जिसने जिंदगी को रफ्तार दी उसकी 'जिंदगी' थमी थी आज
रुडोल्फ डीजल। एक ऐसा नाम। जो जिंदगी की रफ्तार के साथ जुड़ा है। जिसने पूरी दुनिया को एक ऐसा विकल्प दिया जिससे मानो दूरियां मिटा दीं। जिंदगी की भी और रास्तों की भी। रुडोल्फ डीजल वही शख्स थे जिन्होंने दुनिया में पहली मर्तबा डीजल इंजन का अविष्कार किया था।
डीजल इंजन के अविष्कारक रुडोल्फ डीजल ने संसार को डीजल इंजन से रूबरू कराया। डीजल इंजन को दुनिया में लाने वाले इस शख्सियत का जन्म 18 मार्च 1858 में हुआ था। डीजल इंजन देने के बाद रुडोल्फ अचानक गायब हो गए औऱ उनकी लाश 10 अक्टूबर 1913 के दिन रहस्यमय तरीके से गायब हए गए थे। फोटो में जानिए कुछ रुडोल्फ डीजल की जिंदगी से जुड़े रहस्य औऱ उन्होंने कैसे डीजल इंजन का अविष्कार किया।

रुडोल्फ डीजल
रुडोल्फ डीजल। दुनिया को डीजल इंजन देकर उद्योगों और परिवहन में क्रांति लाए। लेकिन एक दिन यह शख्सियत आज के दिन 29 सितंबर 1913 को बेहद रहस्यमय दुनिया से अलविदा कह गई।

जद्दोजहद
28 फरवरी 1892 को रुडोल्फ डीजल ने अपने 'कंप्रेशन इंग्निशन इंजन' को पेटेंट कराया था। उस समय यह इंजन मूंगफली के तेल या वनस्पति तेल से चलाया गया। इसके बाद रुडोल्फ ने इसमें सिलेंडर जोड़ा भी जोड़ा, फिर पेट्रोल से अलग और सस्ते दूसरे किस्म के तरल ईंधन का इस्तेमाल भी किया। सिलेंडर और ईंधन डालते ही इंजन ताकतवर ढंग से धकधका उठा। कम्प्रेश की गई हवा और ईंधन के साथ चलने से खूब ऊर्जा निकली।क्या आपको पता है कि उस समय भाप के इंजन चलता था। उसे चुनौति दी थी रुडोल्फ ने। रुडोल्फ ने जोर देकर कहा कि भाप के इंजन में 90 फीसदी ऊर्जा बर्बाद करता है।

रुडोल्फ ने दी रफ्तार
पहले लोग अपने हाथी, घोड़े और अन्य जानवरों पर बैठकर इधर-उधर जाया करते थे। क्योंकि गाड़ियों का इतना चलन नहीं था। वाहनों में भाप या अन्य इंधन के इंजन इतनी स्पीड नहीं दे पाते थे। लेकिन रुडोल्फ ने इसको बदल दिया। डीजल इंजन का अविष्कार करके उन्होंने गाड़ियों और ट्रांसपोर्ट को नई रफ्तार दी।

भारी वाहनों के लिए वरदान
रुडोल्फ डीजल का डीजल इंजन भारी वाहनों के लिए वरदान से कम नहीं था। क्योंकि खेतों से कटाई के बाद सब्जियां भारी वाहनों में ढुलाई करके ही शहर तक लाई जाती हैं। इससे भारी वाहनों को अधिक ऊर्जा मिल पाई। आज भारी वाहनों में डीजल इंजन ही इस्तेमाल होता है।












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