बाइडेन ने PM मोदी के लिए बिछाया रेड कार्पेट.. भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे का कैसा कवरेज कर रहा अमेरिकी मीडिया?
US Media on PM Modi Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने करीब 9 सालों के कार्यकाल में पहली बार अमेरिका के राजकीय मेहमान बनकर वॉशिंगटन गये हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए बाइडेन परिवार ने निजी डिनर पार्टी का आयोजन किया है, जिसके बाद पीएम मोदी अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे।
पीएम मोदी विश्व के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिकी संसंद को दो बार संबोधित किया है। वहीं, मनमोहन सिंह के बाद नरेन्द्र मोदी दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें अमेरिका ने राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। पीएम मोदी के इस दौरे को अमेरिका के साथ साथ भारत भी, दोनों देशों के संबंध के लिए नया अध्याय बता चुका है। लिहाजा, जानना दिलचस्प हो जाता है, कि भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर अमेरिकी मीडिया में क्या कहा जा रहा है?

हालांकि, ज्यादातर अमेरिकी मीडिया में पीएम मोदी के दौरे को लेकर आर्टिकल लिखे जा रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर उनके दौरे की कवरेज नहीं हो रही है, जैसा की भारतीय मीडिया में किया जा रहा है।
पीएम मोदी का यूएस दौरा, क्या कह रहा मीडिया?
वैसे तो पश्चिमी देशों की मीडिया ने हमेशा से भारत को लेकर निगेटिव रिपोर्टिंग की है, लेकिन मोदी के कार्यकाल में निगेटिव रिपोर्टिंग और भी ज्यादा बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस दौरे को लेकर भी अमेरिकी मीडिया के एक हिस्से में, बार बार मानवाधिकार, लोकतंत्र और फ्रीडम ऑफ स्पीच को लेकर नरेन्द्र मोदी से सवाल पूछे जा रहे हैं।
CNN ने पीएम मोदी के दौरे को लेकर अपने Analysis आर्टिकल में भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाया है। सीएनएन के इस आर्टिकल के हेडलाइंस में लिखा है, कि "अमेरिका ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताया है, लेकिन अमेरिका के ज्यादातर लोग इससे खुश नहीं हैं।"
सीएनएन के इस आर्टिकल में लिखा है, कि "भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार संयुक्त राज्य अमेरिका ने बैन कर दिया था और "धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन" के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया गया था, उन्हें लगभग एक दशक तक अमेरिका में प्रवेश करने से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन नौ वर्ष पहले उनपर प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद से, मोदी को व्हाइट हाउस ने काफी गर्मजोशी से गले लगाया है।"
इसके अलावा, सीएनएन के एक और आर्टिकल में लिखा गया है, कि "बाइडेन ने पीएम मोदी के लिए रेड कार्पेट बिछाया"...। सीएनएन के इस आर्टिकल में लिखा गया है, कि अमेरिकी डिप्लोमेसी के लिए पीएम मोदी का ये दौरा काफी महत्वपूर्ण है और राष्ट्रपति बाइडेन उम्मीद कर रहे हैं, कि भारत के साथ कई व्यापारिक और रक्षा सौदे होंगे।
इसके अलावा, सीएनएन की इस रिपोर्ट में कहा गया है, कि "भारत में व्यापक रूप से लोकप्रिय मोदी ने अधिनायकवाद की ओर झुकाव प्रदर्शित किया है, जिसने पश्चिम को चिंतित कर दिया है। उन्होंने असहमति जताने वालों पर नकेल कसी, पत्रकारों को निशाना बनाया और ऐसी नीतियां पेश कीं, जिनके बारे में मानवाधिकार समूहों का कहना है, कि वे मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव करती हैं, बावजूद इसके, मोदी और भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, एशिया में बाइडेन की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कड़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।"
वॉशिंगटन पोस्ट ने क्या लिखा है?
वॉशिंगटन पोस्ट के वेबसाइट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे को लेकर सिर्फ एक आर्टिकल दिख रही है, जिसका शीर्षक है, 'मोदी की अमेरिकी यात्रा एक बड़ा, भले ही शांत, लेकिन चीन को संकेत है।"
इस लेख में लिखा गया है, कि "पिछले कई वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत द्वारा जारी संयुक्त बयानों में उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों की निंदा की गई है, तालिबान से मानवाधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया गया है और म्यांमार में हिंसा को समाप्त करने की अपील की गई है। लेकिन कभी भी भारत के प्राथमिक प्रतिद्वंद्वी चीन का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।"
"फिर भी हाल के वर्षों में वह चीन ही है, जिसने भारत के मुख्य सुरक्षा खतरे के रूप में पाकिस्तान की जगह ले ली है। जबकि, दिल्ली उन आरोपों को कम करना चाह सकती है, जो बीजिंग में नेतृत्व के साथ तनाव बढ़ा सकते हैं, लेकिन अपनी सीमा पर भारत के साथ चीन की झड़पों ने दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों को इंडो-पैसिफिक में फिर से प्रतिद्वंद्वियों में बदल दिया है।"
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, कि "यह उस प्रतिद्वंद्विता का पुनरुत्थान है, जो दशकों की तनातनी के बाद - जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक हितों के मिलन को संभव बनाया है।"
ज्यादातर मीडिया संस्थानों में कोई कवरेज नहीं
न्यूयॉर्क टाइम्स की वेबसाइट पर भारतीय समयानुसार 11 बजे हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से संबंधित एक भी खबर देखने को नहीं मिली।
वहीं, फॉक्स न्यूज की वेबसाइट पर भी भारतीय समयानुसार 11 बजे हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस 'ऐतिहासिक यात्रा' को लेकर कोई कवरेज देखने को नहीं मिली है।
न्यूयॉर्क टाइम्स और फॉक्स न्यूज के अलावा यूएसए टूटे, वाल स्ट्रीट जर्नल, लॉस एंजिलिस टाइम्स, Tampa Bay Times, Newsday और startribune.com के होम पेज पर हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा से संबंधित कोई भी कवरेज देखने को नहीं मिली।












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