अनाज-फलों के लिए भारत पर निर्भर हैं ये देश, कतर को कैसे मिलती है सहायता, जानें सब कुछ
यूक्रेन में युद्ध के बाद से विश्व में खाद्य संकट बढ़ता ही जा रहा है। कतर देश इससे अछूता नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के डेटाबेस के अनुसार 2021 में भारत ने कतर को 34.77 मिलियन डॉलर मूल्य के गेहूं और मेसलिन का निर्यात किया।
दोहा, 09 जून: भारत ने इस सप्ताह की शुरुआत में कतर को देश की खाद्य सुरक्षा को पूरा करने में अपनी सहायता का आश्वासन दिया था। बता दें कि, कतर पर आतंकवाद को वित्त पोषित करने का आरोप लगा था। इसके बाद उसके तीन पड़ोसियों , संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन ने राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे। इसके बाद से कतर गंभीर खाद्य संकट से गुजरने लगा था।

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कतर सरकार को सहयोग का आश्वासन दिया
इधर, कतर की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान भारतीय उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कतर सरकार को खाद्य सुरक्षाको पूरा करने में भारत का सहयोग का आश्वासन दिया। "दोनों पक्षों ने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर हाल के वैश्विक विकास के प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा साझेदारी के लिए अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को नवीनीकृत किया।

खाद्य आपूर्ति के लिए भारत पर निर्भरता
चाहे खाद्य आपूर्ति का प्रश्न हो या अन्य सहायता, कतर देश काफी हद तक भारत पर निर्भर रहा है। 2020 में भारत द्वारा कतर को निर्यात किए जाने वाले मुख्य उत्पाद चावल, आभूषण और सोना थे। पिछले 25 वर्षों में भारत से कतर को निर्यात 1995 में 29.3 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2020 में 1.34 बिलियन डॉलर हो गया है।

गेहूं पर प्रतिबंध
यूक्रेन यु्द्ध के बाद, भारत ने परिस्थिति को देखते हुए मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसका सबसे ज्यादा असर मध्य पूर्व के देशों, यूएई, कतर, ओमान और मलेशिया को हुआ।

भारत मुख्य रूप से गेहूं का निर्यात अपने पड़ोसी देशों को करता है
भारत मुख्य रूप से गेहूं का निर्यात अपने पड़ोसी देशों को करता है। 2020-21 में बांग्लादेश की इसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक थी। 2020-21 में, भारत ने यमन, अफगानिस्तान, कतर और इंडोनिशिया जैसे देशों को गेंहूं का सप्लाई किया।

भारत का योगदान
वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCIS) के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में भारतीय गेहूं के लिए शीर्ष दस आयात करने वाले देश बांग्लादेश, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, यमन, अफगानिस्तान, कतर, इंडोनेशिया, ओमान और मलेशिया हैं। मंत्रालय ने कहा कि शीर्ष दस देशों में 2016-17 में भारत के गेहूं के निर्यात में 94 प्रतिशत से अधिक का योगदान था, अब 2020-21 में निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों में 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

कतर पानी की कमी वाला देश
कतर, जो पानी की कमी वाला देश है, के लिए खाद्य फसलों की खेती करना मुश्किल है। आयातित अनाज और खाद्य पदार्थों पर भारी निर्भरता के कारण यह अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में उतार-चढ़ाव के प्रति भी संवेदनशील रहा है। इस लिहाज से कतर देश में खाद्य संबंधित जोखिम सबसे अधिक है और यही कतर में खाद्य असुरक्षा का एक मुख्य कारण है।

कतर की सूची में खाद्य सुरक्षा हमेशा शीर्ष पर
कतर की सूची में खाद्य सुरक्षा हमेशा शीर्ष पर रही है। देश खाद्य आयात पर निर्भर करता है और भारत कई वर्षों से खाड़ी देश में पशुधन और फसलों के विकास को बढ़ाने के मामले में सहायता कर रहा है। 2017 में खाद्य संकट के दौरान, भारत ने तत्काल राहत के रूप में कतर के हमद बंदरगाह को न्हावा शेवा और मुंद्रा में भारत के बंदरगाहों से जोड़ने वाले प्रत्यक्ष शिपिंग मार्गों के माध्यम से दोहा को भोजन और आपूर्ति भेजी। 2019 में स्टेटिस्टा के अनुसार, कतर में अनाज का खाद्य पर्याप्तता राशन 0.2 प्रतिशत था जबकि दूध और डेयरी के मामले में यह 72.8 प्रतिशत था। सब्जियों की बात करें तो यह 19.3 प्रतिशत थी जबकि मांस और फलों के मामले में यह क्रमश: 12.1 प्रतिशत और 9.1 प्रतिशत थी।

भारत से 144 मिलियन डॉलर मूल्य के अनाज का आयात किया
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार 2020 में कतर ने भारत से 144 मिलियन डॉलर मूल्य के अनाज का आयात किया, जबकि मोती, कीमती पत्थरों, धातुओं और सिक्कों के मामले में यह 128 मिलियन डॉलर था। भारत द्वारा 2020 में कतर को 54.6 मिलियन मूल्य की सब्जियां और अन्य सामग्रियों का निर्यात किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र COMTRADE डेटाबेस के अनुसार, 2021 के दौरान कतर को भारत का गेहूं और मेसलिन का निर्यात 34.77 मिलियन डॉलर था। मेसलिन गेहूं और राई का मिश्रण है जिसे एक साथ बोया और काटा जाता है और आमतौर पर गेहूं के साथ वर्गीकृत किया जाता है।

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है कतर
इकोमेना की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कतर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ा समूह वहां रहता है। इस कारण वहां की जनसंख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। भूमि की सीमित उपलब्धता और पानी की कमी के कारण कृषि विकास में बाधाओं ने खाद्य सुरक्षा के बारे में चिंताओं को बढ़ा दिया है। कतर में सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी है, वहां की जलवायु परिस्थितियों के कारण वह अपनी खाद्य आवश्यकताओं का 90 प्रतिशत आयात करता है। इकोमेना रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश क्यूआर 4.38 बिलियन के कृषि व्यापार घाटे का भी सामना कर रहा है जो 1.2 बिलियन डॉलर के बराबर है।

क्या है कतर की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम
कतर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम की स्थापना 2008 में आत्मनिर्भरता के माध्यम से खाद्य आयात पर देश की निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से की गई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल खाद्य सुरक्षा नीति के लिए सिफारिशें करना है, बल्कि कृषि क्षेत्र के साथ संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने के लिए प्रथाओं को विकसित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के साथ जुड़ना भी है।












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