UN में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पारित, भारत ने मतदान से फिर बनाई दूरी

न्यूयॉर्क, 03 मार्च: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के हमले की कड़ी निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस के खिलाफ प्रस्ताव को बहुमत से पारित कर दिया गया। विशेष इमरजेंसी बैठक के बाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। लेकिन भारत एक बार फिर यूक्रेन संकट पर यूएनएससी में हुए मतदान से दूर रहा है। यूएई और चीन ने भी वोटिंग से परहेज किया है। संयुक्त राष्ट्र के इस कदम का 141 देशों ने किया समर्थन जबकि 5 देशों ने विरोध में वोट डाला। वहीं 35 देशों में वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। भारत ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

Resolution against Russia passed in UNGA, India again stayed away from voting

यूक्रेन में रूसी हमले को तत्काल रोकने और सभी रूसी बलों की वापसी की मांग संबंधी प्रस्ताव पर 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में बुधवार को दोपहर में मतदान किया गया। वर्ष 1997 के बाद पहली बार बुलाए गए संयुक्त राष्ट्र महासभा के आपात सत्र में यूक्रेन के राजदूत सर्गेई किस्लित्स्या ने कहा, अगर यूक्रेन नहीं रहा.... तो अंतरराष्ट्रीय शांति भी नहीं रहेगी। यूरोप के आर्थिक रूप से समृद्ध देशों से लेकर छोटे प्रशांत द्वीप देश तक कई देशों ने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा की है।

193 सदस्यीय महासभा ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए मतदान किया और यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़े शब्दों में निंदा की। प्रस्ताव के पक्ष में 141 मत पड़े, पांच ने खिलाफ में मतदान किया और 35 ने भाग नहीं लिया। प्रस्ताव पारित होने पर महासभा में तालियां बजाई गईं। प्रस्ताव को महासभा में पारित होने के लिए 2/3 बहुमत की आवश्यकता थी।

इस प्रस्ताव में परमाणु बलों की तैयारी बढ़ाने के रूस के फैसले की भी निंदा की और यूक्रेन के खिलाफ बल के इस गैरकानूनी उपयोग में बेलारूस की भागीदारी की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने का आह्वान किया। प्रस्ताव राजनीतिक वार्ता, वार्ता, मध्यस्थता और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के तत्काल शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह करता है। लगभग 100 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में अफगानिस्तान, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, कुवैत, सिंगापुर, तुर्की, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका समेत कई देश हैं जिन्होंने 'यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता' नामक प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया।

वहीं संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी. एस. तिरुमूर्ति ने कहा कि, हम खार्किव और अन्य संघर्ष वाले इलाकों से अपने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और निर्बाध मार्ग की मांग करते हैं। भारत सरकार ने निकासी की सुविधा के लिए यूक्रेन के पड़ोसी देशों में वरिष्ठ मंत्रियों को भेजा है। हम यूक्रेन के सभी पड़ोसी देशों को अपनी सीमा खोलने और इस समय हमारे दूतावासों को सभी सुविधाएं देने के लिए धन्यवाद करते हैं। भारत यूक्रेन में बिगड़ते हालात को लेकर बेहद चिंतित है। खार्किव में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु पर हम उनके परिवार और इस संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले हर नागरिक के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।

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