चीन की मदद से हमास ने फेल किया इजरायल का सुरक्षा तंत्र! रूस और ईरान ने भी की फिलिस्तीन की मदद?
शनिवार की सुबह फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर अचानक हमला किया और हजारों मिसाइल अटैक कर दुनिया को चौंका दिया। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि इजरायल भी ऐसे किसी हमले का सामना कर सकता है।
हमले को जहां इजरायली इंटेलीजेंस एजेंसी मोसाद के लिए बड़ी असफलता करार दिया जा रहा है तो वहीं अब उसके एयर डिफेंस सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस बीच खुफिया एजेंसियों ने इजराइल पर किए गए बड़े हमले में रूस, चीन और ईरान की संलिप्तता की आशंका जाहिर की है।

आकलन में कहा गया है कि ईरान, हमास को खुला प्रशिक्षण और राजनीतिक समर्थन प्रदान करता है, वहीं रूस, हमास से निकटता के लिए जाना जाता है वहीं माना जा रहा है कि चीनी तकनीक के बिना इजराइल में इतना घातक हमला संभव नहीं था।
बड़ा सवाल यह उभर रहा है कि इजराइल के सहयोगी खुफिया जानकारी देने में कैसे विफल रहे। सूत्रों ने कहा कि यह देखते हुए कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के हर जगह एजेंट हैं, फिलिस्तीन के किसी इलाके में एक साथ हजारों रॉकेट जमा करना असंभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले को पूरी साजिश के साथ अंजाम दिया गया है। पिछले काफी समय से इस हमले की तैयारी की जा रही थी। जानकारों की मानें तो हमले में कई देश शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बातें बहुत ही संदिग्ध हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि सभी अलर्ट सिस्टम एक साथ काम करना बंद कर देते हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक सिस्टम को विफल करने के लिए एक चीनी ट्रोजन का उपयोग किया गया ताकि वे सभी इजरायल में प्रवेश कर सकें।
इजराइल में बार-बार साइबर सुरक्षा उल्लंघन के मामले सामने आए हैं, लेकिन हालिया उल्लंघन ने सभी को चौंका दिया है। इस हमले से ठीक एक दिन पहले यानी 6 अक्टूबर को ही माइक्रोसॉफ्ट की डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट आई थी।
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इजरायल, यूक्रेन और दक्षिण कोरिया के अलावा ताइवान चीनी हैकर्स के निशाने पर रहा है। इन देशों में पिछले साल जमकर साइबर अटैक्स हुए हैं। कई साइबर हमलों से पता चलता है कि चीन, बड़े पैमाने पर इजरायल के खिलाफ काम कर रहा है।
कुछ वीडियो में दिख रहा है कि हमास के लड़ाके पैराशूट के माध्यम से इजराइल में प्रवेश कर रहे हैं। ये ट्रेंड पैराट्रूपर बताए जा रहे हैं। क्या गाजा पट्टी के किसी इलाके में ये सुविधा है कि इन्हें इसकी ट्रेनिंग दी जा सके।
जाहिर है कि इन्हें किसी और देश में ऐसी ट्रेनिंग दी गई थी। क्यूंकि फिलिस्तीन में ऐसी ट्रेनिंग चले और इजराइयल को पता न चले ऐसा मुमकिन नहीं लगता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इजरायल में एक साथ 5000 रॉकेट्स हमला कैसे कर सकते हैं। इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम की असफलता भी सबको चौंकाने वाली है। इसे इजरायल का रक्षा कवच भी कहा जाता है।
साल 2014 में आई सुरक्षा फर्म साइबर इंजीनियरिंग सर्विसेज (सीईएस) की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी हैकर्स इस सिस्टम को हैक करने में माहिर हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि 10 अक्टूबर 2011 और 13 अगस्त 2012 के बीच चीनी हैकर्स ने इस सिस्टम से जुड़ी कई टेक्नोलॉजी को चुरा लिया था।
रिपोर्ट में सिक्योरिटी रिसर्चर ब्रायन क्रेब्स के हवाले से लिखा गया था कि चीनी हैकर्स ने 700 से ज्यादा अधिक फाइलें चुरा ली थीं। इसके पीछे सरकारी मदद वाले चीनी हैकिंग कमेंट क्रू हैकिंग ग्रुप को जिम्मेदार माना गया था। अब इस नए युद्ध के बाद सबका ध्यान फिर से उसी हैकिंग की तरफ जा रहा है।
इस हमले के पीछे हमास का एक और व्यापक उद्देश्य अरब देशों और इज़राइल के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के समझौते को कमजोर करना हो सकता है। इन वार्ताओं को विफल करना हमास के प्रमुख समर्थक ईरान और उसके सहयोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण वरदान होगा।












Click it and Unblock the Notifications