जानिए भारत में किन रास्तों से घुसपैठ करते हैं रोहिंग्या मुस्लिम
नई दिल्लीः सुप्रीम में दायर किए गए हलफनामे में मोदी सरकार ने साफ कहा कि रोहिंग्या मुसलमान भारत में अवैध शरणार्थी हैं। इनसे देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। दायर किए गए हलफनामे में सरकार ने बताया कि भारत में करीब 40 हजार से ज्यादा अवैध रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। हफलनामे में बताया गया है कि कइयों ने तो अवैध पैन कार्ड और वोटर आईडी बनवा लिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।

कैसे करते हैं भारत में घुसपैठ-
सरकार ने सुप्रीम में दिए हलफनामे में बताया कि रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में म्यांमार के रास्ते से घुसपैठ कराई जा रही है। इसके लिए कुछ एजेंट और दलाल इनकी मदद करते हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों को पश्चिम बंगाल के बेनापोल-हरिदासपुर और हिल्ली तथा त्रिपुरा के सोनामोरा के अलावा कोलकाता और गुवाहाटी से घुसपैठ कराई जाती है।

नहीं दिए जा सकते हैं मूल अधिकार
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ किया कि रोहिंग्या शरणार्थियों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत देश में कहीं भी जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इन नागरिको को भारत में बसने जैसे मूलभूत अधिकार नहीं दिए जा सकते।

बौद्धों के खिलाफ हिंसक कदम उठा सकते हैं
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी की वैध दस्तावेज के साथ ये भारत में आ सकते हैं। अगर कोई बिना वैध दस्तावेज के भारत में आता है तो भारत के हालात खराब हो सकते हैं। ये लोग देश में बौद्धों के खिलाफ हिंसक कदम उठा सकते हैं।

रोहिंग्या मुस्लिमों ने दी सुप्रीम कोर्ट में ये दलील
सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुस्लिमों ने कहा कि म्यांमार में उनके साथ भेदभाव और हिंसा हो रही है, जिस कारण से उन्होंने भारत में शरण ली है। साथ ही कहा कि भारत ने मानवाधिकार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिस कारण से उन्हें देश से नहीं निकाला जा सकता है।

कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान -
म्यांमार में बौद्ध आबादी बहुसंख्यक है वहीं करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इनके बारे कहा जाता है कि इनमें मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं और ये कई सालों से वहां रह रहे हैं। म्यांमार की सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। पिछले पांच-छह सालों से वहां सांप्रदायितक हिंसा देखने को मिल रही है। इसके अलावा लाखों लोग बांग्लादेश में आ गए हैं। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को बड़े पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवार का सामना करना पड़ रहा है।

कब शुरू हुई हिंसा-
म्यांमार में साल 2012 से हिंसा हो रही है,लेकिन 25 अगस्त को म्यांमार में मौंगडोव सीमा पर कुछ पुलिस वालों की मौत हो गई, जिसके बाद वहां की सरकार ने व्यापक ऑपरेशन शुरू किया। कहा जा रहा है कि अभी तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। म्यांमार की सेना पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लग रहे हैं।












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