विलुप्त होने के कगार पर दुर्लभ ध्रुवीय भालू, आर्कटिक से इंसानों के लिए भी आई विनाशकारी चेतावनी
आर्कटिक में मौजूद ध्रूवीय भालुओं की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है। आर्कटिक में खतरनाक केमिकल्स पहुंच रहा है, जो इंसानों के लिए भी विनाशकारी है।
आर्कटिक, जुलाई 31: आर्कटिक में पाए जाने वाले बेहद दुर्लभ भालुओं की जिंदगीं पर बहुत गंभीर खतरा मंडरा रहा है और वो विलुप्त होने की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों को रिसर्च के दौरान पता चला है कि आर्कटिक में खतरनाक कैमिकल्स की मात्रा इतनी बढ़ रहगी है कि बेहद दुर्लभ भालुओं का रहना अब काफी मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर दुनिया अभी भी सावधान नहीं हुई तो इसके विनाशकारी परिणाम देखने को मिलेंगे।
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दुर्लभ भालुओं की जिंदगी पर खतरा
वैज्ञानिकों ने कहा है कि आर्कटिक में आने वाले खतरनाक और जहरीले कैनिकल्स की चपेट में दुर्लभ ध्रुवीय भालू आ रहे हैं, जिनसे उन्हें गंभीर खतरा है। वैज्ञानिकों ने कहा कि ज्यादातर कैमिकल्स वो हैं, जो सौंदर्य प्रसाधन में इस्तेमाल किए जाते हैं। रिसर्च में पता चला है कि बेहद खतरनाक सिंथेटिक पदार्थों को ऐसे ही फेंका जा रहा है और ऐसे पदार्थ यूनाइटेड किंगडम और आसपास के देशों के द्वारा आर्किटक तक पहुंच जाते हैं, वहीं कई केमिकल्स हवा के जरिए भी आर्कटिक तक पहुंच रहे हैं और वहां मौजूद बर्फ से चिपक कर पूरे आर्कटिक के वातावरण को जहरीला बना रहे हैं, जो ध्रुवीय भालुओं के लिए जानवेला है।

जहरीला हो रहा है पानी
वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि दुनिया के अलग अलग देशों से खतरनाक कैमिकल्स अलग अलग स्रोतों के जरिए आर्कटिक तक पहुंच रहे हैं और वहां मौजूद बर्फ के टुकड़ों में मिल जाते हैं और जब बर्फ पिघलता है तो वो जहरीला केमिकल्स आर्कटिक में मौजूद पानी में चला जाता है, जहां भालू रहते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा है कि ये खतरनाक रसायन भालुओं के शरीर में जाता है और उनके लिए जानलेवा बन जाता है। ये रसायन ध्रुवीय भालुओं के हार्मोन सिस्टम को खराब कर रहे हैं, जो उनकी मौत का कारण बन रहे हैं।

बर्फ में मिला जहर
लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक रिसर्च में पता चला है कि आर्कटिक के बर्फ में पॉली और पेरफ्लूरोकाइल पदार्थ (पीएफएएस) मिले हैं, जो पर्यावरण में घुलते नहीं है, वो ऐसे ही वातावरण में मौजूद रहते हैं और ये इंसानों के लिए जानवरों के लिए खतरनाक होते हैं। ये खतरनाक कैमिकल्स आर्कटिक में मौजूद भालुओं के अलावा दूसरे जीव के लिए भी काफी नुकसानदायक होते है।

शैवाल से चिपक जाता है केमिकल्स
रिसर्च में पता चला है कि आर्कटिक में शैवाल जैसे समुद्री खाद्य पदार्थ में चिपक जाते हैं और जब आर्कटिक में मौजूद दूसरे जीव शैवाल को खाते हैं तो ये रासायनिक पदार्थ उनके शरीर में जाकर भयानक नुकसान पहुंचाते हैं। रिसर्च में पता चला है शैवाल में पर ज़ोप्लांकटन भी आ जाता है और उसे खाने वाले छोटे छोटे झिंगा मछलियों समेत दूसरी जीवों को भालू खाते हैं और फिर बुरी तरह बीमार पड़ जाते हैं और उनकी मौत हो जा रही है।

समुद्री पक्षियों को भी खतरा
वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि कपड़े धोने के लिए जो डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जाता है, वो भी आर्कटिक में पाए गये हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरोपीय देशों से निकला गंदा रसायन भी लाखों किलोमीटर दूर आर्कटिक तक पहुंच रहा है। ये रसायन इंसानों के लिए भी खतरनाक होता है और इन रसायनों के आर्कटिक तक पहुंचने और आर्कटिक में पिघले बर्फ के साथ ये रसायन समुद्री तक भी पहुंचता है, लिहाजा समुद्री पक्षियों के लिए भी ये खतरनाक साबित हो रहा है। इसके साथ ही यूरोपीय देशों की फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा रसायन भी आर्कटिक तक पहुंच रहा है, जो इंसानों के साथ साथ हर जीव के लिए घातक साबित हो रहा है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि यूरोपीय देशों के लोगों में कैंसर के कारण बढ़ने का एक बड़ा कारण यही है।

आर्कटिक से इंसानों के लिए खतरा
आपको बता दें कि पहले आर्कटिक में समुद्री बर्फ कई सालों तक जमी रहती थी लेकिन अब हर गर्मियों में यहां मौजूद बर्फ पिघल रही है। इसके पीछे वजह है ग्लोबल वॉर्मिंग। लगातार तापमान बढ़ने से आर्कटिक का बर्फ पिघल रहा है और आर्कटिक में मौजूद बर्फ के चट्टान भी टूट रहे हैं। इस रिसर्च के सह-लेखक और प्रोफेसर क्रिस्पिन हल्सॉल ने कहा कि, ''एक साल से जमा बर्फ लगातार कैमिकल्स को जमा करता रहता है और पीएफएएस जैसे खतरनाक कैमिकल्स भी इसमें शामिल रहते हैं और फिर पिछलने के बाद ये पानी में मिल जाते हैं और समुद्र तक पहुंच जाते हैं। ये काफी दुर्भाग्य की बात है कि अब आर्कटिक में काफी जहर आ गया है''। रिसर्च में पता चला है कि आर्कटिक पहुंचा ये जहर ना सिर्फ भालुओं की प्रजाति को खत्म कर देगा, बल्कि इंसानों के लिए भी ये काफी खतरनाक साबित होने वाला है।
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