भारत ने मदद नहीं की तो बर्बाद हो जाएगा रूस! जानिए इसके पीछे की वजह
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भारत और चीन पर और भी अधिक निर्भर रहने की जरूरत पड़ सकती है। यूरोपीय संघ द्वारा रूसी तेल पर यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो रूस के पास इन दोनों देशों के सिवाय दूर-दूर तक अन्य कोई विकल्प
मास्को, 1 जूनः रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भारत और चीन पर और भी अधिक निर्भर रहने की जरूरत पड़ सकती है। यूरोपीय संघ द्वारा रूसी तेल पर यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो रूस के पास इन दोनों देशों के सिवाय दूर-दूर तक अन्य कोई विकल्प नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि एशिया में कुछ ही ऐसे खरीदार हैं जो कच्चे तेल की किस्मों को संसाधित करने में सक्षम हैं।

रूस को 10 अरब डॉलर का नुकसान
यूरोपीय संघ के नेताओं ने रूसी कच्चे तेल पर आंशिक प्रतिबंध लगाने पर सहमति व्यक्त की है और निर्यात की वजह से होने वाले राजस्व में आयी भारी कमी से जूझ रहे पुतिन को इससे प्रति वर्ष 10 अरब डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे रूस के प्रमुख यूराल क्रूड को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यूराल क्रूड एक तेल ब्रांड है जो यूरोप में काफी लोकप्रिय था, लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस को अब इसके लिए एक नए खरीदार की जरूरत है।

बाकी एशियाई देशों के पास तकनीक नहीं
हालांकि यूराल क्रूड को खरीदने के लिए एशिया में इसके कुछ ही खरीदार मौजूद होंगे। इसके पीछे की मुख्य वजह ये है कि श्रीलंका, इंडोनेशिया जैसे देशों में ऐसे तेल को बड़ी मात्रा में आसानी से परिष्कृत नहीं किया जा सकता है, क्योंकि अत्यधिक सल्फ्यूरिक किस्म के तेल को संभालने के लिए उनके पास परिष्कृत प्रसंस्करण और सम्मिश्रण क्षमता नहीं है।

रिकॉर्ड मात्रा में कर रहे खरीदारी
ऐसे हालात में चीन और भारत पर रूस की निर्भरता काफी बढ़ सकती है क्योंकि इन दोनों देशों के पास अतिरिक्त बैरल लेने के लिए यूराल को संसाधित करने वाली रिफाइनरियां हैं। हालांकि, चीन और भारत कितना तेल खरीद सकते हैं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी क्योंकि संभव है कि इस पर एक सीमा लगायी जाए। दोनों देश पहले से ही रूसी तेल की रिकॉर्ड मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

2022 के अंत तक रूसी तेल होगा बैन
इससे पहले यूक्रेन पर हमला करने की वजह से यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ सबसे बड़ा कदम उठाते हुए 2022 के अंत तक रूसी तेल के अधिकांश आयात को बैन करने का निर्णय लिया है। यूरोपीय नेताओं ने रूस से किए जाने वाले 90 फीसदी तेल आयात को रोकने का फैसला लिया है। इस फैसले को अगले छह महीनों में लागू कर दिया जाएगा।

रूस पर प्रतिबंध लगाना एख मुश्किल फैसला
गौरतलब है कि यूरोप तेल की अपनी 25 फीसदी जरूरत और प्राकृतिक गैस की 40 फीसदी जरूरत के लिए रूस पर निर्भर है। ऐसे में उनके लिए अधिकांश तेल आयात पर प्रतिबंध लगाना बेहत मुश्किल फैसला था। रूस से सटे कुछ यूरोपीय देश जिसमें हंगरी भी शामिल था, अपनी ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के लिए रूस पर काफी हद तक आश्रित थे। ऐसे में यूरोपीय संघ द्वारा इन देशों को मनाना बेहद मुश्किल रहा होगा।












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