'छोटे लोगों के पास बड़ा नजरिया नहीं', पढ़ें, पीएम मोदी पर अभद्र टिप्‍पणी करने वाले इमरान खान की असली बीमारी

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पीएम नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया है। भारत की तरफ से शुक्रवार को वार्ता रद्द किए जाने से बौखलाए इमरान खान ट्वीट किया, 'मेरे शांति वार्ता प्रस्‍ताव पर अंहकारी और नकरात्‍मक प्रतिक्रिया से मैं निराश हूं। मैं अपनी पूरी जिंदगी बड़े दफ्तरों में बैठे ऐसे छोटे लोगों को देखता आया हूं, जिनके पास दूरदर्शिता नहीं है और बड़ी तस्वीर देखने की काबिलियत नहीं है।' पाकिस्‍तान और भारत के बीच कई बार युद्ध हो चुके हैं, लंबे समय से संबंध खराब हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के स्‍तर पर इस प्रकार के घटिया शब्‍दों का कभी इस्‍तेमाल नहीं किया गया। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान के इस भद्दे बयान पर भारत में जरूर लोग गुस्‍से और हैरानी से भरे हैं, लेकिन पाकिस्‍तान में ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्‍योंकि पाकिस्‍तान में लोग इमरान खान से अच्‍छी तरह वाकिफ हैं। दरअसल, इमरान खान की इस भद्दी टिप्‍पणी के पीछे कई कारण हैं। एक कारण तो इमरान खान का अपना व्‍यक्तित्‍व ही है, जबकि अन्‍य कारण कूटनीतिक और सियासी हैं। आइए जानते हैं क्‍यों आपे से बाहर हो रहे हैं इमरान खान:

बेसब्र राजनेता हैं इमरान खान, खुद पाकिस्‍तानी अखबार यह कह रहा है

बेसब्र राजनेता हैं इमरान खान, खुद पाकिस्‍तानी अखबार यह कह रहा है

इमरान खान पाकिस्‍तान के सफल क्रिकेटर्स में एक हैं। उनकी कप्‍तानी में पाकिस्‍तान क्रिकेट टीम का प्रदर्शन काफी अच्‍छा रहा, लेकिन क्रिकेट और सियासी पिच में अंतर होता है। सियासत में क्रिकेट से कहीं ज्‍यादा धैर्य की जरूरत होती है, लेकिन इमरान खान राजनीति में कभी इसका परिचय देते नजर नहीं आए। खुद पाकिस्‍तान का अखबार डॉन में जैन उल आबेदिन कासमानी ने 'इमरान खान ने ये पांच गलतियां की' हेडलाइन से आर्टिकल लिखा। इसमें आबेदिन लिखते हैं- राजनीति में धैर्य की आवश्‍यकता होती है। कदम दर कदम प्‍लानिंग करनी होती है, लेकिन इमरान खान रिंग में उतरे बिना ही विरोधी को हराने की उम्‍मीद पाल बैठते हैं।' इस लेख में लिखी बात और पीएम मोदी पर इमरान खान की टिप्‍पणी में कितना मेल है। इमरान खान अभी-अभी पीएम बने हैं। उन्‍होंने एक बार पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी शांति वार्ता शुरू करने के लिए और जैसे ही वार्ता भारत ने नामंजूर की तो इमरान खान लगे झल्‍लाने।

इमरान खान ने साबित किया कि वह सिर्फ मुखौटा हैं

इमरान खान ने साबित किया कि वह सिर्फ मुखौटा हैं

पाकिस्‍तान के साथ संयुक्‍त राष्‍ट्र में बैठक को लेकर जब चर्चा चल रही थी कि वार्ता हो या न हो, तब कई भारतीय पत्रकारों ने लेख लिखे। इनमें द प्रिंट के लिए नितिन पाई का भी आर्टिकल शामिल है। नितिन पाई ने लिखा- 'इमरान खान के साथ बातचीत में भारत को जल्‍दबाजी नहीं करनी चाहिए।' भारत ने ठीक ऐसा ही किया, क्‍योंकि उसे पता है कि एक ओर इमरान खान शांति वार्ता के लिए चिट्ठी लिख रहे हैं और उसके कुछ दिन बाद ही सरहद पर भारतीय जवान के साथ बर्बरता की जा रही है। इमरान खान के दोगलेपन का संकेत तो उनके शपथ ग्रहण समारोह में ही मिल गया था, जब नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से गले मिले और उन्‍होंने करतारपुर साहिब के लिए कॉरिडोर खोलने की बात कही, लेकिन बाद में पाकिस्‍तान सरकार मुकर गई।

इमरान खान की झल्‍लाहट के पीछे यह है असल वजह

इमरान खान की झल्‍लाहट के पीछे यह है असल वजह

इमरान खान के सत्‍ता में आने से पहले पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने भारत के साथ कारोबार और शांति वार्ता दोनों बहाल करने की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने उसे स्‍वीकार किया था। इसके बाद इमरान खान आए उन्‍हें भी भारत ने इनकार कर दिया। भारत अपने स्‍टैंड पर कायम है, सरहद पर गोली और बातचीत एकसाथ नहीं चल सकते। इस समय पाकिस्‍तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वह चाहता है कि भारत को शांति वार्ता के झांसे में फांसकर कुछ कारोबार शुरू हो और उसके बाद आईएसआई के पैसे पर पल रहे आतंकी एक बार फिर खून बहाएं।

शांति वार्ता की आड़ में रक्‍तरंजित खेल ही खेलता रहा है पाकिस्‍तान

शांति वार्ता की आड़ में रक्‍तरंजित खेल ही खेलता रहा है पाकिस्‍तान

जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक पाकिस्‍तान यही करता आया है। वह शांति के नाम पर कदम बढ़ाकर बदले में रक्‍तरंजित खेल ही खेलता रहा है। कभी कारगिल तो कभी उड़ी, कभी मुंबई हमले तो कभी पठानकोट। भारत ने जब-जब शांति के लिए हाथ आगे बढ़ाया पाकिस्‍तान ने बदले में धोखा ही दिया है।

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