पिघल रही है ‘दुनिया की छत’, एशिया के 'वाटर टावर' पर खतरा बढ़ा, भारत-चीन-पाकिस्तान में विनाशकारी खतरे की आशंका
तिब्बत में मौजूद बर्फ की छत पिघलने लगी है, जिसकी वजह से भारत-चीन और पाकिस्तान में विनाशकारी खतरा आने की आशंका जताई गई है।
तिब्बत: तिब्बत का पठार, जिसे दुनिया की छत के तौर पर भी पहचान मिली हुई है और जो विश्व की सबसे बड़ी पर्वतमाला माउंट एवरेस्ट और काराकोरम से घिरा हुआ है, उसने पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। आपको याद होगा कुछ दिन पहले उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटा था जिसमें 80 से ज्यादा लोग मारे गये थे और अब पता चल रहा है कि इसके पीछे की वजह ग्लोबल वार्मिंग है और अगर ग्लोबल वार्मिंग को फौरन कम नहीं किया गया तो आने वाला वक्त भारत और पाकिस्तान के साथ साथ एशियार के लिए भी विनाशकारी हो सकता है। एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि तिब्बत के पठारी इलाके में काफी तेजी के साथ तापमान बढ़ रहा है और ये पूरे एशिया के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात है।

पिघल रही ‘दुनिया की छत’
ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विकास के दौर में अंधा हो चुके इंसान प्रकृति को खतरनाक स्तर पर नुकसान पहुंचा रहे हैं जिसकी वजह से तिब्बत के पठार का तापमान काफी तेजी से बढ़ रहा है और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन की वजह से दुनिया की छत यानि तिब्बत का बर्फ पिघलना शुरू हो चुकी है। ताजा खुलासे में दावा किया गया है कि दुनिया को सबसे विनाशकारी दिन देखने के लिए तैयार हो जाना चाहिए क्योंकि सबसे खतरनाक और विनाशकारी दिन तो अभी आने वाला है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

‘एशिया के वाटर टावर’ पर खतरा
तिब्बत के पठार को वाटर टावर ऑफ एशिया भी कहा जाता है क्योंकि यहां सबसे ज्यादा बर्फ पाई जाती है और यहां मौजूद बर्फ की वजह से ही कई नदियों में पानी पहती है। एशिया में बहने वाली कई नदियों को पानी तिब्बत में पिघलने वाली बर्फ से ही मिलती है। लेकिन, खतरनाक स्थिति ये बन रही है कि यहां मौजूद बर्फ तेजी से पिघलना शुरू हो चुकी है। पहले जो रिसर्च हुए थे और पहले जो यहां मौजूद बर्फ के पिघलने का अनुमान लगाया गया था, उससे कहीं ज्यादा तेजी से बर्फ पिघलने लगी है, जिसकी वजह से आने वाले वक्त में इंसानी जिंदगी के सामने कई प्राकृतिक आपदाएं आने वाली हैं। तिब्बत के पठार में मौजूद बर्फ के पिघलने से हाइड्रोलॉजिकल साइकिल यानि नदियों में कितना पानी जाए और इकोसिस्टम की प्राकृतिक स्थिति खराब होने लगी है। जिसकी वजह से आशंका जताई गई है अब काफी ज्यादा ग्लेशियर टूटेंगे, लैंडस्लाइड होगा और सबसे खतरनाक बात ये कि नदियों में काफी ज्यादा पानी गिरेगा, जिससे एशियाई देश को विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ेगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

तेजी से बढ़ेगा तापमान
चीन के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि तिब्बत में जलवायु परिवर्तन को लेकर वर्तमान ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स को लेकर कहा है कि तिब्बत की स्थिति में तेजी से बदलाव हो रहा है और पहले जो भी रिसर्च किए गये हैं, उसमें तिब्बत की स्थिति को साधारण करके आंका गया जबकि तिब्बत की स्थिति कुछ और है, जिसके नतीजे आने वाले वक्त में काफी खतरनाक हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया था कि तिब्बत में तापमान जितना आंका गया है, उससे तेजी से बढ़ने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक जिस तरीके से अभी कार्बन उत्सर्जन हो रहा है, उसके हिसाब से 2041 से 2060 के बीच तिब्बत का तापमान 2.25 डिग्री तक बढ़ जाएगा। वहीं इस सदी के खत्म होते होते यानि 2081 से 2100 तक तापमान में 2.99 डिग्री का इजाफा हो सकता है। और तिब्बत जैसी जगहों पर बर्फ पिघलने के लिए तीन डिग्री तापमान का बढ़ना मतलब मानव जाति के ऊपर विनाशकारी परिणाम आने की चेतावनी से कम नहीं हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कई नदियों पर संकट
रिपोर्ट में कहा गया है जिस रफ्तार में ग्लेशियर पिघलेंगें उससे भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों पर काफी विनाशकारी असर होगा। करोड़ों-अरबों लोगों को पीने के लिए, जानवरों के लिए, पेड़-पौधों के लिए पानी की आपूर्ति रूक जाएगी। पाकिस्तान की सिंधु नदी, भारत की गंगा नदी और ब्रह्मपुत्र नदी और चीन की यलो और यांगजे नदियों में पानी आना बंद हो जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक ग्लेशियर में हजारों-हजार साल से बर्फ दबा रहता है और प्रकृति अपने मुताबिक धीरे धीरे नदियों को पानी देती है। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजग से हजारों फीट बर्फ तिब्बत में पिघल जाएगी, जिससे हर जगह खतरा ही खतरा होगा। इससे समुन्द्रों में पानी का लेवल बढ़ जाएगा और सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं का ही सामना नहीं करना होगा, बल्कि इसका असर खेती, बिजली के प्रोडक्शन और आर्थिक जगत पर भी पड़ेगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जलवायु परिवर्तन का असर
चायनीज एकेडमी ऑफ साइंस के सीनियर साइंटिस्ट ने दावा किया है कि इंसानी दखल की वजह से तिब्बत में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इतिहास से हमें सीखने की जरूरत है कि तिब्बत के पठार पर कैसे भी ग्लोबल वार्मिंग को कम किया जाए। हिमालय पर्वत श्रृंखला में अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा बर्फ और हिम का भंडार है, लिहाजा अंदाजा लगाना आसान होगा, कि अगर हिमालय का बर्फ बिखलेगा तो क्या होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1975 से 2000 के बीच हर साल 4 बिलियन टन बर्फ बिघल रही थी लेकिन साल 2000 से 2016 के बीच बर्फ पिघलने की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है और हर साल औसतन करीब 8 बिलियन टन बर्फ पिघली है और अगर इस सदी के अंत तक 3 डिग्री सेल्सियत तक तापमान बढ़ जाता है, तो समझ लीजिए, एक बड़े हिस्से में प्रलय जैसे हालात बन जाएंगे। (प्रतीकात्मक तस्वीर)












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