पाकिस्तान में बनेगा धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून, इमरान खान के बिल से मचा बवंडर, इस्लाम के खिलाफ साजिश?
सबसे ज्यादा विवाद बिल में उम्र को लेकर है। बिल में कहा गया है कि धर्म परिवर्तन करने के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल होना अनिवार्य है। इसके साथ ही बिल में जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर जो सजा का प्रावधान है, वो काफी सख्त है।
इस्लामाबाद, सितंबर 16: अल्पसंख्यकों को लिए 'कत्लगाह' बने चुके पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान धर्म परिवर्तन के खिलाफ बेहद सख्त बिल लाने जा रहे हैं। इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। लेकिन, जो जानकारियां पाकिस्तानी पत्रकारों के हवाले से सामने आई हैं, उससे पता चला है कि इमरान खान का ये बिल काफी ज्यादा सख्त है। इस बिल का ड्राफ्ट अभी तैयार किया जा रहा है और इसे पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों और मौलानाओं के पास भेजा गया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में इस बिल के कुछ प्वाइंट्स, जो अब तक सार्वजनिक हुए हैं, उसे लेकर पूरे पाकिस्तान में बवंडर मच गया है और लोग इमरान खान को काफिर कह रहे हैं।

धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त बिल
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट है कि इमरान खान से धर्म परिवर्तन के खिलाफ बेहद सख्त बिल बनाने को मंजूरी मिलने के बाद धार्मिक मंत्रालय इस बिल का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। जिसमें काफी सख्त प्वांइट्स डाले गये हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, जबरन धर्मांतरण विरोधी विधेयक के मसौदे पर चर्चा के लिए धार्मिक मामलों के मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेने वाले मौलवियों और धार्मिक विद्वानों ने विधेयक पर गंभीर आपत्ति जताई है और मंत्रालय को चेतावनी दी कि इसे अपने वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जा सकता है। हालांकि, इस बैठक में पाकिस्तान के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के सदस्यों या इसके अध्यक्ष चेला राम को आमंत्रित नहीं किया गया था। NCM के एकमात्र मुस्लिम सदस्य, मुफ्ती गुलज़ार नईमी को एक स्थानीय मौलवी के रूप में आमंत्रित किया गया था।

18 साल से कम उम्र में धर्म परिवर्तन नहीं!
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल जो जानकारियां सामने आईं हैं, उसके मुताबिक इस बिल में धर्म परिवर्तन के खिलाफ काफी कड़े प्रावधान किए गये हैं। बताया जा रहा है कि इस बिल में कहा गया है कि किसी भी शख्स का धर्म परिवर्तन उसकी मर्जी के बाद भी 18 साल की उम्र से पहले नहीं किया जा सकता है। ये प्वाइंट अपने आप में काफी सख्त है। क्योंकि, पाकिस्तान में देखा जाता है कि नाबालिग बच्चियों को कम उम्र में अगवा कर उसे जबरदस्ती किसी मौलवी या किसी मुस्लिम शख्स से शादी करवा दी जाती है और उसका धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है। अगर इमरान खान के बिल में ये प्वाइंट है, तो इसे ऐतिहासिल कहा जा सकता है और इस प्वाइंट का असर पूरी तरह से दिखने की संभावना जताई जा रही है।

धर्म परिवर्तन के लिए 90 दिनों का वक्त
पाकिस्तानी पत्रकारों के मुताबिक, इस बिल में कहा गया है कि अगर कोई बालिग धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो सबसे पहले उसे जिला अदालत में अपना आयु प्रमाणपत्र देना होगा और एक दरख्वास्त देनी होगी कि वो अमुक वजहों से धर्म परिवर्तन करना चाहता है। उस शख्स के दरख्वास्त के बाद जिला अदालत उससे पूछेगा कि क्या वो अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करना चाहता है। अगर उसने मर्जी की बात कही, तो उसे सोचने के लिए 90 दिनों का वक्त दिया जाएगा। इन 90 दिनों में उसे अपने धर्म और जिस धर्म में जाना चाहता है, उस धर्म को पढ़ने के लिए कहा जाएगा। और फिर 90 दिनों के बाद उस शख्स को अदालत में पेश होना होगा। अगर वो 90 दिनों के बाद भी कहता है कि उसे धर्म परिवर्तन करना है, तो फिर उसे अदालत से एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा और फिर वो अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है।

जबरन धर्म परिवर्तन पर सजा
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, अगर कोई शख्स अदालत में इस दौरान कहता है कि उसपर धर्म परिवर्तन के लिए दवाब बनाया गया है, या उसे धमकी देकर धर्म परिवर्तन के लिए कहा गया है, तो फिर अदालत उस शख्स को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश देगा और आरोपी शख्स को फौरन गिरफ्तार करने का हुक्म दिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप साबित होने पर दोषी को 5 से 10 साल की सख्त सजा का प्रावधान किया जा रहा है। बिल में कहा गया है कि दोषी शख्स के ऊपर एक लाख से 2 लाख का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके साथ ही इस बिल में ये भी कहा गया है कि अगर कोई शख्स इस्लाम छोड़कर किसी और धर्म में जाना चाहता है, तो वो भी अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है। वहीं, धर्म परिवर्तन कराने वाले शख्स की उम्र का आधार उसके स्कूल सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र से माना जाएगा।

बिल पर पाकिस्तान में बवंडर
बताया जा रहा है कि इस सख्त बिल के बाद पाकिस्तान में बवंडर मच गया है और मजहबी लोग प्रधानमंत्री इमरान खान को काफिर कहकर अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं। पाकिस्तान के मजहबी जमात का कहना है कि इमरान खान इस्लाम के खिलाफ साजिश कर रहे हैं और इमरान खान के इस बिल से इस्लाम खतरे में आ जाएगा। मजहबी जमात का कहना है कि इस बिल के बाद वो किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवा पाएंगे। एक मौलवी ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि, ''जब माता-पिता अपने बच्चों को घरेलू हिंसा विधेयक के तहत डांट भी नहीं सकते, तो क्या वे अपने बच्चों को इस्लाम अपनाने से रोक सकते हैं? पाकिस्तान के मौलानाओं को सबसे ज्यादा एतराज उम्र को लेकर है। आपको बता दें कि सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन 18 साल से कम उम्र में ही पाकिस्तान में कराए जाते हैं।

पाकिस्तान क्यों बना रहा है बिल?
धर्म परिवर्तन के लिए पाकिस्तान काफी कुख्यात और बदनाम रहा है। जिसकी वजह से कई प्रतिबंध में पाकिस्तान घिरा हुआ है। यूरोपीयन यूनियन ने भी पाकिस्तान की जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त ऐतराज जताया था और एफएटीएफ में भी पाकिस्तान के ग्रे-लिस्ट में जाने की एक वजह ये है। लिहाजा इमरान खान चाहते हैं कि पाकिस्तान के माथे पर लगा बदनामी का ये दाग पोंछा जाए। इसीलिए इमरान खान सख्त बिल लाने की कोशिश में हैं। लेकिन, इमरान खान का भारी विरोध पाकिस्तान के अंदर शुरू हो गया है और उन्हें एंटी इस्लाम कहा जा रहा है। लोग उन्हें पश्चिमी देशों के हाथ का बिका हुआ नेता बता रहे हैं और कह रहे हैं अमेरिका- ब्रिटेन के दवाब में इमरान खान इस कानून को ला रहे हैं, जिससे इस्लाम को खतरा है। ऐसे में कहना मुश्किल है कि पाकिस्तान में वास्तव में इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा और क्या वास्तव में इमरान खान इसे कानून बना पाएंगे?












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