AK-47 की 75 सालों की बादशाहत खत्म, रूस ने तैयार किया AK-12, 1 मिनट में चलती हैं 1000 गोलियां

AK-47 यानी Automatic Kalashnikov-47 की 75 सालों की बादशाहत टूटने वाली है। AK हथियारों की सीरिज में अब एक नया नाम जुड़ने जा रहा है। रोस्टेक कंपनी अब AK-12 हथियारों के नए मॉडल का उत्पादन करने जा रही है।

 AK-12 assault rifle

Image: Twitter

AK-47 को अब तक दुनिया का सबसे खतरनाक बंदूक माना जाता रहा है। यह इतना घातक है कि भारत में सिर्फ आर्मी या पुलिस की स्पेशल फोर्स को ही AK-47 का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली हुई है। दुनिया भर के किसी भी हिस्से अपराध हो रहा हो वहां अपराधियों के पास अक्सर यही राइफल देखने को मिलती है। यूं तो AK सीरीज के हर हथियार बेहद घातक माने जाते हैं मगर AK-47 की बात ही कुछ और है। लेकिन अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि AK-47 यानी Automatic Kalashnikov-47 की 75 सालों की बादशाहत टूटने वाली है।

इसी साल से AK-12 होगा उत्पादन

जी हां AK हथियारों की सीरिज में अब एक नया नाम जुड़ने जा रहा है। रोस्टेक कंपनी अब AK-12 हथियारों के नए मॉडल का उत्पादन करने जा रही है। रूस ने कहा है कि वह इस 2023 से कलाशनिकोव AK-12 असॉल्ट राइफल्स के नए मॉडल का उत्पादन शुरू करेगा। रूस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार रोस्टेक डिफेंस कंसोर्टियम ने युद्ध में तैनात सैनिकों से फीडबैक लेकर हथियारों को अपग्रेड करने का काम शुरू किया जो कि अब अपने अंतिम चरण में है। हथियारों का नया बैच अब पूरी तरह से नई तकनीक से अपग्रेड होगा।

चलाने में काफी आसान है AK-12

रोस्टेक के प्रमुख सर्गेई चेमेजोव ने नई मॉडिफाइड रायफल का अनावरण करते हुए कहा कि हम सेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और उनसे लगातार फीडबैक ले रहे हैं। अगर सेना किसी खास तरह के बदलाव को कहती है तो हम वह भी करने को तैयार हैं। रूस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक AK-12 इस्तेमाल में काफी आसान होगा। फिलहाल इससे जुड़े और भी सुधार किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक संशोधन में फायरिंग मोड्स का दो-तरफा नियंत्रण, एडजस्टेबल चीक रेस्ट शामिल हैं।

एके-47 से अधिक सटीक

रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी AK-12 में 5.45 मिमी कैलिबर की गोली लगती है। इस बंदूक पर दूरबीन और टारगेट लेजर लगाने के लिए पिकाटिनी रेल भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बंदूक का वजन 3.3 किग्रा है। एके-12 राइफल 0.945 एमएम लंबी है, जिसके बैरल की लंबाई 415 MM है जो इसे पिछले एक सीरीज के राइफलों की तुलना में अधिक सटीकता और फोर्स प्रदान करता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बंदूक एक मिनट में 1000 गोली फायर कर सकती है। वहीं अगर एके-47 की बात करें तो इससे एक मिनट में राउंड फायर किया जा सकता है।

625 मीटर दूर से भी निशाना

एके-12 राइफल के मैग्जीन में 30 गोलियां लगती हैं जो कि 625 मीटर की दूरी तक निशाने पर मार सकता है। वहीं, AK-47 मीटर में भी 30 गोलियां लगती हैं जिसे 300 मीटर की दूरी तक अचूक निशाना लगाया जा सकता है। AK हथियारों का एक लंबा इतिहास रहा है। दुनिया में 75 लाख से ज्यादा एके हथियारों को इस्तेमाल किया जाता है। इसे सिर्फ सैनिक ही नहीं, बल्कि आतंकी भी इस्तेमाल करते हैं। अफगानिस्तान में सोवियत संघ के हमले के दौरान 1979 में मुजाहिद्दीन इस बंदूक से निकली गोली को 'जहरीली गोलियां' नाम दिया था। इस राइफल को पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बेशुमार लोकप्रियता हासिल है। वहां के आंतकियों के लिए एके-47 पसंदीदा हथियार है।

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