Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

ईरान में लगे 'रईसी मुर्दाबाद' के नारे, क्या है देश में फैलते असंतोष की वजह

प्रदर्शन
BBC
प्रदर्शन

ईरान में तेज़ी से बढ़ते महंगाई के विरोध में प्रदर्शन देशभर में शुरू हो गए हैं. इसी बीच राजधानी तेहरान में बस ड्राइवरों की हड़ताल शुरू हो गई है.

इसफ़ाहान प्रांत के गोलपाएगान में प्रदर्शनों की ताज़ा तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें प्रदर्शनकारी 'रईसी मुर्दाबाद, तानाशाह मुर्दाबाद, देश छोड़ो' जैसे नारे लगाए हैं.

इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के ख़िलाफ़ भी नारे लगाए हैं.

ईरान के कई इलाक़ों में विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी हुई हैं. हालांकि, बीबीसी ने स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बीते सप्ताह शुरू हुए प्रदर्शनों में अब तक छह लोगों की मौत हुई है. इसके लिए सुरक्षाबलों को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

ईरानी प्रशासन ने अब तक मौतों को लेकर कुछ भी नहीं कहा है.

प्रदर्शन कैसे शुरू हुए?

आयातित गेहूं पर सब्सिडी कम किए जाने के बाद मई की शुरुआत में ईरान के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हुए थे. इसके कारण आटे से बनने वाली खाद्य वस्तुओं जैसे कि पास्ता और ब्रेड के दामों में बढ़ोतरी हुई है.

कट्टरपंथी धड़े से संबंध रखने वाले राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सरकार ने 3 मई को सब्सिडी घटाने का फ़ैसला लिया था. ईरान का कहना है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद खाद्य सुरक्षा संकट पैदा हुआ है.

इसके बाद सरकार ने खाद्य तेल और डेयरी उत्पादों के दाम भी बढ़ा दिए जिसके कारण प्रदर्शन कई और प्रांतों में भी होने लगे.

रईसी का कहना है कि 9 मई को उनकी सरकार सिर्फ़ अमीर ईरानियों को छोड़कर बाक़ी लोगों के लिए नक़द सब्सिडी को बढ़ा रही है. उनके प्रशासन ने बाद में घोषणा करते हुए कहा कि ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिए वो लोगों को डिजिटल कूपन मुहैया कराएगा.

कई लोगों ने ब्रेड समेत ज़रूरी खाद्य वस्तुओं की कमी की बात कही है जबकि सरकार का कहना है कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है.

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि वो ख़ुद से की गई 'इकोनॉमिक सर्जरी' प्लान को वापस लें.

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी
Getty Images
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी

सरकार की क्या है प्रतिक्रिया

सरकार ने कथित तौर पर ख़ुज़ेस्तान प्रांत में मोबाइल इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया है जबकि गृह मंत्री अहमद वहीदी ने इसे ख़ारिज किया है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट किए हैं जिनमें रॉएट पुलिस और स्पेशल पुलिस फ़ोर्सेज़ सड़कों पर हैं. ईरानी अधिकारियों ने वीडियो पर टिप्पणी नहीं की है लेकिन उनका कहना है कि सबकुछ 'शांतिपूर्ण' है और कोई सुरक्षा संकट नहीं है.

सरकारी मीडिया का कहना है कि 12 मई के बाद से 22 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आ रही रिपोर्टों में ये संख्या कहीं ज़्यादा है.

सरकार समर्थक लोगों का कहना है कि सरकारी आर्थिक नीतियों ने विरोध को ख़ारिज किया है.

तेहरान में ख़ामेनेई के प्रतिनिधि अयातुल्ला अहमद ख़तामी कहते हैं कि रईसी अर्थव्यवस्था का इलाज कर रहे हैं और आलोचकों को कुछ भी कहते वक़्त सावधान रहना चाहिए क्योंकि वो 'विदेशी मीडिया को चारा उपलब्ध कराते हैं.'

इसफ़ाहान के एक मुफ़्ती युसूफ़ तबाताबेईनिजाद ने जनता से अपील की है कि वो शोर न करें और 'अगर पास्ता महंगा हो गया है तो वो कुछ और खाएं.'

अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता हैं
EPA
अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता हैं

ईरानी मीडिया ने अब तक क्या कहा

ईरान के सरकारी मीडिया को प्रदर्शनों को स्वीकार करने में छह दिनों का समय लगा. हालांकि, शुरुआत में जो प्रतिक्रिया आई उसमें रैलियों और उसके महत्व को कम करके बताया गया था.

सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने 12 मई को पुष्टि करते हुए कहा कि 'कुछ शहरों में बिखरे हुए विरोध प्रदर्शन हुए हैं' और दावा किया था कि 'लोगों का जुटना बंद हुआ है और शांति बहाल हुई है.'

ईरान की सेना से संबंधित फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने 16 मई को एक ख़बर प्रकाशित की जिसमें यह बताया गया कि प्रदर्शन की अपील को जनता ने नज़रअंदाज़ किया है.

प्रदर्शनों को टीवी पर बहुत कम जगह दी गई है जबकि सरकारी टीवी चैनल IRIB ने प्रदर्शनों की पुष्टि करते हुए कहा था कि यह 'बहुत सीमित' हैं. इसमें यह भी दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अधिकतर वीडियो पुराने हैं.

प्रदर्शन क्यों है महत्वपूर्ण

एक सप्ताह से हर शाम प्रदर्शन होते हैं लेकिन इन प्रदर्शनों की ईरान में बीते कई सालों में हुए प्रदर्शनों से तुलना नहीं की जा सकती है. बीते प्रदर्शन बड़े स्तर पर थे और बहुत जगह हुए थे.

ईरान में इस समय प्रदर्शन ख़ुज़ेस्तान, चहारमहल-बख़्तियारी, ख़ुरासान रज़ावी और तेहरान जैसे शहरों में हुए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में ये प्रदर्शन छोटे स्तर के हैं और कम ही शहरों में रैलियां आयोजित हुई हैं.

इनकी तुलना में दिसंबर 2017 से लेकर जनवरी 2018 तक महंगाई के ख़िलाफ़, नवंबर 2019 में तेल के ख़िलाफ़ और जुलाई 2021 में पानी की कमी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे जो ख़ूनी और बड़े पैमाने पर थे.

महंगाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि वे लोगों की बेचैनी को दिखाते हैं कि सत्ता अर्थव्यवस्था को बेहतर करने में कितनी असमर्थ है.

ईरान के 43 सालों के इतिहास में अर्थव्यवस्था को लेकर इतने प्रदर्शन नहीं हुए हैं जितने बीते पांच सालों में हुए हैं.

आगे क्या हो सकता है?

ईरान में प्रदर्शन और कुछ दिनों तक चल सकते हैं लेकिन ऐसा लगता है कि आने वाले समय में ये कम होंगे.

ईरान की सरकार जानती है कि प्रदर्शनों को कैसे काबू में करना है और ऐसा लगता है कि रैलियां नियंत्रित की जा चुकी हैं.

राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के ख़िलाफ़ यह पहले सार्वजनिक प्रदर्शन हैं. उन्होंने अगस्त 2021 में सत्ता संभाली थी.

ये प्रदर्शन रईसी के लिए एक संकेत हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ख़ामेनेई के बाद वो ईरान के अगले सर्वोच्च नेता बन सकते हैं.

कॉपी - मोहम्मद शाहिद

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+