'चीन और भारत सबसे अच्छे सहयोगी', रूस की नई विदेश नीति की घोषणा, भारत का दौरा करेंगे पुतिन?
दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है, कि रूस भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा बढ़ाने, निवेश और तकनीकी संबंधों को मजबूत करने और "अमित्र राज्यों और उनके गठबंधनों के विनाशकारी कार्यों" के प्रतिरोध को सुनिश्चित करेगा।

Russia News Foreign Policy Strategy: यूक्रेन युद्ध के एक साल से ज्यादा बीतने के बाद रूस ने अपनी नई विदेश नीति का ऐलान किया है, जिसमें मुख्य फोकस भारत और चीन को रखा गया है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ सैकड़ों प्रतिबंध लगा रखे हैं, लिहाजा रूस की विदेश नीति में भारत और चीन को अपना सबसे मुख्य सहयोगी बताया गया है। इसके साथ ही, रूस ने कहा है, कि 'भारत के खिलाफ दुश्मन ताकतों का' रूस प्रतिरोध करेगा। हालांकि, इसमें ये साफ नहीं किया गया है, कि भारत के सबसे बड़े दुश्मन चीन को लेकर, भारत के संदर्भ में रूस की नीति क्या होगी।
रूस की नई विदेश नीति
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस की नई विदेश नीति पर दस्तखत कर दिया है और पुतिन द्वारा अपनाई गई नई विदेश नीति रणनीति के मुताबिक, रूस ने विश्व मंच पर भारत और चीन को अपने मुख्य सहयोगियों के रूप में पहचाना है। रूस का ये दस्तावेज 42 पन्नों का है, जिसमें चीन और भारत के साथ संबंधों को अलग-अलग करके देखा गया है। दस्तावेज में कहा गया है, कि "यूरेशियन महाद्वीप पर स्थित शक्तिशाली और संप्रभु ग्लोबल पॉवर्स के साथ संबंधों को अनुकूल किया जाएगा और कॉर्डिनेशन को और गहरा किया जाएगा।" दस्तावेज़ में कहा गया है, कि रूस पारस्परिक रूप से लाभकारी ग्राउंड पर सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और सहयोग को विस्तार देने और द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा बढ़ाने, निवेश और तकनीकी को मजबूत करने पर विशेष फोकस रखते हुए भारत के साथ विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का निर्माण करना जारी रखेगा। इसके साथ ही रूसी दस्तावेज में कहा गया है, कि "भारत के अमित्र राज्यों और उनके गठबंधनों के विनाशकारी कार्यों के प्रतिरोध को सुनिश्चित करना रूस जारी रखेगा।"

पुतिन ने दस्तावेज पर किए दस्तखत
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को घोषणा की है, कि उन्होंने रूस की नई विदेश नीति अवधारणा को अपनाने के लिए एक डिक्री लिखी है। उन्होंने कहा, कि "आज, मैंने रूसी संघ की विदेश नीति के अपडेट कंसेप्ट को मंजूरी देने वाले एक डिक्री पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।" पुतिन ने कहा, कि रूसी विदेश मंत्रालय ने अन्य विभागों के साथ नई विदेश नीति की अवधारणा को आधुनिक वास्तविकताओं के अनुरूप लाने के लिए कड़ी मेहनत की है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने हिस्से के लिए इस बात को रेखांकित किया, कि दस्तावेज़ सीधे तौर पर अमेरिका को दुनिया में रूसी विरोधी राजनीति को मुख्य रूप से भड़काने वाला देश मानता है। उन्होंने कहा, कि रूस की नई विदेश नीति के कंसेप्ट के पीछे का तर्क, अंतरराष्ट्रीय मामलों में क्रांतिकारी बदलाव को दर्शाता है। दस्तावेज में अमेरिका को रूस विरोधी ताकतों का ड्राइवर बताया है, हालांकि ये भी कहा गया है, कि मास्को वाशिंगटन के साथ "शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व" और "हितों का संतुलन" चाहता है।
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ब्रिटेन ने उड़ाया मजाक
यूनाइटेड किंगडम के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FDDO) ने रूस की नई विदेश नीति का मज़ाक उड़ाया है। रूसी विदेश मंत्रालय के ट्वीट का एक स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा गया है, कि "अप्रैल फूल डे कल है।" आपको बता दें, कि यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका से भी ज्यादा रूस का विरोध यूके ने किया है और यूके ने इस महीने यूक्रेन को शक्तिशाली टैंक्स भी भेजे हैं, जिसको लेकर रूस आगबबूला है। वहीं, रूस के दस्तावेज़ में कहा गया है, कि ज्यादातर यूरोपीय राष्ट्र रूस के प्रति एक आक्रामक नीति अपनाते हैं जिसका उद्देश्य रूस की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए ख़तरा पैदा करना है। दस्तावेज में लिखा गया है, कि " अधिकांश यूरोपीय राज्य रूस के प्रति एक आक्रामक नीति अपनाते हैं, जिसका उद्देश्य रूसी संघ की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करना, एकतरफा आर्थिक लाभ प्राप्त करना, घरेलू राजनीतिक स्थिरता को कम करना, पारंपरिक रूसी आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को नष्ट करना और सहयोगियों और भागीदारों के साथ रूस के सहयोग में बाधाएं पैदा करना है।" वहीं, रूस की जी20 शेरपा स्वेतलाना लुकाश ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की है, कि "हम सभी उम्मीद करते हैं, कि राष्ट्रपति पुतिन दोनों शिखर सम्मेलनों में आएंगे। हालांकि, यह अभी तक तय और घोषित नहीं किया गया है और उनके संभावित भारत यात्रा के विवरण को उचित समय पर घोषित किया जाएगा।
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