नेपाल का नागरिकता संशोधन कानून: कैसे भारत संग मजबूत होगा 'रोटी-बेटी का रिश्ता', चीन क्यों कर रहा विरोध?
नेपाल में नागरिकता कानून में एक विवादास्पद संशोधन को राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी उस समय दी गई जब नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ अपने पहले विदेश यात्रा के दौरे पर भारत में हैं।

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नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने नागरिकता कानून में एक विवादास्पद संशोधन को मंजूरी दे दी है। ये मंजूरी ऐसे वक्त में आई है जब नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' अपने चार दिवसीय दौरे पर भारत आए हुए हैं।
इस संशोधन को मंजूरी देने के बाद नेपाल में विरोध तेज हो गए हैं। केपी शर्मा ओली की विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने बुधवार को नेपाल के राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री का पुतला फूंका और राजधानी काठमांडू में संसद की ओर मार्च किया।
यह संशोधन नेपाल के नागरिक से शादी करने वाली विदेशी महिलाओं को राजनीतिक अधिकारों के साथ तुरंत नागरिकता प्रदान करता है। जानकारों का मानना है कि चीन इस कानून के पक्ष में नहीं है यदि ये संशोधन होता है तो उसकी नेपाल के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है।
यह वही संशोधन है जिसे पिछले साल 14 जुलाई को गतिरोध के बीच इसे संसद में पास कर दिया गया था। लेकिन पूर्व राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद द्वारा दूसरी बार वापस भेजे जाने के बाद भी इसे सहमति देने से इनकार कर दिया था।
इस विधेयक में किसी व्यक्ति को केवल एक मां के नाम से नागरिकता की अनुमति मिलती है। इतना ही नहीं, इस विधेयक से सार्क देश के बाहर रहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए अनिवासी नागरिकता का मार्ग भी प्रशस्त किया है।
ऐसा दावा किया गया कि चीन के दबाव में राष्ट्रपति ने इस संशोधन को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। नेपाल में भले ही कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार बनी है मगर इसे कई उदारवादी दलों का समर्थन मिला हुआ है। ऐसे में ये नागरिकता कानून में जल्द ही संशोधन किया जा सकता है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल का नया नागरिकता कानून उसे दुनिया के सबसे उदार कानूनों में से एक बनाता है। यह कानून संशोधन चीन को मंजूर नहीं था। वह पहले भी इसे लेकर नेपाल को चेतावनी देता रहा है।
यही वजह है कि यह संशोधन कई सालों से अटका हुआ था। चीन को डर है कि नेपाल का नागरिकता कानून तिब्बती शरणार्थियों के वंशजों को नागरिकता और संपत्ति का अधिकार दे सकता है।
आपको बता दें कि भारत के बाद, नेपाल दुनिया में सबसे ज्यादा तिब्बती शरणार्थियों का घर है। नेपाल ने तिब्बती नागरिकों से जुड़ा कोई दस्तावेजीकरण नहीं कराया है जिससे सटीक संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है।
क्यों हो रहा संशोधन?
नेपाल में 20 सितंबर, 2015 में नया संविधान लागू हुआ। इसमें विदेशी महिलाएं जिनकी शादी नेपाली युवक संग हुई है, उनकी नागरिकता के लिए विशेष व्यवस्था नहीं की गई।
संविधान के मुताबिक, उन्हें नागरिकता देने के लिए एक संघीय कानून की जरूरत थी, लेकिन संविधान लागू होने के 7 साल बाद भी संघीय कानून नहीं लाया गया।
संशोधन लाए जाने को लेकर नेपाली सरकार का कहना है कि हजारों लोग ऐसे हैं, जिनके माता-पिता नेपाल के नागरिक हैं, लेकिन फिर भी वे नागरिकता प्रमाण पत्र से वंचित हैं। इसकी कमी के कारण वो लोग शिक्षा और दूसरी सुविधाओं सें वंचित हैं।
भारत को क्या फायदा होगा?
भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। दोनों देशों के बीच सदियों से धार्मिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों से बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी नेपाल में हुई है। चीन समर्थक सरकार के आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट आ गई थी।
ओली के प्रधानमंत्री पद और उनकी समर्थक राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद अब एक बार फिर से भारत और नेपाल के बीच रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। नागरिकता कानून में संशोधन उसी का एक सबूत है।












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