बाइडेन की पोती के हाथ में जाम देख भड़के अमेरिकी, 13 सैनिकों की मौत से मातम

वाशिंगटन, 31 अगस्त। अमेरिकी मीडिया में एक तस्वीर छपने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन विवादों में आ गये हैं। इस वक्त अमेरिका के लोग अफगानिस्तान में अपने सैनिकों के मारे जाने से बेहद दुखी हैं। शहीद सैनिकों के परिजनों की आंखों में आंसू हैं। लेकिन इस बीच राष्ट्रपति जो बाइडेन की पोती नाओमी बाइडन की ऐसी तस्वीरें सामने आयी हैं जिसमें वे ड्रिंक ले रही हैं और दोस्तों के साथ जश्न मना रही हैं। ये तस्वीर इटली की है।

President Bidens granddaughter Naomi attends a friends wedding party after death of 13 soldiers

राष्ट्रीय मातम के बीच इन तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद बाइडेन परिवार की संजीदगी पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार की नाकामी पर लोग पहले से नाराज हैं। अफगानिस्तान में शहीद राइली मैकोलम की मां कैथी मोकलम ने एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा, मैं उन सभी डेमोक्रट्स से कहना चाहती हूं जिन्होंने चुनाव में धोखा दिया, "उन लोगों से भी कहना चाहती जिन्होंने उन्हें वोट दिया, आप सभी ने मेरे बेटे को मार डाला। वह (बाइडेन) यह नहीं जानता कि वह व्हाइट हाउस में है, वह अभी भी सोचता है कि वह सीनेटर ही है। मेरे मन में बेटे को खोने का गुस्सा है। मैं शांत होने की कोशिश कर रही हूं। कृपया मुझे माफ कीजिए।"

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    राष्ट्रपति की पोती सेलिब्रेशन में मशगूल

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    नाओमी बाइेडन की उम्र 26 साल है और वे राष्ट्रपति जो बाइडेन के पुत्र हंटर बाइडन की बेटी हैं। नाओमी ने कानून की पढ़ाई की है। पीटर नील उनके ब्वाफ्रेंड हैं जो उनके क्लासमेट रहे हैं। नाओमी अपने एक मित्र की शादी में शामिल होने के लिए इटली के कोमो शहर गयीं। इस विवाह समारोह में नाओमी के साथ उनके ब्वायफ्रेंड पीटर नील भी शामिल हुए। एक अमेरिकी अखबार ने इस विवाह समारोह की तस्वीरें प्रकाशित की हैं। इन तस्वीरों मे नाओमी ने काफी कीमती और स्टाइलिश ड्रेस पहन रखी है। वे अपने दोस्तों के साथ ठहाके लगाती हुईं दिख रही हैं। एक तस्वीर में वे और उनके पुरुष मित्र नील हाथ में ड्रिंक लिये हुए हैं। नाओमी घूम घूम कर कई मेहमानों के साथ बात भी कर रही हैं। इस पार्टी में वेटरों ने तो मास्क पहना हुआ है लेकिन नाओमी समेत किसी मेहमान ने मास्क नहीं पहन रखा है।

    राष्ट्रपति की दुलारी पोती

    राष्ट्रपति की दुलारी पोती

    नाओमी बाइडन अपने दादा राष्ट्रपति जो बाइडेन के बहुत करीब हैं। उन्होंने अपने दादा के चुनाव प्रचार में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। राष्ट्रपति चुनाव के समय (2020) के उनके पिता हंटर बाइडेन पर आरोप लगा था कि उन्होंने जो बाइडेन के नाम का इस्तेमाल कर यूक्रेन की गैस कंपनी में बोर्ड मेम्बर का पद हासिल किया था। तब चुनाव प्रचार की कमान संभाल रही नाओमी ने अपने पिता और दादा का बखूबी बचाव किया था। नाओमी की राजनीति में दिलचस्पी है। जो बाइडेन के सात पोते-पोतियों में नाओमी सबसे जहीन और मुखर हैं। जब बाइडेन अमेरिका के उप राष्ट्पति थे (20 जनवरी 2009 से 20 जनवरी 2017) तब नाओमी विदेशी दौरों पर उनके साथ जाती थीं। उन्होंने 20 साल की उम्र में ही न्यूजीलैंड, तुर्की, तीन जैसे देशों की यात्रा कर ली थी। वे ट्वीटर पर सक्रिय रहती हैं और महत्वपूर्ण घटनाओं पर अपनी बेबाक राय रखती हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जो बाइडेन का चाहे जितना भी विरोध हो लेकिन नाओमी अपने दादा से बिल्कुल अलग हैं। डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप नाओमी की पक्की सहेली हैं। दोनों ने पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी में एकसाथ पढ़ाई की है। दोनों एक साथ रात में जग कर परीक्षा की तैयारियां करती थीं।

    बाइडेन प्रशासन को इस घटना से उबरने में समय लगेगा

    बाइडेन प्रशासन को इस घटना से उबरने में समय लगेगा

    जो बाइडेन ने जब इस साल के शुरू में राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया था तब उन्होंने कहा था कि अब अमेरिका के किसी बेटा या बेटी को अफगानिस्तान में मरने के लिए नहीं भेजेंगे। काबुल से जल्द ही अमेरिकी फौज वापस लौट आएगी। लेकिन 15 अगस्त को जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया तो बाइडेन प्रशासन ने काबुल हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए और फौज भेज दी। हजारों सैनिकों को आनन-फानन में वहां बुलाया गया। इतने खतरनाक ऑपरेशन के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय नहीं किये गये। इसको लेकर शहीदों के परिजनों के मन में गुस्सा है। लोगों की भावनाओं को शांत करने के लिए राष्ट्रपति बाइडेन शहीदों के परिवार से मिल रहे हैं। बाइडेन सरकार ने शहीदों के आश्रितों को 5 लाख डॉलर (3 करोड़ 66 लाख 30 हजार 500 रुपये) देने की घोषणा की है। रविवार को वे डोवर (डेलावेयर राज्य की राजधानी) गये। वहां उन्होंने शहीदों के परिजनों से मुलाकात की। हर तरफ खामोशी और उदासी थी। 2001 से 2019 के बीच अफगानिस्तान में अमेरिका के करीब ढाई हजार सैनिक मारे जा चुके हैं। वे दुश्मनों से लड़ते हुए अमेरिका के गौरव के लिए शहीद हुए। इसलिए कभी मातम का माहौल नहीं रहा। लेकिन काबुल हवाई अड्डे पर 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत को लोग भूल नहीं पा रहे हैं। बाइडेन प्रशासन को घटना से उबरने में बहुत समय लगेगा। अमेरिकी राजनीति के लिए यह घटना निर्णायक भी साबित हो सकती है।

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