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रूस के पास सबसे अधिक एटम बम, पुतिन के अलावा ये 2 रूसी दुनिया को कई बार कर सकते हैं तबाह

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी देकर सनसनी मचा दी है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका अपने सैनिकों को यूक्रेन में भेजेगा तो इससे जंग और बढ़ सकती है।

दरअसल, रूसी न्यूज एजेंसी RIA ने पुतिन ने सवाल पूछा कि क्या रूस परमाणु जंग के लिए तैयार है। तो जवाब में रूसी राष्ट्रपति ने कहा, हम फिलहाल परमाणु युद्ध की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं। हमें अब तक इसकी जरूरत नहीं महसूस हुई। लेकिन अगर मिलिट्री या तकनीक के आधार पर कहा जाए तो हम इसके लिए तैयार हैं।

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पुतिन ने आगे कहा कि अमेरिका इस बात को समझता है कि अगर उसने रूसी या यूक्रेन में अमेरिकी सैनिकों को भेजा तो रूस इस कदम को हस्तक्षेप के रूप में लेगा। हमारे पास परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के लिए ही मौजूद हैं। हालांकि, इनके इस्तेमाल को लेकर रूस के अपने सिद्धांत हैं।

पुतिन की परमाणु युद्ध की चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब पश्चिम ने यूक्रेन पर बातचीत के लिए एक और प्रस्ताव दिया है। अमेरिका का कहना है कि पुतिन यूक्रेन पर गंभीर बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं।

रूस के पास कितने परमाणु हथियार?

आपको बता दें कि रूस के पास परमाणु हथियारों का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (एफएएस) के अनुसार, पुतिन लगभग 5,580 परमाणु हथियारों को नियंत्रित करते हैं।

एफएएस के अनुसार, उनमें से लगभग 1,200 रिटायर हो चुके हैं, लेकिन काफी हद तक काम के हैं। इसके अलावा बाकी के लगभग 4,380 परमाणु हथियार लंबी दूरी के रणनीतिक लांचरों और कम दूरी के सामरिक परमाणु बलों द्वारा उपयोग किए जा सकते हैं।

एफएएस ने कहा कि इन हथियारों में से 1,710 परमाणु हथियार तैनात हैं। इनमें से लगभग 870 भूमि-आधारित बैलिस्टिक मिसाइलों पर, लगभग 640 पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों पर, और संभवतः 200 भारी बमवर्षक ठिकानों पर तैनात हैं। ये मामलू संख्या नहीं है... इसका मतलब है कि इन हथियारों से रूस, दुनिया को कई बार नष्ट कर सकता है।

रूस के पास सबसे अधिक एटम बम

शीत युद्ध के दौरान, सोवियत संघ के पास लगभग 40,000 परमाणु हथियार थे, जबकि अमेरिका के पास ये लगभग 30,000 करीब था। रूस का परमाणु सिद्धांत 2020 कहता है कि अगर रूस पर परमाणु या दूसरे ऐसे हथियारों से हमला किया गया, जिससे तबाही मच सकती है तो रूस परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सकता है।

इससे पहले नंबवर में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) से बाहर हो गया था। 1996 में अपनाई गई ये संधि दुनिया में कहीं भी परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लगाती है। इस संधि में रूस भी शामिल था। आपको बता दें कि सोवियत काल के बाद रूस ने परमाणु परीक्षण नहीं किया है।

रूस ने नहीं किया है परमाणु परीक्षण

आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के अनुसार, 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद से, केवल कुछ ही देशों ने परमाणु हथियारों का परीक्षण किया है। अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परीक्षण किया था। फ्रांस ने 1996 में, भारत और पाकिस्तान ने 1998 में और सबसे आखिरी बार 2017 में उत्तर कोरिया ने ये परीक्षण किया था। सोवियत संघ ने आखिरी बार 1990 में परीक्षण किया था।

व्यापक परमाणु-परीक्षण प्रतिबंध संधि पर 1996 में रूस द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे और 2000 में इसकी पुष्टि की गई थी। अमेरिका ने 1996 में संधि पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

आपको बता दें कि रूसी राष्ट्रपति रूसी परमाणु हथियारों के उपयोग पर अंतिम निर्णय लेते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक परमाणु ब्रीफ़केस जिसे "चेगेट" (काकेशस पर्वत में माउंट चेगेट के नाम पर) कहा जाता है, हमेशा रूसी राष्ट्रपति के पास रहता है।

माना जाता है कि रूसी रक्षा मंत्री जो कि वर्तमान में सर्गेई शोइगु हैं और जनरल स्टाफ के प्रमुख जो कि वर्तमान में वालेरी गेरासिमोव हैं, उनके पास भी ऐसे ब्रीफकेस हैं। इस ब्रीफकेस के द्वारा रूसी राष्ट्रपति अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ जुड़े रहते हैं।

चंद मिनट में दुनिया तबाह!

यदि रूस को लगता है कि उसे रणनीतिक परमाणु हमले का सामना करना पड़ रहा है, तो राष्ट्रपति, ब्रीफकेस के माध्यम से, परमाणु कोड रखने वाले जनरल स्टाफ कमांड और रिजर्व कमांड इकाइयों को सीधा लॉन्च आदेश भेज सकते हैं। इस तरह के आदेश तेजी से विभिन्न संचार प्रणालियों को रणनीतिक रॉकेट बल इकाइयों तक पहुंचाते हैं, जो तुरंत किसी भी देश पर हमला कर सकते हैं।

यदि परमाणु हमले की पुष्टि हो जाती है, तो पुतिन अंतिम उपाय के रूप में तथाकथित "डेड हैंड" या "पेरिमीटर" प्रणाली को सक्रिय कर सकते हैं। इस सिस्टम के सक्रिय होते ही रूस के विशाल शस्त्रागार से परमाणु हमले होने शुरू हो जाएंगे।

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