भारत में 45 डिग्री तक झेल जाते हैं, यूरोप में 35 डिग्री तापमान जानलेवा क्यों ?
नई दिल्ली, 18 जुलाईः यूरोप का हाल इन दिनों भीषण गर्मी से बेहाल है। महाद्वीप का अधिकांश हिस्सा भयानक हीटवेव की चपेट में है। यहां के जंगलों में आग लग रही है, जिससे हजारों लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है। फ्रांस, ब्रिटेन, पुर्तगाल, स्पेन सहित कई अन्य देश लगातार बढ़ती गर्मी से परेशान हैं। यहां तक कि उच्च तापमान की वजह से लोगों की जान भी जा रही है। ऐसे में लोगों घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी जा रही है।

गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
विशेषज्ञों की मुताबिक इस बार गर्मी ने सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं। जुलाई में जहां ब्रिटेन का तापमान 20 से 22 डिग्री के बीच होता था इस बार यह 40 डिग्री के आंकड़े को छूने के करीब है। ऐसे में प्रशासन की तरफ से लोगों चेतावनी दी गई है कि वो बाहर न निकलें। इससे पहले ब्रिटेन में उच्चतम दर्ज तापमान 38.7 C (101.7 F) था, जो 25 जुलाई 2019 को कैम्ब्रिज में दर्ज किया गया था। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि आने वाले दिनों यह रिकॉर्ड टूट जाएगा। बताया जा रहा है कि दक्षिणी ब्रिटेन में पहली बार इतनी गर्मी देखी गई है। ये पहली बार है जब मौसम को लेकर इतनी गंभीर चेतावनी दी गई है।

40 डिग्री के पार गया तापमान
लंदन में गर्मी इतनी बढ़ गई है कि यहां पर इंजीनियर्स को 135 साल पुराने लंदन ब्रिज को सिल्वर फॉयल से कवर करना पड़ा है। ब्रिटेन ही नहीं फ्रांस में भी ऐसे ही हालात हैं। फ्रांस के 96 क्षेत्रों में से 38 को "ऑरेंज" अलर्ट पर सूचीबद्ध किया गया है। फ्रांस के कई इलाकों में हीटवेव चल रही हैं जिससे सैकड़ों जान गयी हैं। फ्रांस के कई इलाकों में तापमान 40 पार कर चुका है जो कि एक रिकॉर्ड है। यही हालात पुर्तगाल में भी हैं। बीते सप्ताह पुर्तगाल में लगभग 400 लोगों की मौत हो चुकी है। जाहिर है इससे पहले पुर्तगाल में ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी गयी थी।

बढ़ती गर्मी से यूरोप में मौतें
पूरी दुनिया में तापमान का बढ़ना अब आम बात हो गयी है। भारत के कई इलाकों में साल के अधिकांश महीने तापमान 40 के आसपास होते हैं। बिहार, यूपी, दिल्ली और राजस्थान जैसे इलाकों में गर्मी के समय तापमान का 45 हो जाना अब चौंकाता नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्यों आखिर यूरोप में 40 से भी कम तापमान में मौतें हो रही हैं जबकि दिल्ली से बिहार तक सब लगभग सामान्य है? दरअसल यूरोप में साल के 4 महीने अधिकतम तापमान 10°C , बाकी चार महीने यह 15-20 °C के आसपास रहता है। वहीं गर्मियों में भी यहां तापमान 30°C के नीचे ही रहता है। जबकि भारत के उत्तरी इलाकों में ऐसा नहीं है। यहां के लोग गर्म वातावरण में खुद को ढ़ाल चुके हैं।

गर्मी को लेकर नहीं थे तैयार
यूरोप के देशों में हाल में ही एसी का चलन बढ़ा है वर्ना यहां पंखें भी शायद ही किसी घरों में दिखते थे। जबकि भारत के अधिकांश क्षेत्रों में सर्दी के कुछ महीने छोड़ दें तो लगभग समय तक पंखे आदि की जरूरत पड़ती ही है। यूरोप में ट्रेन, स्टेशन, बस स्टॉप आदि जगहों पर धूप से बचने के नजरिये से नहीं बने होते। वहां शेड्स नहीं लगे होते। ऐसे में 35 डिग्री की धूप में यहां के लोगों का खड़े होकर ट्रेन का इंतज़ार करना मौत को न्योता देने बराबर हो जाता है।

यूरोप की गर्मी है जानलेवा
यूरोप में मोटापा आम समस्या बन चुकी है, इसलिए यहां के लोगों को खुद को फिट रखने के लिए पैदल चलना आम बात है। छोटे-छोटे कामों के लिए यूरोप में लोग पैदल ही निकल लेते हैं। ऐसे में अचानक आती गर्मियों में कई लोग मानसिक रूप से तैयार नहीं होते और अपने रूटीन कामों के लिए पैदल ही निकल पड़ते हैं। कई बार भरी दुपहरी में पैदल सफर करना आफत मोल लेना है। भारत में गर्मियों की दुपहरी में अब पैदल सफर करना लोग भूल चुके हैं। अगर दोपहर में लोगों को कहीं निकलना हो तो वे कैब सुविधा का या मेट्रो का उपयोग करते हैं। भारत के लोग गर्मियों के लिए खुद को ढ़ाल चुके हैं लेकिन यूरोप के लोग अभी तक खुद को इसके मुताबिक तैयार नहीं कर पाए हैं। इसलिए यूरोप की गर्मी भारत की गर्मी के मुकाबले अधिक जानलेवा है।












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