रूस ने भारत को फिर दिया 'रक्षा का वचन', पुतिन की नई विदेश नीति में ऐलान, 'भारत के दुश्मनों को...'

भारत और रूस पिछले कई दशक से गहरे संबंध में बने हुए हैं और 1971 में पाकिस्तान के साथ जंग में जब अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया था, तब पूरी दुनिया में रूस इकलौता देश था, जो भारत के साथ डटकर खड़ा हो गया था।

Russian foreign policy document

Russian foreign policy document: शुक्रवार को रूस ने अपनी नई विदेश नीति की घोषणा की है, जिसपर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साइन कर दिया है। रूस की इस नई विदेश नीति में भारत को लेकर वही पुरानी दोस्ती की नीति रखी गई है, जिसके तहत रूस ने भारत को रक्षा का वचन दिया था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा अनुमोदित रूसी विदेश नीति दस्तावेज में कहा गया है, कि रूस पारस्परिक रूप से लाभकारी आधार पर सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और विस्तार करने की दृष्टि से भारत के साथ विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का निर्माण करना जारी रखेगा। इस दस्तावेज में कहा गया है, कि रूस हमेशा "भारत के खिलाफ विनाशकारी एक्शन" का प्रतिरोध करेगा।

रूस की नई विदेश नीति में भारत छाया

दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है, कि रूस भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा बढ़ाने, निवेश और तकनीकी संबंधों को मजबूत करने और "अमित्र राज्यों और उनके गठबंधनों के विनाशकारी कार्यों" के प्रतिरोध को सुनिश्चित करने पर विशेष बल देगा। इस दस्तावेज में लिखा गया है, कि रूस भारत को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मदद करना जारी रखेगा। आपको बता दें, कि रूस की नई विदेश नीति का अनावरण उस वक्त किया गया है, जब रूस पिछले एक साथ से ज्यादा वक्त से यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है और अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ भारी आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। अमेरिका और पश्चिमी देश यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं और लगातार यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं, जिसकी वजह से युद्ध की आग और भड़क रही है। वहीं, भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा नहीं की है और भारत लगातार यह कहता रहा है, कि संकट को कूटनीति और बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

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दस्तावेज में चीन और भारत पर विशेष बात

रूसी दस्तावेज में जोर देकर कहा गया है, कि "नई वैश्विक व्यवस्था में ढलने के लिए रूस कई मल्टी फोरम का समर्थन करेगा, जिसमें ब्रिक्स, एससीओ, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAUE), कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट (CIS), कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन( CSTO), RIC (रूस, भारत, चीन) और अन्य अंतरराज्यीय संघों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ-साथ मजबूत भागीदारी करेगा और इन संगठनों के साथ रूस अपनी भागीदारी को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगा। आपको बता दें, कि ये सभी फोरम अमेरिकी वर्चस्व से अलग हैं और रूसी दस्तावेज की पड़ताल करने पर पता चलता है, कि रूस का ध्यान विशेष तौर पर एशिया, और एशिया में भी चीन और भारत पर खास तरह से है और जिन संगठनों में भारत और चीन हैं, उन संगठनों के विकास पर रूस का विशेष ध्यान है, ताकि मल्टीपोलर वर्ल्ड का निर्माण किया जा सके और अमेरिकी वर्चस्व को कम किया जा सके।

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    भारत का दो बार दौर कर सकते हैं पुतिन

    रूस की विदेश नीति दस्तावेज में साफ तौर कहा गया है, कि रूस एससीओ और जी20 शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाएगा। इस साल भारत के पास एससीओ और जी20 की मेजबानी है, लिहाजा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत में एससीओ और जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है और मॉस्को इन मंचों का उपयोग भारत के साथ अपने सहयोग को मजबूत करने के लिए करने की उम्मीद कर रहा है। रूस की जी20 शेरपा स्वेतलाना लुकाश ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की है, कि "हम सभी उम्मीद करते हैं, कि राष्ट्रपति पुतिन दोनों शिखर सम्मेलनों में आएंगे। हालांकि, यह अभी तक तय और घोषित नहीं किया गया है और उनके संभावित भारत यात्रा के विवरण को उचित समय पर घोषित किया जाएगा। लेकिन इन अवसरों को गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि हम इन आयोजनों का उपयोग भारत के साथ अपने सहयोग और हमारी चर्चाओं को और अधिक घनिष्ठ बनाने के लिए भी करना चाहते हैं"। आपको बता दें, कि भारत इस साल जून महीने में एससीओ शिखर सम्मेलन और इस साल सितंबर में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा और अगर इन दोनों शिखर सम्मेलन में व्लादिमीर पुतिन आते हैं, तो ये भारत के लिए बहुत बड़ी कामयाबी होगी।

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