

इस विमान के पहले के तीन वेरिएंट, सिंगल सीटर फाइट, डबल सीटर फाइटर कॉम्बैट ट्रेनर और तीसरा अनक्रूड एयरक्राफ्ट, जिसे रूसी सरकार के सामने में इंटलेक्च्वल प्रॉपर्टी के तौर पर पेश किया गया था, एडवांस वेरिएंट में इन तीनों से अलग कॉन्फ़िगरेशन था।

सुखोई दावा करता रहा है, कि एसयू-75 पहला विमान है, जिसे पूरी तरह से सुपर कंप्यूटर पर डिजाइन किया गया है। पारंपरिक प्रयोग-आधारित विकास की तुलना में, सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन अपेक्षाकृत कम समय और कीमत में तर्कसंगत डिजाइन के निर्माण का रास्ता खोलता है।

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एसयू-75 चेकमेट या वेपरवेयर?

इन सबके बीच हकीकत ये है, कि रूस फाइटर जेट एसयू-75 अभी तक विदेशी पार्टनर को हासिल नहीं कर पाया है, जिसकी वजह से कंपनी के पास इस विमान के लिए बाहरी फंड का अभाव है, और इसका असर ये है, कि जिस फाइटर जेट का डिजाइन 2020 की शुरूआत में फाइनल हो जाना था, वो अभी तक प्रोटोटाइप के निर्माण की समय सीमा को लगातार बढ़ा रहा है।

पश्चिमी मीडिया ने Su-75 को 'वेपरवेयर' के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया है, क्योंकि विमान अभी तक तैयार नहीं हुआ है।

रूसी समाचार एजेंसी TASS ने रूस की सैन्य और तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा (एफएससीटीसी) के निदेशक दिमित्री शुगायेव के हवाले से कहा, कि एफएससीटीसी चेकमेट परियोजना के हिस्से के रूप में सहयोग पर कुछ विदेशी ग्राहकों के साथ परामर्श कर रहा है। रूसी उद्योग और व्यापार मंत्री डेनिस मंटुरोव ने भी कहा, कि विदेशी ग्राहक लड़ाकू विमान में अपनी रुचि दिखा रहे हैं।

2021 के चेकमेट विज्ञापन वीडियो में अर्जेंटीना, भारत, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम के "पायलटों" को दिखाया गया था, जो रूस के इच्छित बाजारों का संकेत देता है।

रूसी Su-57 या Su-75 को खरीदने के समर्थक इस बात पर प्रकाश डालते हैं, कि IAF की 60 प्रतिशत विमान या विमानों के उपकरण अभी भी रूसी मूल की हैं।

यूक्रेन में रूसी वायुसेना का फ्लॉप शो!

यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में रूसी वायु सेना का प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं रहा है। भारतीय विशेषज्ञ युद्ध पर करीब से नज़र रख रहे हैं, क्योंकि भारत के पास रूसी मूल के बहुत सारे सैन्य हार्डवेयर हैं।

एयर मार्शल खोसला ने कहा, कि "हमें इन सवालों पर भी विचार करने की ज़रूरत है, कि रूसी विमान (एसयू-75) अन्य 5वीं पीढ़ी के विमानों के खिलाफ कितना शक्तिशाली है, खासकर हमारे विरोधियों के पास भी फिफ्थ जेनरेशन विमान है।"

उन्होंने कहा, कि "कुछ हद तक विश्व की भू-राजनीतिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी विचार करने की जरूरत है।" यह सहयोग का एक महत्वपूर्ण पहलू है। चल रहे युद्ध के कारण जो जल्द ही अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश करेगा, रूस को सैन्य पुर्जों का निर्यात करना मुश्किल हो रहा है। इसके सामने लड़ाकू विमान के निर्यात पर क्या असर पड़ेगा यह देखने वाली बात होगी।

क्रेमलिन ने घोषणा की है, कि वह अगले 15 वर्षों में लगभग 300 विमान (एसयू-75) का उत्पादन करेगा और कई प्रोटोटाइप कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर विमान संयंत्र में निर्मित किए जा रहे हैं, जहां सुखोई एसयू-57 का निर्माण किया जा रहा है।

घट रही है भारतीय वायुसेना की ताकत

भारतीय वायुसेना की लड़ाकू ताकत खतरनाक रूप से घट रही है। हालांकि, स्वदेशी विमान के निर्माण पर जोर देने के कारण लड़ाकू विमानों का आयात लटका हुआ है।

भारतीय वायुसेना के पास 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए, लेकिन फिलहाल सिर्फ 31 स्क्वाड्रन ही हैं और इंडियन एयरफोर्स अभी भी मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के लिए लंबे समय से भारत सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है।

चीनी PLAAF (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स) के प्रतिरोध के रूप में पहचाने जाने के लिए IAF को बहुत सारे विमानों की आवश्यकता है। हालांकि, वे (आईएएफ) भारत सरकार को यह समझाने में सक्षम नहीं हो पाए हैं, कि इतनी बड़ी संख्या में आयातित विमानों की आवश्यकता क्यों है? 2024 भारत में चुनावी वर्ष है और अप्रैल में चुनाव से पहले सरकार द्वारा एमआरएफए सौदे को मंजूरी देने की संभावना नहीं है।

अगर चुनाव के बाद सरकार की तरफ से फौरन मंजूरी मिल भी जाती है, तो भी विमान डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया में 6 से 7 साल लगेंगे। तब तक तेजस एमके-2 भी बेड़े में शामिल होने के लिए तैयार हो सकता है। और 'मेक इन इंडिया' पर इस जोर के कारण भारत के 'चेकमेट' के डेवलपमेंट में शामिल होने की संभावना नहीं है।

इसके अलावा, इंडियन एयरफोर्स को अपनी ड्रोन ताकत को भी बढ़ाना है। पिछले साल भारत 3.99 अरब डॉलर की कीमत पर 31 एमक्यू-9बी रीपर खरीदने का फैसला किया है, और कई विशेषज्ञों का कहना है, कि 32 और राफेल लड़ाकू जेट खरीदना भी इंडियन एयरफोर्स के लिए पर्याप्त होगा।

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