रुपया और टका को लेकर अहम फ़ैसला, फ़ायदा बांग्लादेश या भारत को?
Rupee: बांग्लादेश बैंक के कार्यकारी निदेशक और प्रवक्ता मेजबाऊल हक़ ने संकेत दिया है कि इसमें कम से कम छह महीने का समय लग सकता है.
बांग्लादेश और भारत ने द्विपक्षीय व्यापार डॉलर के बदले रुपए में करने का फ़ैसला किया है. बांग्लादेश बैंक ने यह जानकारी दी है.
डॉलर की क़ीमत में उतार-चढ़ाव के आधार पर ही दोनों देशों की मुद्रा की क़ीमत तय होगी. इस प्रक्रिया के काम करने के तरीक़े पर दोनों देशों के बैंकों को समझौता करना होगा.
यही वजह है कि रुपए में कारोबार की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं होगी. बांग्लादेश बैंक के कार्यकारी निदेशक और प्रवक्ता मेजबाऊल हक़ ने संकेत दिया है कि इसमें कम से कम छह महीने का समय लग सकता है.
उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "हमने सैद्धांतिक रूप से सहमति दे दी है. इसकी तमाम प्रक्रिया चल रही है. अगर बैंकों को लगता है कि सब कुछ ठीक ठाक है तो वह इस कार्यक्रम को शुरू करेंगे. इसके शुरू होने के बाद ही सुविधा और दिक्क़त समझ में आएगी."
व्यापारियों और नियमित यात्रियों का दावा है कि टका और रुपए में व्यापार होने की स्थिति में दोनों देशों को लाभ होगा.
लेकिन विश्लेषकों की राय में बांग्लादेश और भारत के बीच व्यापार घाटा ज़्यादा होने के कारण रुपए में लेन-देन में बांग्लादेश को ख़तरा हो सकता है.
शोध संस्थान सेंटर फोर पॉलिसी डायलॉग के शोध निदेशक खांदकर गोलाम मुअज्जम ने बीबीसी बांग्ला से कहा, "रुपए को वैश्विक मुद्रा के तौर पर स्वीकृति नहीं मिली है, इसलिए डॉलर के मुक़ाबले भारतीय मुद्रा की क़ीमत में बार-बार उतार-चढ़ाव आएगा, जिसका असर बांग्लादेश के साथ लेन-देन पर पड़ेगा."
किस तरीक़े से होगा लेन-देन?
रूस-यूक्रेन युद्ध के असर से अमेरिकी डॉलर की क़ीमत में काफ़ी तेज़ी के कारण बांग्लादेश और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है. ज़्यादा क़ीमत देकर भी डॉलर हासिल करना मुश्किल है.
ऐसी स्थिति में डॉलर पर दबाव कम करने के लिए ढाका और दिल्ली सीधे टका और रुपए के ज़रिए आयात-निर्यात पर विचार कर रहे हैं.
अपनी मुद्रा में लेन-देन की यह पहल एक दशक पहले ही की गई थी. लेकिन उस समय विभिन्न जोखिमों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर अमल नहीं हुआ.
बीते साल दिसंबर में दोनों देशों के मंत्री स्तर की बैठक में रुपए में वाणिज्यिक लेन-देन करने का प्रस्ताव उठा था. मार्च में बांग्लादेश की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी.
इस मुद्दे पर बातचीत के लिए बीते 11 अप्रैल को भारत का एक प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश के दौरे पर आया था. उसके सदस्यों ने बांग्लादेश के बैंकरों के साथ बैठक में टका और रुपए में वाणिज्यिक लेन देन के तरीक़ों पर विचार-विमर्श किया था.
बांग्लादेश बैंक के मुताबिक़, पायलट प्रोग्राम के तौर पर प्राथमिक तौर पर चार बैंकों के ज़रिए यह लेन-देन चालू होगा. इनमें बांग्लादेश का सोनाली बैंक और ईस्टर्न बैंक और भारत का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई शामिल हैं.
भारत के दोनों बैंक इसके लिए बांग्लादेश के दो बैंकों में खाता खोलेंगे. इसी तरह बांग्लादेश के दोनों बैंक इन भारतीय बैंकों में खाता खोलेंगे. नतीजतन लेन-देन के लिए स्थानीय मुद्रा को डॉलर में नहीं बदलना होगा. इसकी विनिमय दर सीधे टका से रुपया या रुपए से टका होगी.
इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश से भारत आने वाले या भारत से किसी वस्तु का आयात करने वाले उन बैंकों की ओर से तय दर के मुताबिक़ टका (बांग्लादेशी मुद्रा) जमा कर सकेंगे. इसी तरह कोई भी भारतीय बांग्लादेश के दौरे या बांग्लादेश से आयात की स्थिति में भारतीय रुपए में क़ीमत जमा कर सकेगा.
व्यापारियों को उम्मीद है कि भारत के साथ आपसी व्यापार के मामले में इस तरीक़े के लागू होने पर काफ़ी कम समय में लेनदेन करना संभव होगा.
भारत बांग्लादेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अब्दुल मतलूब अहमद बताते हैं, "व्यापारी अपनी इच्छा के मुताबिक़ टका या रुपया किसी भी मुद्रा में लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) खोल सकते हैं. भारत के मुख्य निर्यातकर्ता देश होने के कारण रुपए में एलसी खोलने पर विनिमय दर में भिन्नता कम होती है. डॉलर के बदले भारतीय रुपए में लेनदेन करने पर निर्यात खर्च कुछ हद तक बचत होगी."
विश्लेषकों को जोखिम की आशंका
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के आपसी व्यापार में बांग्लादेश घाटे में है. ऐसे में रुपए और टका में लेन-देन का प्रस्ताव सैद्धांतिक रूप से ठीक लगने के बावजूद इससे भारत को फ़ायदा होगा और बांग्लादेश के लिए ख़तरा हो सकता है.
अर्थशास्त्री खांदकर गोलाम मुअज्जम के मुताबिक़, भारत में ऐसी कई चीज़ें हैं, जिसके लिए उसे दूसरे देशों से डॉलर में क़ीमत चुका कर कच्चे माल का आयात करना पड़ता है. वैसी वस्तुओं के निर्यात की स्थिति में निर्यातकर्ता ज़्यादा क़ीमत तय कर सकते हैं.
मुअज्जम मानते हैं कि इससे बांग्लादेश के व्यापारियों के लिए यह लेन-देन जोखिम भरा हो जाएगा.
ऐसे में यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है कि डॉलर संकट के कारण जिस मक़सद से भारतीय मुद्रा में लेनदेन की बात कही जा रही है कि वह आख़िर में बांग्लादेश के व्यापारियों के लिए मुनाफ़े का सौदा होगा या नहीं.
मुअज्जम को अंदेशा है कि एक बार रुपए-टका में लेनदेन शुरू करने पर एक स्तर पर पहुंचने के बाद वह एकपक्षीय मुद्रा या रुपया-आधारित विनिमय ढांचे में बदल सकता है.
ऐसा होने की स्थिति में बांग्लादेश पर ज़्यादा दर पर भारतीय मुद्रा के इस्तेमाल का दबाव बढ़ेगा. इस बारे में मुअज्जम का कहना है, व्यापार घाटे की स्थिति में लेनदेन शुरू करने पर भारत पर निर्भरता बढ़ सकती है.
बांग्लादेश में मांग के मुकाबले 12 से 13 फ़ीसदी रुपया है. ऐसी स्थिति में भारत से क़र्ज़ लेकर या दूसरे देशों के साथ व्यापार में कटौती कर या फिर डॉलर को रुपए में बदलकर इस व्यापार को जारी रखने की प्रवृत्ति देखने को मिलेगी.
तब पता चलेगा कि भारत के क़र्ज़ के ब्याज का दबाव रहेगा और डॉलर को बदलने पर नुक़सान होगा. वे कुल मिला कर दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर स्थानीय मुद्रा में व्यापार को वैसा सुअवसर नहीं मानते.
उनको आशंका है कि रुपए-टका में व्यापार एक बार शुरू होने की स्थिति में यह सिर्फ स्थानीय वस्तुओं के कारोबार तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर सर्विस सेक्टर मसलन भ्रमण, चिकित्सा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर हो जाएगा जो बांग्लादेश को जोखिम में डाल सकता है.
मुअज्जम को लगता है कि ऐसी स्थिति में डॉलर में लेन-देन ही सुरक्षित और आरामदायक है. इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने के कारण डॉलर में लेन-देन का जोखिम सबसे कम है.
उनकी सलाह है कि सरकार को हर तरह से भारतीय मुद्रा का कम इस्तेमाल कर डॉलर के ज़रिए विनिमय को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. इसके साथ ही उनका कहना है कि फ़िलहाल सरकार जिस तरह आयात को सीमित कर डॉलर का इस्तेमाल कम कर रही है, उसी ढांचे को अपनाए रखना चाहिए.
व्यापारियों का दावा-लाभ होगा
बांग्लादेश के नागरिक भारत में चिकित्सा, पर्यटन और ख़रीदारी पर काफ़ी खर्च करते हैं. आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश के कुल आयात का 14 फ़ीसदी भारत से होता है.
बांग्लादेश बैंक के आँकड़ों के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2021-22 में बांग्लादेश ने भारत को 200 करोड़ डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया था. इसके मुक़ाबले इसी दौरान बारत से एक हज़ार 619 करोड़ डॉलर की वस्तुओं का आयात किया गया. यानी व्यापार घाटे की मात्रा एक हजार 419 करोड़ रही. व्यापार घाटे और बांग्लादेश के पास पर्याप्त मात्रा में भारतीय रुपया नहीं होने के कारण दोनों देशों के बीच रुपए में अधिकतम 200 करोड़ डॉलर का लेन-देन करना संभव होगा.
यानी बांग्लादेश को निर्यात से जो 200 करोड़ डॉलर की आय हुई है, उसी मात्रा में भारतीय मुद्रा में कारोबार करने पर विचार किया जा रहा है. रुपए में इससे ज़्यादा क़ीमत की वस्तुएं नहीं ख़रीदी जा सकतीं क्योंकि निर्यात के अलावा रुपया हासिल करने का कोई उपाय नहीं है. इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश को अपने आयात की क़ीमत के बाक़ी हिस्से यानी 14 सौ करोड़ डॉलर की रक़म पहले की तरह अमेरिकी डॉलर में ही चुकानी होगी.
बांग्लादेश-भारत चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अब्दुल मतलूब अहमद बताते हैं कि रुपए में लेन के कारण बांग्लादेश को जिस 200 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बचत होगी उससे सरकार दूसरे देशों से ज़रूरी वस्तुओं का आयात कर सकेगी.
उनकी राय में इससे दोनों देशों को फ़ायदा होगा. व्यापार को दो सौ डालर तक सीमित कर देने की स्थिति में कोई जोखिम नहीं रहेगा.
बांग्लादेश बैंक के कार्यकारी निदेशक और प्रवक्ता मेजबाऊल हक़ का दावा है कि इस लेनदेन के द्विपक्षीय बातचीत पर आधारित होने के कारण बार-बार मुद्रा विनिमय का खर्च कम होगा. हम विनिमय दरों पर बचत कर सकते हैं.
बांग्लादेश से नियमित रूप से भारत का दौरा करने वाले लोगों की राय में भी यह फ़ायदेमंद है.
अगर कोई व्यक्ति बांग्लादेश से भारत के दौरे पर जाता है तो उसे पासपोर्ट पर डॉलर एंडोर्स करना होता है. उस डॉलर को भारत पहुंचने के बाद रुपए में बदल कर खर्च करना पड़ता है. दो बार मुद्रा निविनय के कारण उनको नुकसान होता है.
फ़िलहाल बांग्लादेश में डॉलर की क़ीमत 106 से 110 टका के बीच घूम रही है. इस लिहाज से 100 डॉलर ख़रीदने के लिए 10 हज़ार छह सौ से 11 हज़ार तक टका खर्च करना पड़ता है. इस सौ डॉलर के बदले 8,200 से 8,330 तक भारतीय रुपया मिलता है.
लेकिन अगर यह लेन-देन सीधे टका और रुपए में होता तो इतनी ही रक़म के एवज में 13 हज़ार से 14,500 तक भारतीय रुपया मिल सकता था. यह अंतर काफ़ी ज्यादा है.
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