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Reality Of Lyari: धुरंधर से कितनी अलग ल्यारी की कहानी? हिन्दुओं ने बसाया फिर बलोच मुस्लिमों ने कब्जाया!

Reality Of Lyari: आदित्य धर की जासूसी थ्रिलर 'धुरंधर' (Dhurandhar) 2000 के दशक में पाकिस्तान के ल्यारी पर आधारित है। कराची की "मां" कही जाने वाली यह डॉक-श्रमिकों की बस्ती कभी खतरनाक गैंगवार का गढ़ थी, जो अब अपनी इमेज सुधार रही है। 2022 में कैफी खलील के 'कोक स्टूडियो' गाने "काना यारी" ने भी इस इलाके की असली तस्वीर दुनिया को दिखाई, जिसमें अपने शहर की कहानियां और दर्द झलकते हैं।

ल्यारी को मिला ग्लोबल स्पॉटलाइट

'धुरंधर' के रिलीज होते ही दुनिया भर में कराची के "वाइल्ड वेस्ट" - यानी ल्यारी - की गैंगवार और हिंसा पर लोगों का ध्यान गया। साढ़े तीन घंटे की इस फिल्म ने ल्यारी को अपना मुख्य मंच बनाया है। कहानी 1999 में अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट से शुरू होकर ल्यारी के डरावने दौर का विस्तार से वर्णन करती है।

Reality Of Lyari

साधारण बस्ती कैसे बनी गैंगस्टरों की पनाहगाह?

सवाल उठता है कि औपनिवेशिक काल की यह छोटी सी डॉक-बस्ती, जिसे "मां" कहा जाता था, 1980 के दशक में क्रूर गैंगों की ठिकाना कैसे बन गई? 6 वर्ग किलोमीटर में फैला यह छोटा इलाका पहले मकरानी-बलूचों का था, फिर कच्छियों, मुहाजिरों और पठानों ने इसे बसाया- और बाद में यही गैंगस्टरों, ड्रग तस्करों, हथियार के डीलर्स, सुपारी किलर्स और गैंगावर के लिए एक हॉटस्पॉट बन गया है।

ल्यारी की दो कहानियां: एक हिंसा की, दूसरी बदलाव की

ल्यारी वही जगह है जहां कभी राजनीतिक दल, अपराधी गिरोह, माफिया और सरकारी एजेंट आपस में उलझे रहते थे। और आज यही ल्यारी फुटबॉल क्लबों, मुक्केबाजी जिमों, थिएटर ग्रुपों और रैप कलेक्टिव्स का घर बन चुका है - यानी एक पूरी तरह बदला हुआ इलाका।

ल्यारी नाम की शुरुआत कहां से हुई?

फ्रांसीसी लेखक लॉरेंट गायर के मुताबिक, "ल्यारी" शब्द 'लयार' नाम के पेड़ से आया है, जो कब्रिस्तानों में मिलता है। कुछ लोग इसे कराची से बहने वाली ल्यारी नदी से जोड़ते हैं, जिसमें आजकल बारिश के अतिरिक्त ताजा पानी नहीं दिखाई देता। कराची का सबसे पुराना इलाका माने जाने वाला ल्यारी, कराची शहर से भी अधिक पुराना बताया जाता है।

मछुआरों की बस्ती से शुरू हुआ ल्यारी का सफर

पाकिस्तानी लेखक रमजान द्वारा लिखी गई किताब 'ल्याही द हार्ट ऑफ कराची' के मुताबिक साल 1729 में हिन्दु व्यापारी भोजोमल ने ल्यारी शहर की नींव रखी थी। 1830 में अंग्रेजों के आने के बाद यह कराची के मुस्लिम इलाकों में गिना जाने लगा। 1850 के दशक में कराची पोर्ट का आधुनिकीकरण हुआ, व्यापार बढ़ा और ल्यारी मजदूरों के केंद्र के रूप में उभरा। बलूच समुदाय ही इस पोर्ट को चलाते थे। उस वक्त में यहां सबसे ज्यादा बिल्डिंग्स, पार्क आदि का निर्माण हिन्दुओं और पारसियों ने करवाया था।

पुराना ल्यारी: संकरी गलियां, भीड़भाड़ और अनदेखा विकास

आजादी के पहले ल्यारी में तंग गलियां, भीड़भाड़ और कई समुदायों का मेलजोल भरा माहौल देखने को मिलता था। लॉरेंट गायर लिखते हैं कि ब्रिटिश व्यापारियों ने इस मजदूर-बहुल मुस्लिम इलाके में कभी पैसा निवेश नहीं किया, इसलिए यह अनियोजित तरीके से बेतरतीब बढ़ता गया।

ईरानी बलूच और भारत से आए मुहाजिर

1920 के दशक में ईरानी बलूचिस्तान पर कब्जे के बाद बड़ी संख्या में बलूच यहां आए।
1947 के विभाजन के बाद भारत से आए उर्दू भाषी मुहाजिरों ने ल्यारी की मुश्किलें बढ़ा दीं - लेकिन ल्यारी ने सबको अपनी "मां" की तरह अपनाया।

1970-2000: भीड़ बढ़ी, गरीबी बढ़ी, और हालत बिगड़े

विभाजन के बाद जनसंख्या इतनी बढ़ गई कि गरीबी और सरकारी उपेक्षा ने इसे कराची की सबसे बड़ी झुग्गी जैसा बना दिया। टूटी सड़कें, जर्जर घर, बिगड़ता ढांचा - यह सब ल्यारी की पहचान बन गया।

ल्यारी के पहले गैंग: 'काला नाग' और 'दलाल'

1960 के दशक में ल्यारी के पहले दो गैंग उभरे - काला नाग और दलाल। ये लोकल लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाते थे, पर नशे का व्यापार बढ़ा दिया। इन्हीं गैंग्स में से आगे चलकर रहमान डकैत और उजैर बलोच जैसे लोग निकले।

पीपीपी और ल्यारी: एक खास राजनीतिक रिश्ता

1970 के दशक में जुल्फिकार अली भुट्टो ने ल्यारी में चुनाव प्रचार किया और यहां की जनता ने उन्हें बड़ी इज्जत दी। बेनजीर भुट्टो ने भी अपना वलीमा 1987 में काकरी ग्राउंड में किया। इसके बाद ल्यारी पीपीपी का गढ़ बन गया।

1979: अफगान युद्ध के बाद बदलाव और जनसंख्या विस्फोट

1979 में जिया-उल-हक के शासन के दौरान अफगान-सोवियत युद्ध शुरू हुआ। पठान समुदाय बड़ी संख्या में आया- हथियार चले, कुशल निशानेबाज आए और ल्यारी का ड्रग व्यापार तेजी से बढ़ा।

जनसंख्या विस्फोट: 1973 से 2023 तक

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार:

• 1973: 250 लोग प्रति हेक्टेयर
• 2010: 1,180 लोग प्रति हेक्टेयर
• 2023: 1,583 लोग प्रति हेक्टेयर

यह तेज़ी दिखाती है कि ल्यारी कैसे बोझ से दब गया।

राजनीति में गैंगों की एंट्री

1980 के दशक में गैंग राजनीति में घुस गए। पीपीपी ने अरशद पप्पू के मुकाबले में उजैर बलूच और रहमान डकैत का समर्थन किया। रहमान डकैत की पीपल्स अमन कमेटी (PAC) ल्यारी की सत्ता बन गई।

हिंसा कराची तक फैली: 3,200 लोगों की मौत

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, 2013 तक कराची में गैंगवार में 3,200 से अधिक लोग मारे गए। जिसमें से 800 लोगों की जान सिर्फ एक साल के अंदर गई। जिसके बाद पीपीपी ने 2012 में अंतरराष्ट्रीय दबाव में PAC से दूरी बना ली।

रेंजर्स की कार्रवाई और 2023 तक चला सफाई अभियान

सरकार ने पाकिस्तान रेंजर्स को भेजा। कराची पुलिस ने 1,000+ गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया। 2018 में ल्यारी ने पीटीआई को जीत दिलाई, 48 साल की पीपीपी की बादशाहत खत्म की। जिसके बाद से यहां के माहौल में लंबा परिवर्तन देखने को मिला।

हिंसा के बीच पैदा हुए ल्यारी के सितारे

ल्यारी ने कई दिग्गज पैदा किए:

• ओलंपिक बॉक्सर हुसैन शाह
• फुटबॉल खिलाड़ी उमर बलूच, गुलाम अब्बास, उस्ताद कासिम
• शिक्षाविद वाजा गुलाम नूरुद्दीन
• पाकिस्तान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सैयद सज्जाद अली शाह
• बॉडीबिल्डर सिकंदर बलूच
इनका जिक्र पाकिस्तान के फेमस अखबार द डॉन ने किया है।

बदलता ल्यारी: कम हिंसा, बढ़ता व्यवसाय

हिंसा घटी है, बिजनेस बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी कई कमी बाकी है। स्कूल, जागरूकता कार्यक्रम और एनजीओ धीरे-धीरे ल्यारी को बदल रहे हैं। नई जेनरेशन फुटबॉल क्लब, बॉक्सिंग जिम, थिएटर, रैप कलेक्टिव जैसे क्रिएटिव स्पेस बना रही है। युवाओं में आत्मविश्वास भी है और अपने इलाके को बदलने का जुनून भी।

कैफी खलील: ल्यारी की आवाज़ जिसने दुनिया तक दर्द पहुंचाया

29 साल कैफी खलील का कोक स्टूडियो डेब्यू "काना यारी", ईवा बी के साथ, ल्यारी की ज़िंदगी का असली दर्द दिखाता है:
"तुम खाड़ी में समृद्धि में रहते हो, और मैं यहां ल्यारी में बर्बाद रहा हूं..."
यह गीत ल्यारी के लोगों की गहरी भावनाओं और संघर्ष को बेहद खूबसूरती से दिखाता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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