SCO Meeting: राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री से नहीं मिलाया हाथ, जानिए बैठक के दौरान क्या बोला चीन?

एससीओ 2001 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है। एससीओ की सदस्यता में भारत के अलावा कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।

SCO Meeting

SCO Meeting: दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन यानि एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक चल रही है, जिसमें भाग लेने के लिए चीन के रक्षा मंत्री भी पहुंचे हैं। गलवान घाटी हिंसक झड़प के बाद ये पहला मौका है, जब चीनी रक्षा मंत्री का भारत दौरा हो रहा है, लेकिन इस मौके पर भारत ने अपने गुस्से का इजहार किया है।

गलवान में सीमा उल्लंघन को लेकर भारत और चीन के बीच के तनाव को उजागर करने वाला एक मौका उस वक्त आया, जब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान उनसे हाथ नहीं मिलाया।

जियो पॉलिटिक्स के जानकारों का कहना है, कि अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में नेताओं की भाव-भंगिमा का काफी महत्व माना जाता है और नेताओं के हाव-भाव बताते हैं, कि देशों के बीच के संबंध कैसे हैं और भविष्य में कैसे रहने वाले हैं।

चीन के रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक में हाथ नहीं मिलाकर भारत की तरफ से चीन को साफ शब्दों में संदेश दे दिया गया है, कि भारत अब चुप रहने वाला नहीं है। समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है, कि राजनाथ सिंह अपने चीनी समकक्ष का हाथ जोड़कर स्वागत कर रहे हैं, लेकिन राजनाथ सिंह के चेहरे पर रूखापन भी देखा जा सकता है।

वहीं, ईरान और ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने काफी गर्मजोशी के साथ उनके साथ हाथ मिलाया।

द्विपक्षीय बैठक में क्या बोला चीन

वहीं, चीन के साथ हाथ नहीं मिलाने के बाद भी, चीन के रक्षा मंत्री जनरल ली शांगफू ने गुरुवार को भारत के साथ "व्यापक, दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण" की पुष्टि की है।

चाइना मिलिट्री ऑनलाइन ने रिपोर्ट किया है, कि शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ द्विपक्षीय बैठक में बोलते हुए, चीनी रक्षा मंत्री ने कहा, कि "प्रमुख पड़ोसी देशों और महत्वपूर्ण विकासशील देशों के रूप में, चीन और भारत मतभेदों की तुलना में, कहीं अधिक साझा हित साझा करते हैं। दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों और एक दूसरे के विकास को एक व्यापक, दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, और संयुक्त रूप से दुनिया और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए ज्ञान और शक्ति का योगदान देना चाहिए।"

द्विपक्षीय बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री ली ने बताया, कि वर्तमान में, चीन-भारत सीमा पर स्थिति आम तौर पर स्थिर है और दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से कम्युनिकेशन को बनाए रखा है।

चाइना मिलिट्री ऑनलाइन के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री ने कहा, कि "दोनों पक्षों को एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखना चाहिए, सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में एक उपयुक्त स्थिति में रखना चाहिए, और सामान्य प्रबंधन के लिए सीमा की स्थिति के सामान्यीकरण को बढ़ावा देना चाहिए।"

उन्होंने कहा, कि "यह आशा की जाती है कि दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से लगातार बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। दोनों सेनाओं के बीच विश्वास और द्विपक्षीय संबंधों के विकास में उचित योगदान दिया जाएगा।"

बैठक में भारत ने दिखाया सख्त रवैया

बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से अपने चीनी समकक्ष को अवगत कराया, था कि भारत और चीन के बीच संबंधों का विकास सीमाओं पर शांति और स्थिरता के प्रसार पर ही आधारित है।

उन्होंने कहा कि एलएसी पर सभी मुद्दों को मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों और प्रतिबद्धताओं के अनुसार हल करने की आवश्यकता है। राजनाथ सिंह ने दोहराया, कि मौजूदा समझौतों के उल्लंघन ने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे आधार को नष्ट कर दिया है और सीमा पर पीछे हटने का तार्किक रूप से डी-एस्केलेशन किया जाएगा।

आपको बता दें, कि आज एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में चल रही है, जिसकी अध्यक्षता राजनाथ सिंह कर रहे हैं। वहीं, इस बैठक में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ नहीं पहुंचे हैं, वो वर्चुअल तरीके से बैठक में हिस्सा ले रहे हैं।

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