'हनुमान फर्जी भगवान', कौन है ये ट्रंप की पार्टी का नेता, जिसने हिंदू देवताओं पर दिया विवादित बयान
अमेरिका में हनुमान जी की एक भव्य प्रतिमा पर उठा विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता ने इस प्रतिमा का विरोध करते हुए इसे 'झूठे हिंदू भगवान' बताया है। उनके इस बयान ने अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता पर एक नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब टेक्सास के रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन (Alexander Duncan) ने हनुमान जी की 90-फुट ऊंची प्रतिमा का विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, 'हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की मूर्ति को क्यों अनुमति दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं।' डंकन का इशारा शुगर लैंड शहर में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित प्रतिमा की ओर था।

डंकन ने अपने इस विरोध को जायज ठहराने के लिए बाइबिल का हवाला भी दिया। उन्होंने एक्स पर बाइबिल के 'एग्जोडस 20:3-4' और 'रोमन्स 1:25' के छंदों को उद्धृत करते हुए कहा कि हमें कोई और भगवान नहीं मानना चाहिए और न ही उसकी कोई मूर्ति बनानी चाहिए।
डंकन के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
अलेक्जेंडर डंकन के इस बयान पर तुरंत ऑनलाइन आलोचना शुरू हो गई। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने उनके बयान को 'हिंदू विरोधी और भड़काऊ' बताया। फाउंडेशन ने टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है। डंकन की पोस्ट पर कई यूजर्स ने उन्हें अमेरिका के संविधान की याद दिलाई, जो सभी नागरिकों को किसी भी धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है।
कौन हैं रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन?
अलेक्जेंडर डंकन टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता हैं जो वर्तमान में 2026 में होने वाले अमेरिकी सीनेट चुनाव में टेक्सास का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर चुके हैं। अपने राजनीतिक करियर से पहले, वह लगभग 12 साल तक एक पुलिस अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं। डंकन एक ईसाई धर्म को मानने वाले और रूढ़िवादी विचारधारा वाले व्यक्ति हैं जो खुद को 'राष्ट्रवादी' बताते हैं।
स्टैच्यू ऑफ यूनियन के बारे में
'स्टैच्यू ऑफ यूनियन' नामक यह प्रतिमा शुगर लैंड, टेक्सास के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित है। यह उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा है। 90 फीट ऊंची यह प्रतिमा हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक है। इसका अनावरण 18 अगस्त 2024 को किया गया था। इस प्रतिमा का नाम हनुमान जी की उस भूमिका के नाम पर रखा गया है, जिसमें उन्होंने भगवान राम और सीता को फिर से मिलाया था।












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