आतंकी संगठन कोकेशियान अमीरात क्या है, जिसने रूस में यहूदियों पर किया हमला, क्या पुतिन कर पाएंगे चीनी इलाज?
Russia church-synagogue attack: दागेस्तान रूसी संघ के 21 गणराज्यों में से एक है- क्रीमिया को छोड़कर जिसे रूस ने 2014 में अपने कब्जे में ले लिया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अभी तक मान्यता नहीं दी है। लेकिन, दागेस्तान रूस के उत्तरी काकेशस क्षेत्र के पांच मुख्य गणराज्यों में से एक है, जहां सबसे ज्यादा आबादी रहती है।
लेकिन, पिछले दो दशकों से दागेस्तान इस्लामिक आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। रूस ने इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने की काफी कोशिशें की हैं, लेकिन पिछले दो महीने में हुए दूसरे भीषण हमले ने साफ कर दिया है, कि पुतिन को कोई खास कामयाबी नहीं मिली है।

दागेस्तान में आतंकवाद की गहरी जड़ें
दागेस्तान, लंबे अर्से से आतंकवाद का दूसरा केन्द्र रहे चेचन्या की सीमा से सटा हुआ इलाका है, जो वर्षों से जिहादी विद्रोह का सामना कर रहा है। दागेस्तान, इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा रखने वाले आतंकवादी नेताओं का केंद्र रहा है। हालांकि, चेचन्या विद्रोह को रूस कुचल चुका है, लेकिन दागेस्तान में अभी तक कामयाबी नहीं मिल रही है।
आतंकवादियों ने इस बार माखचकाला शहर को निशाना बनाया है, जो यहूदी समुदाय का घर माना जाता है और ये हमला उस वक्त किया गया है, जब यहूदी समुदाय अपना एक त्योहार मना रहा था। हालांकि, अभी तक आतंकवादियों की पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन दागेस्तान अतीत में इस्लामी हमलों का केन्द्र रहा है।
कोकेशियान अमीरात क्या है?
2015 की ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट में कहा गया है, कि रूसी सुरक्षा बल, इस्लामी आतंकवादी समूहो, जिसमें ISIS सबसे ऊपर है, उसकी एक शाखा 'कोकेशियान अमीरात' से जूझ रहा है। इन इस्लामिक संगठनों ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के प्रति निष्ठा की शपथ लेने से पहले कोकेशियान अमीरात से जुड़े होने की घोषणा की थी।
रूस के सुप्रीम कोर्ट ने कोकेशियान अमीरात और आईएस दोनों को "आतंकवादी" संगठन के रूप में प्रतिबंधित कर दिया है। लेकिन, इस आतंकी संगठन ने रूस के अधिकारियों, कानून प्रवर्तन और सुरक्षा बलों और नागरिकों के खिलाफ कई घातक हमले किए हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है, कि दागेस्तान में आतंकवाद के उदय को दो व्यापक मान्यताओं के बीच टकराव के रूप में देखते हैं- एक सूफीवाद, जो स्थानीय परंपराओं को सम्मिलित करते हुए समन्वित रूप में इस्लाम का अनुसरण करता है, और दूसरा सलाफीवाद, जो सुन्नी इस्लाम की उसी कठोर व्याख्या को फॉलो करता है, जिसे ISIS भी फॉलो करता है।
इसके अलावा, मौजूदा समय में गाजा में इजराइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध ने भी मौजूदा समय में यहां के चमरपंथियों को उकसाया है।
मुख्य रूप से मुस्लिम गणराज्य, दागेस्तान रूस के सबसे गरीब हिस्सों में से एक है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, काकेशस अमीरात और इस्लामिक अमीरात ऑफ काकेशस ने 2007 से 2017 के बीच दागेस्तान और पड़ोसी रूसी गणराज्यों चेचन्या, इंगुशेतिया और काबर्डिनो-बलकारिया में कई हमले किए। रूस ने इन हमलों के लिए इस्लामिक स्टेट को दोषी ठहराया और अपनी धरती पर उन्हें खत्म करने की कसम खाई है।
हालांकि, यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद, कहानी बदल गई है। उदाहरण के लिए, जब मार्च में मॉस्को के पास क्रोकस सिटी हॉल स्थल पर आतंकी हमला हुआ, तो रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन और पश्चिम पर हमले का दोष मढ़ दिया। उन्होंने आतंकी हमले के लिए अपने वर्तमान "दुश्मनों" को दोषी ठहराया, जबकि इस्लामिक स्टेट ने आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। उस हमले में 135 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
उस समय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस बात पर जोर दिया था, कि उनका देश "इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आतंकवादी हमलों का लक्ष्य टारगेट नहीं बन सकता।"
रूस, आतंकवाद को समस्या मानता भी है या नहीं?
अप्रैल महीने नें, रूस की घरेलू सुरक्षा सेवा, FSB ने मास्को के एक आराधनालय पर हमला करने की IS की साजिश को नाकाम करने की रिपोर्ट दी थी। इसने मास्को में मार्च में हुए हमले के बाद दागेस्तान में भी छापेमारी की थी।
रूस की समाचार एजेंसी TASS ने बताया, कि FSB ने दागेस्तान में विदेशियों के एक आतंकवादी सेल के सदस्यों को हिरासत में लिया था, जिन्होंने क्रोकस सिटी हॉल पर हमला करने वाले आतंकवादियों को फंडिंग की थी और उन्हें हथियार मुहैया करवाए थे। ये ही वो आतंकवादी थे, जो एक और रूसी शहर कास्पिस्क पर भी आतंकवादी हमले की तैयारी कर रहे थे।
FSB की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया था, "31 मार्च को रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) की दागेस्तान गणराज्य की शाखा ने चार विदेशी नागरिकों से मिलकर बने एक आतंकवादी सेल की गतिविधि को दबा दिया था, जो कास्पिस्क में एक सार्वजनिक स्थान पर आतंकवादी हमले की साजिश रच रहे थे।"
TASS ने FSB प्रेस कार्यालय के हवाले से कहा, "यह भी साबित हुआ है, कि हिरासत में लिए गए आतंकवादी 22 मार्च को मॉस्को के उपनगर में क्रोकस सिटी हॉल संगीत स्थल पर हुए आतंकवादी हमले के अपराधियों को वित्तपोषण और आतंक के साधन उपलब्ध कराने में सीधे तौर पर शामिल थे।"
FSB ने कहा, कि "अपराधियों ने स्थान की तलाश की, एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण बनाया और दागेस्तान में ऑटोमेटिक हथियार हासिल किए।" प्रेस रिलीज में कहा गया, कि आतंकवादी हमले के तुरंत बाद, उन्होंने रूस छोड़ने की योजना बनाई थी।
क्या चीन वाला इलाज करेगा रूस?
आशंका जताई जा रही है, कि आने वाले वक्त में रूस पर और भी आतंकी हमले हो सकते हैं, तो क्या आतंकवाद को जड़ से कुचलने के लिए पुतिन, शी जिनपिंग की नीति अपनाएंगे?
ऐसा इसलिए, कि एक वक्त चीन का शिनजियांग क्षेत्र भी आतंकवाद से प्रभावित था, लेकिन शी जिनपिंग ने सत्ता में आने के बाद शिनजियांग में इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से कुचल दिया है। हजारों कट्टरपंथी सोच वाले लोगों को कैंप में रखा गया है। शिनजियांग की मस्जिदों में विदेशी फंडिंग को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है और चीन में इस्लाम की चीनी व्याख्या की गई है।
हालांकि, भारत जैसे देशों में ये कार्रवाई संभव नहीं है, क्योंकि यहां चीन जैसी सख्त कार्रवाई होने पर दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन और लिबरल्स चीखें मारकर रोने लगेंगे, लेकिन रूस को मानवाधिकार जैसी बातों की कोई खास परवाह नहीं है और अगर वो ठान ले, तो जिस तरह से चेचन्या में उसने आतंकवाद का खात्मा किया, उसी तरह से दागेस्तान में भी वो इस्लामिक आतंकवाद का नामो-निशान मिटा सकता है।












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