Rakesh Chauhan Death: बॉडी से दिल-दिमाग-फेंफड़े सब गायब, Venezuela में हुई थी मौत, यूपी पहुंचा शव तब चला पता
Rakesh Chauhan Death: वेनेजुएला में संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए भारतीय नाविक राकेश चौहान का शव जब उत्तर प्रदेश के देवरिया पहुंचा, तो परिवार के सामने एक ऐसा सच आया जिसने सभी को हिला दिया। 33 साल राकेश की मौत को पहले दिल का दौरा बताया गया था, लेकिन दोबारा हुए पोस्टमार्टम में पता चला कि उनके शरीर से दिल, दिमाग, फेफड़े समेत लगभग सभी मुख्य आंतरिक अंग गायब थे। अब परिवार, नाविक संगठन और स्थानीय लोग इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
मर्चेंट नेवी में थे राकेश, वेनेजुएला में हुई मौत
राकेश चौहान देवरिया के लगदा बाजार टोला के रहने वाले थे और मर्चेंट नेवी में काम करते थे। वह Xfinity नाम की कंपनी के जरिए एक मालवाहक जहाज पर चालक दल के सदस्य के रूप में वेनेजुएला गए थे। मई 2026 में वहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। लगभग एक महीने बाद 4 जून को उनका शव भारत लाया गया, जिसके बाद मामला अचानक बेहद गंभीर हो गया।

पोस्टमार्टम में सामने आया चौंकाने वाला सच
देवरिया पहुंचने पर डॉक्टरों ने शव पर पहले से मौजूद चीर-फाड़ के निशान देखकर तुरंत पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया। बाद में जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर डॉक्टरों के एक पैनल ने दोबारा पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में पता चला कि शव के अंदर एक भी मुख्य अंग मौजूद नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक, राकेश के शरीर पर गर्दन से पेट तक 22 टांके और सिर के पीछे एक कान से दूसरे कान तक 21 टांके लगे थे। शरीर से दिमाग, दिल, फेफड़े, लिवर, किडनी, तिल्ली, अग्न्याशय, अमाशय, आंतें, थायराइड और श्वास नली तक गायब थीं। अंग न होने की वजह से डॉक्टर मौत का सही कारण नहीं बता सके।
क्या अंग तस्करी का मामला है?
आमतौर पर पोस्टमार्टम में सिर्फ जांच के लिए कुछ नमूने लिए जाते हैं, लेकिन इस मामले में वेनेजुएला के अधिकारियों ने न कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी और न ही मौत की स्पष्ट जानकारी। बिना किसी कानूनी दस्तावेज के लगभग खाली शव भारत भेजे जाने से अंग तस्करी की आशंका भी जताई जा रही है।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
राकेश के पिता राम देव चौहान का कहना है कि शिपिंग कंपनी ने उन्हें लगातार अलग-अलग बातें बताईं। पहले कहा गया कि राकेश जहाज पर गिर गए हैं और इलाज चल रहा है। अगले दिन मौत की खबर दी गई। बाद में कंपनी ने कहा कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई। परिवार का आरोप है कि कंपनी ने शव एक हफ्ते में भेजने का वादा किया था, लेकिन उसे करीब एक महीने तक फ्रीजर में रखने के बाद भारत भेजा गया।
नाविक संगठन ने उठाए सवाल
भारतीय नाविकों के संगठन फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (FSUI) ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया है। संगठन ने कहा कि बिना मेडिकल रिपोर्ट के शव भेजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय और वेनेजुएला स्थित भारतीय दूतावास से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या कहते हैं अंतर्राष्ट्रीय कानून?
अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, विदेश में किसी विदेशी नागरिक की संदिग्ध मौत होने पर संबंधित देश को पूरी मेडिकल रिपोर्ट उसके दूतावास को देनी होती है। राकेश चौहान के मामले में ऐसा नहीं हुआ, जिससे संदेह और गहरा गया है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना ने दुनिया भर में काम कर रहे लाखों भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी जहाजों पर काम करने वाले भारतीयों के लिए ज्यादा मजबूत कानूनी और राजनयिक सुरक्षा की जरूरत है। फिलहाल राकेश चौहान के परिवार की मांग सिर्फ एक है, पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
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