दोस्ती का दम भरने वाले अमेरिका और रूस को मोदी सरकार पर है शक!
न्यूयॉर्क। भारत के पिछले 50 वर्षों के रणनीतिक साझेदार रहे रूस ने अचानक ही अब अपने रुख को बदल लिया है। पहले के अपने रवैये में बदलाव लाते हुए ही अब रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी स्दस्यता के लिए हामी भर दी है। भारत के साथ ही रूस ने ब्राजील के लिए भी हामी भरी है।

सूत्रों के मुताबिक यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्यों को भारत और मोदी सरकार पर शक है। इसकी वजह से ही वह भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध कर रहे हैं।
अपने एक हफ्ते पुराने फैसले से पलटा रूस
संयुक्त राष्ट्र महासंघ की जनरल एसेंबली की 70 वीं सालगरिह के मौके पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लारोव ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे विकासशील देशों की भी भागीदारी तय होनी चाहिए।
इसलिए रूस भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। अभी एक हफ्ते पहले ही सुरक्षा परिषद में रूस के स्थायी राजदूत विटली चरकिन ने महासभा के अध्याक्ष सैम कुटेसा को एक चिट्ठी लिखकर रूस की ओर से विरोध दर्ज कराया था।
रूस के अलावा चीन और अमेरिका ने भी स्थायी सदस्यता के लिए भारत का विरोध किया था।
अमेरिका और रूस ने दिया धोखा
अभी तक सुरक्षा परिषद में चीन, फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका ही स्थायी सदस्य हैं। यह सभी देश दुनिया यूएन की ओर से अतंराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं। चीन का रुख इस मसले पर पहले से ही मालूम था लेकिन अमेरिका और रूस, जो भारत का अच्छा दोस्त होने का दम भरते हैं और करीबी साझीदार भी हैं, उन्होंने देश की मोदी सरकार को लेकर आशंकाए जताई थीं।
यूएन अधिकारियों की मानें तो यह देश उन्हें मिले एक विशेष दर्जें और उसकी सुविधाओं को अब किसी और देश के साथ साझा नहीं करना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 28 सितंबर को न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति
बराक ओबामा से मिलेंगे तो वह इस मुद्दे को जरूर उठाएंगे। साथ ही दिसंबर में मॉस्को में होने वाले सम्मेलन में भी इसका जिक्र होगा।












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