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BRI समिट में हिस्सा लेने चीन पहुंचे व्लादिमिर पुतिन, भारत ने तीसरी बार दिया शी जिनपिंग को झटका

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के अहम दौरे पर पहुंचे हैं। यहां वो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) समिट में हिस्सा लेंगे। पिछले साल रूस और यूक्रेन की जंग शुरू होने के बाद पुतिन का यह पहला अहम विदेशी दौरा है।

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने मार्च में पुतिन के खिलाफ वॉरंट जारी किया था। इसके बाद से वो कई महत्वपूर्ण आयोजनों से दूर रहे। ऐसे में पुतिन का यह पहला अहम विदेशी दौरा है।

Chinas Belt and Road Forum

इससे पहले पुतिन ने पूर्व सोवियत देश किरगिस्तान का दौरा किया था। अपनी इस यात्रा के दौरान पुतिन चीन के साथ रिश्तों को मजबूती देने और पश्चिमी देशों के विरुद्ध एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश करेंगे।

बुधवार को बीजिंग में पुतिन और जिनपिंग के बीच मुलाकात होगी। पुतिन तीसरी बार इस फोरम में शामिल हो रहे हैं। वह 2017 और 2019 में भी बेल्ट एंड रोड फोरम में शामिल हो चुके हैं।

इससे पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सोमवार को बीजिंग पहुंचे और अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की।

बैठक के बाद उन्होंने कहा, "हम इस आंदोलन, इस परियोजना को पूरे यूरेशियन महाद्वीप में समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।"

लावरोव और वांग ने यूक्रेन युद्ध को "राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों" से हल करने पर चर्चा की और गाजा में इज़राइल और हमास आतंकवादियों के बीच बढ़ते संघर्ष के बारे में भी बात की।

अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया और मध्य पूर्व के अन्य नेता भी बेल्ट एंड रोड फोरम में भाग लेने पहुंचे हैं। बीआरआई का मुख्य कार्यक्रम बुधवार को होने वाला है। इसमें अफगानिस्तान के तालिबान के प्रतिनिधि भी भाग लेने वाले हैं।

बीआरआई क्या है?

बीआरआई (BRI) यानी कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को न्यू सिल्क रोड भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद पूर्वी एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जल व थल मार्गों से जोड़ना और उन देशों में ऊर्जा और सुविधा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।

रिपोर्ट के मुताबिक अब तक चीन बीआरआई के तहत 3000 से अधिक परियोजनाओं में निवेश कर चुका है। इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सिंगापुर, रूस, सऊदी अरब आदि देशों में इस प्रोजेक्ट के तहत काफी निवेश किया गया है।

भारत शुरुआत से ही बीआरआई प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है। भारत साफ तौर पर कहता रहा है कि वह ऐसी किसी परियोजना को स्वीकार नहीं करेगा, जो उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करता हो।

आपको बता दें कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की एक महत्वपूर्ण परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरती है जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। इस इलाके में आर्थिक गतिविधियों में चीन के शामिल होने पर भारत ऐतराज जताता रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने एक बार फिर से सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) प्रोजेक्ट को लेकर संप्रभुता के मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक बार फिर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के शिखर सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि यह लगातार तीसरी बार है जब भारत बीआरआई के शिखर सम्मेलन का बहिष्कार कर रहा है।

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