पुतिन के आदेश के बाद रूसी सेना ने शुरू किया परमाणु युद्धाभ्यास, धरती पर प्रलय लाएंगे रूसी राष्ट्रपति?
रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन के आदेश के बाद रूसी नौसेना ने परमाणु हथियारों के साथ बैरेंट्स सी में युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है।
मॉस्को, मार्च 02: यूक्रेन युद्ध अब भीषण विध्वंस की तरफ बढ़ता जा रहा है और रूसी राष्ट्रपति के 'न्यूक्लियर डेटरेंट फोर्स' को अलर्ट होने के के आदेश देने के बाद अब रूस की परमाणु सेना ने युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। रूसी नौसेना ने विध्वंसक परमाणु हथियारों के साथ तबाही मचा देने वाले युद्धाभ्यास को शुरू किया है और अब सवाल उठ रहे हैं, कि क्या रूसी राष्ट्रपति दुनिया में विध्वंस मचाने का मन बना चुके हैं। क्या रूस, पूरी धरती पर प्रलय लाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं?

परमाणु युद्धाभ्यास शुरू
रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन के आदेश के बाद रूसी नौसेना ने परमाणु हथियारों के साथ बैरेंट्स सी में युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है और मोबाइल मिसाइल लांचर मंगलवार को साइबेरिया में बर्फ के जंगलों में घूमते देखे गये है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के परमाणु बलों को यूक्रेन युद्ध के समय अलर्ट पर रखा हुआ है। रूसी नौसेना ने पनडुब्बियों और जमीन से दागे जाने वाले परमाणु मिसाइलों के साथ युद्धाभ्यास किया है और रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी नौसेना के उत्तरी फ्लीट ने बताया है कि, इस युद्धाभ्यास में रूसी नौसेना के कई परमाणु पनडुब्बियों को शामिल किया गया है। चूंकी यूक्रेन के पास परमाणु बम नहीं हैं और रूस को पता है, कि उसके असली दुश्मन कौन हैं, लिहाजा रूसी नौसेना ने परमाणु हथियारों के साथ युद्धाभ्यास किया है, जिसके निशाने पर सीधे तौर पर पश्चमी देश हैं।

नौसेना ने कहा- तूफानी युद्धाभ्यास
रूस के उत्तरी बेड़े ने एक बयान में कहा है कि, उसकी कई परमाणु पनडुब्बियां "तूफानी परिस्थितियों में युद्धाभ्यास को प्रशिक्षित करने" के लिए डिज़ाइन किए गए अभ्यासों में शामिल हुई हैं। नॉर्थ फ्लीट ने कहा कि, उत्तर पश्चिमी रूस के कोला प्रायद्वीप की रक्षा करने वाले कई युद्धपोत युद्धाभ्यास में शामिल हो रहे हैं, जहां कई नौसैनिक अड्डे स्थित हैं। वहीं, रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि, पूर्वी साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में, सामरिक मिसाइल बलों की इकाइयों ने यार्स इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए जंगलों में युद्धाभ्यास किया है। हालांकि, रूसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया है कि, क्या परमाणु हथियारों के साथ युद्धाभ्यास देश की सामान्य परमाणु प्रशिक्षण गतिविधियों में क्या कोई बदलाव का प्रतिनिधित्व भी करता है?
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सभी परमाणु हथियारों पर आदेश लागू
रूस के राष्ट्रपति का आदश रूस के सभी परमाणु हथियारों पर लागू होता है, जिसमें अमेरिका की तरह ही इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस परमाणु पनडुब्बियां पर भी रूसी राष्ट्रपति का आदेश लागू होता है और उन्हें भी युद्ध के दौरान अलर्ट रहने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही जमीन आधारित- आईएसबीएम और परमाणु बम बरसाने वाले विमानों को भी अलर्ट जारी किया गया है। आपको बता दें कि, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के पास अब तक दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागार हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पुतिन के न्यूक्लियर फोर्स को अलर्ट रहने के आदेश को ‘अनावश्यक' करार दिया है और अमेरिका ने अभी तक अपने न्यूक्लियर फोर्स को अलर्ट रहने के लिए नहीं कहा है और इसके पीछे का मतलब यह निकाला जा रहा है, कि शायद ‘अभी तक यह स्पष्ट नहीं है, कि रूसी राष्ट्रपति के आदेश का क्या मतलब था'।

हमेशा तैयार रहते हैं रूसी-अमेरिकी न्यूक्लियर फोर्स
आपको बता दें कि, रूस और अमेरिका के पास जमीन आधारित और पनडुब्बी आधारित अलग अलग तरह के परमाणु हथियार हैं, जो युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। लेकिन, परमाणु बम बरसाने वाले विमान और युद्धक विमान हमेशा तैयार नहीं रहते हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें युद्ध की तैयारी करने के लिए कहा जाता है। वहीं, अमेरिका की तुलना में, रूस अपने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों पर ज्यादा निर्भर रहता है, जो न्यूक्लियर साइलो में रखा रहता है या फिर मोबाइल लॉन्चर में लगे रहते हैं। वहीं, उनकी तैयारी की स्थिति में बदलाव का पता लगाना और उसका आकलन करना अधिक कठिन हो सकता है। पुतिन के न्यूक्लियर फोर्स को अलर्ट पर रहने के आदेश देने के बाद मॉस्को और अमेरिका के बीच काफी तनाव बढ़ा हुआ है और एक्सपर्ट्स इस स्थिति की तुलना 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट से कर रहे हैं, जिसने मॉस्को और वाशिंगटन को परमाणु संघर्ष के कगार पर ला खड़ा किया था।

रूस को भड़का रहा है नाटो
रूसी राष्ट्रपति बार बार नाटो को अपने आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और न्यूक्लियर फोर्स को अलर्ट रखने के पीछे भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने नाटो शक्तियों के "आक्रामक बयानों" का हवाला दिया है, जिसने रूस के खिलाफ ‘अपंग' बनाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किया है और रूस के मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया है। रूसी अर्थव्यवस्था के लिए पश्चिमी देशों के प्रतिबंध विनाशकारी परिणाम लाने के लिए काफी हैं और बीबीसी के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति ने साफ किया है कि, अगर रूस नहीं रहेगा, तो फिर ये पृथ्वी भी नहीं रहेगी और एक्सपर्ट्स का मानना है कि, रूसी राष्ट्रपति के लिए ये जंग... काफी अलग मायने ले चुका है, लिहाजा अमेरिका और नाटो देशों को चाहिए, कि वो रूस को भड़काना बंद करे और यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की जिद खत्म करे।

रूस करेगा करारा पलटवार
वहीं, रूस की सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख दिमित्री मेदवेदेव, जो रूस के पूर्व राष्ट्रपति भी रह चुके हैं, उन्होंने मंगलवार को फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ले मायेर से हुई बातचीत के बाद कहा कि, यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ एक चौतरफा आर्थिक और वित्तीय "युद्ध" शुरू किया है। उन्होंने कहा कि, "आज, कुछ फ्रांसीसी मंत्री ने कहा है कि उन्होंने रूस पर आर्थिक युद्ध की घोषणा की''। साल 2008 से 2012 तक रूस के राष्ट्रपति रह चुके मेदददेव ने धमकी देते हुए कहा कि, ‘'यह नहीं भूलना चाहिए, कि मानव इतिहास में आर्थिक युद्ध कभी कभी वास्तविक युद्धों में भी बदल जाते हैं''।

परमाणु युद्ध: भीषण तबाही की आशंका
आपको बता दें कि परमाणु हमले से दुनिया इस वक्त इसीलिए अधिक डरी हुई है, क्योंकि अभी तक इतिहास में एक ही परमाणु अटैक हुआ है, अमेरिका ने किया था। 77 साल पहले अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिराए थे। 6 अगस्त को हिरोशिमा में तो वहीं 9 अगस्त को नागासाकी में न्यूक्लियर अटैक हुआ था। ऐसे दावे किए जाते हैं कि हिरोशिमा में करीब 80 हजार और नागासाकी में करीब 70 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। उस अटैक का जापान पर इतना घातक असर हुआ कि वहां जन्म लेनी वाली कई पीढ़ियां विकलांग पैदा हुईं। ऐसे में आज के समय में रूस के पास मौजूद परमाणु बम अमेरिका के परमाणु बमों से बहुत अधिक घातक हैं, जो दुनिया में तबाही मचा सकते हैं।












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